Tuesday, October 18, 2022

दिवाली पर गोबर से बने दीपक करेंगे घर आंगन रोशन




जयपुर | दीवाली पर घरों को रोशन करने के लिये जलाये जाने वाले मिट्टी के दियों के स्थान पर इस बार गोबर से बने दियों से घर-आंगन रोशन होंगे। राजस्थान की राजधानी जयपुर के *हिंगोनिया गौ पुनर्वास केंद्र* में गाय के गोबर से दीपक बनाने का कार्य तेजी से हो रही है। प्रतिदिन लगभग दो हजार दीपक बनाये जा रहे है |

जयपुर में हिंगोनिया गौ पुनर्वास केंद्र के ऑर्गेनिक फार्म में गाय के गौबर से दीपक बनाने के लिए हरे कृष्ण मूवमेंट के भक्तो ने इस दिशा में अभिनव पहल की है। इको फ्रेंडली होने के चलते राज्य के अन्य शहरों और अन्य राज्यों में भी इसकी मांग आ रही है। इसके अलावा यहां बचे हुए गोबर चूर्ण और पत्तियों से ऑर्गेनिक खाद (वर्मी कम्पोस्ट) एवं यज्ञ में उपयोग होने वाली सुगन्धित धुप एवं इको फ्रेंडली गो कास्ट भी बनाई जा रही है

कैसे बनते है इको फ्रेंडली दीपक 

दीपक बनाने के लिए पहले गाय के सूखे गोबर को इकट्ठा किया जाता है। उसके बाद करीब एक किलो गोबर में 50 ग्राम मैदा लकड़ी चूर्ण और 50 ग्राम ग़म ग्वार मिलाया जाता है इसके बाद हाथ से उसको गूंथा जाता है। इसके बाद गाय के गोबर को दीपक का खूबसूरत आकार दिया जाता है। एक मिनट में पांच से छ: दीये तैयार हो जाते हैं। इसे दो दिनों तक धूप में सुखाया जाता है। ख़ास बात ये है की उपयोग के बाद इन दीपक के अवशेष को खाद के रूप में उपयोग लिया जा सकता है। हिंगोनिया गोशाला के अध्यक्ष श्री रघुपति दास जी ने बताया कि शास्त्रों के मुताबिक गौमाता के गोबर का उपयोग धार्मिक कार्यो में किया जाता है। इसलिए हमारा लक्ष्य 25 हजार दीये बनाने का है ताकि लोग गाय के गोबर के महत्व को जानें। इसके साथ-साथ हवन तथा यज्ञ में उपयोग होने वाली सुगन्धित धुप एवं इको फ्रेंडली गो कास्ट भी बनाई जा रही है

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