Thursday, August 25, 2022

विश्व मच्छर दिवस पर, गोदरेज ने रणनीतिक सहयोग के जरिए मलेरिया से लड़ाई जीतने के तरीके का खुलासा किया

राष्ट्रीय, 25 अगस्त, 2022: विश्व मच्छर दिवस पर, गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (जीसीपीएल) ने प्रोजेक्ट एम्बेड (एलिमिनेशन ऑफ मॉस्किटो बॉर्न एंडेमिक डिजीजेज) के माध्यम से मलेरिया और अन्य वेक्टर जनित रोगों से लड़ने के लिए मध्य प्रदेश सरकार के साथ सहयोग के 6 साल पूरे किए। 2016 से, एम्बेड के अंतर्गत गहन व्यवहार परिवर्तन कार्यक्रम चलाए गए हैं, जिनसे मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मलेरिया और अन्य वेक्टर जनित बीमारियों से उच्च जोखिम वाले 11.5 मिलियन से अधिक लोगों के जीवन में बदलाव आ पाया है।

एम्बेड पहल के तहत चलाई गई परियोजनाओं में से एक, 2030 तक मलेरिया उन्मूलन के भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य का समर्थन करने के लिए काम करती है। हम डब्ल्यूएचओ के सहयोग से मलेरिया उन्मूलन 2016-2030 और मलेरिया उन्मूलन 2017-2022 के लिए राष्ट्रीय रणनीतिक योजना का भारत सरकार के ढाँचों के अनुरूप समर्थन करते हैं और पूरक सहयोग प्रदान करते हैं।
एम्बेड (EMBED) कार्यक्रम को नेशनल सेंटर फॉर वेक्टर बॉर्न डिजीजेज कंट्रोल, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के साथ मिलकर मध्य प्रदेश में शुरू किया गया। 2015 में, मध्य प्रदेश श्रेणी-3 में था, जहाँ 25 जिलों में मलेरिया के मामले थे। 2021 में, मध्य प्रदेश श्रेणी-1 में पहुँच गया और मलेरिया के कम मामले वाले शीर्ष 10 राज्यों में शामिल हो गया। यहाँ मलेरिया संक्रमण प्रति 1,000 जनसंख्या पर 1 मामले से भी कम हो गया है। इस अवधि के दौरान, एम्बेड के हस्तक्षेप वाले गांवों में राज्य के 45% मलेरिया के मामले थे। मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी इस पहल के तहत जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं द्वारा दिए जाने वाले तकनीकी समर्थन और प्रशिक्षण की सराहना की।
इस प्रोग्राम के तहत मलेरिया उपचार के लिए एक ऐप भी तैयार किया गया है, जिसका उपयोग उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभागों द्वारा किया जा रहा है और यह गोंडी और हल्बी जैसी स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध है।
एम्बेड कार्यक्रम मलेरिया के खिलाफ लड़ाई में सभी को एक साथ लाने में सक्षम रहा है। इस कार्यक्रम के जरिए मध्य प्रदेश राज्य स्वास्थ्य विभाग, जिला स्तर पर समितियों, पंचायतों, आशा कार्यकर्ताओं और नागरिकों के साथ सहयोग किया गया। कार्यक्रम ने मौजूदा ढांचे में अंतराल को पाटने का काम किया। उदाहरण के लिए, स्वास्थ्य विभाग द्वारा गांवों में धूमन अभियान चलाने से पहले टीम ने स्वास्थ्य विभाग के साथ काम किया और गांवों और घरों का दौरा किया। उन्होंने ग्रामीणों को श्रेणीबद्ध किया और उन सार्वजनिक स्थानों पर घेरा बनाया जहाँ मच्छरों के प्रजनन वाली जगहों से खतरा था। इससे धूमन अभियान के प्रभावी कवरेज में मदद मिली और मच्छरों के प्रजनन में कमी आई।
कार्यक्रम के सहयोगपूर्ण दृष्टिकोण के चलते 2016 से 2021 के बीच मलेरिया के मामलों में 96% की गिरावट आई और यह राज्य मलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य को पूरा करने की राह पर अग्रसर है। मच्छरों के खिलाफ चलाए गए इस कार्यक्रम की एक बड़ी जीत यह थी कि मध्य प्रदेश के चार सबसे अधिक मलेरिया प्रभावित जिलों - अलीराजपुर, झाबुआ, श्योपुर और शिवपुरी के 469 हस्तक्षेप वाले गाँवों में से 80% मलेरिया-मुक्त हो गए।
हमने अपने प्रयासों का विस्तार किया है और अब सरकार के साथ साझेदारी में भारत के चार मेट्रो शहरों में डेंगू और अन्य वेक्टर जनित रोगों के प्रति जागरूकता पर काम कर रहे हैं।
मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ प्रभुराम चौधरी ने बताया, "मध्य प्रदेश सार्वजनिक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के सहयोग से फैमिली हेल्थ इंडिया और गोदरेज सीएसआर राज्य के 11 मलेरिया प्रभावित जिलों में वेक्टर जनित बीमारी को खत्म करने के लिए प्रोजेक्ट एम्बेड चला रहे हैं। इस परियोजना ने सामुदायिक स्तर पर आईईसी, बीसीसी गतिविधियों, आशा और जमीनी स्तर के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण में भाग लिया है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग को जन जागरूकता कार्यक्रम के रूप में मलेरिया उन्मूलन के संबंध में प्रोजेक्ट एम्बेड से जनजागरूकता कार्यक्रम के रूप में मलेरिया उन्मूलन हेतु उत्कृष्ट सहायता मिली है। तकनीकी सहायता ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एम्बेड प्रोजेक्ट ने मलेरिया पॉजिटिव मामलों के सही उपचार के लिए मलेरिया डोज चार्ट एप्लिकेशन विकसित किया है जिसका उपयोग आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं द्वारा किया जाता है और यह मध्य प्रदेश के सभी 51 जिलों में लागू है। यह एप्लिकेशन मलेरिया के सही और पूर्ण उपचार में मदद कर रहा है। इन संस्थानों के सहयोग से, राज्य सरकार ने एलएलआईएन, बुखार निगरानी, और मलेरिया रोगियों के व्यापक उपचार में उचित उपयोग करने पर काम किया है। इसने वेक्टर स्रोतों को कम करने में भी मदद की है। इन संयुक्त प्रयासों से मप्र को 2021 में मलेरिया उन्मूलन में श्रेणी 3 से श्रेणी 1 में लाया गया है। मुझे आशा है कि मलेरिया प्रभावित जिलों में राज्य में एम्बेड प्रोजेक्ट का विस्तार किया जाएगा ताकि राज्य सरकार को मलेरिया और डेंगू नियंत्रण को खत्म करने में मदद मिलती रहे।”

गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक, सुधीर सीतापति ने कहा, “स्वास्थ्य और गरीबी परस्पर जुड़े हुए हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्याएं गरीब लोगों को असंगत रूप से प्रभावित करती हैं। भारत में मलेरिया और डेंगू के कारण मजदूरी का नुकसान गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। प्रोजेक्ट एम्बेड प्रामाणिक रूप से सहयोगी मॉडल है जो यह सुनिश्चित करता है कि लोग जागरूक हों, सावधानी बरतें और मलेरिया से निपटने के लिए सही समय पर चिकित्सा सहायता लें। एम्बेड के माध्यम से हमारी भूमिका और उद्देश्य मौजूदा सरकार के प्रयासों में सहायता प्रदान करना और व्यवहार परिवर्तन, मलेरिया को रोकने के लिए सामुदायिक कार्रवाई को प्रोत्साहित करना, और समय पर निदान और उपचार द्वारा अंतिम प्रभाव सुनिश्चित करना है। एम्बेड की सफलता के साथ अब हमारा लक्ष्य डेंगू और अन्य वेक्टर जनित बीमारियों से लड़ना और 2025 तक 30 मिलियन से अधिक लोगों की रक्षा करना है।"

फैमिली हेल्थ इंडिया के निदेशक, डॉ बिट्रा जॉर्ज ने बताया, "जीसीपीएल से वित्त पोषण सहायता के साथ, फैमिली हेल्थ इंडिया (एफएच इंडिया) ने 2030 तक मलेरिया को खत्म करने के अपने लक्ष्य में राज्य वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम, मध्य प्रदेश सरकार का समर्थन किया है। राज्य द्वारा व्यवहार परिवर्तन संचार उपकरण और ऑनलाइन प्रशिक्षण मॉड्यूल को अपनाया गया है और मध्य प्रदेश के सभी जिलों में इसका विस्तार किया गया है। 25 अप्रैल 2022 को नई दिल्ली में आयोजित विश्व मलेरिया दिवस समारोह के अवसर पर मलेरिया उन्मूलन की दिशा में मध्य प्रदेश ने एम्बेड टीम के प्रयासों से राष्ट्रीय स्तर पर श्रेणी 01 का दर्जा हासिल किया है। हमें गोदरेज के साथ-साथ लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग, मध्य प्रदेश सरकार के संग अपनी साझेदारी पर गर्व है और हम राज्य में मलेरिया उन्मूलन लक्ष्य की दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं।”
गोदरेज इंडस्ट्रीज एंड एसोसिएट कंपनीज के हेड - सीएसआर और सस्टेनेबिलिटी, गायत्री दिवेचा ने कहा, "एम्बेड से हमारी सबसे बड़ी सीख यह है कि विकास संबंधी समस्याएं आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं और इनके समाधान के लिए बड़े पैमाने पर प्रणालीगत परिवर्तन और नवाचार की आवश्यकता है। इन समस्याओं पर साइलो में काम करना मुश्किल है। राज्य के स्वास्थ्य विभागों में विभिन्न सरकारी संस्थाओं, जिला कलेक्टरों, मुख्य चिकित्सा अधिकारियों और पंचायत के लोगों के साथ हमारी सफल भागीदारी हमारी सफलता के लिए एक आवश्यक घटक रही। मप्र सरकार की अपार प्रतिबद्धता, समर्पण और रणनीतिक दृष्टि के बिना, एम्बेड के साथ किया जाने वाला हमारा कोई भी कार्य संभव नहीं हो पाता।"
भारत की 95% से अधिक आबादी मलेरिया-स्थानिक क्षेत्रों में रहती है। 80% मामले उन 20% आबादी के बीच होते हैं जो आदिवासी, पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में रहते हैं। राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के आंकड़े मलेरिया के मामलों के भार के साथ-साथ मृत्यु दर में स्पष्ट गिरावट को प्रकट करते हैं। लेकिन विश्व मलेरिया रिपोर्ट 2021 के आंकड़े बताते हैं कि मलेरिया के मामलों में गिरावट की दर महामारी से पहले की तुलना में धीमी रही है। इसके अलावा, रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि भारत में अभी भी दक्षिण पूर्व एशिया के 80% से अधिक मलेरिया के मामले हैं। शोध के अनुसार, मलेरिया में 10% की कमी को सकल घरेलू उत्पाद में 0.3% की वृद्धि के साथ जोड़ा गया है। भारत में मलेरिया से कुल आर्थिक बोझ लगभग 1.9 बिलियन अमरीकी डालर है और इसे उलटा किया जा सकता है क्योंकि मलेरिया रोग का उन्मूलन संभव है।

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