Monday, June 27, 2022

एसीसी ने उत्सर्जन की निगरानी और इसकी रोकथाम के लिए इस्तेमाल किए उन्नत तकनीकी समाधान

मुंबई, 27 जून 2022- भारत की अग्रणी और सबसे सस्टेनेबल सीमेंट निर्माता कंपनियों में से एक एसीसी लिमिटेड ने कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए उन्नत तकनीकी दृष्टिकोण अपनाया है। इस तरह कंपनी ने अपने कार्बन उत्सर्जन की निगरानी और उस पर अंकुश लगाने के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव ला दिया है।

कंपनी ने वायु उत्सर्जन को कम करने के लिए देश भर में अपने विनिर्माण संयंत्रों में उपकरणों के नियमित रखरखाव के अलावा उन्नत प्राथमिक और माध्यमिक उपायों को भी लागू किया है। इस तरह एसीसी को विभिन्न नियामकों द्वारा अनिवार्य उत्सर्जन सीमा मूल्य का अनुपालन करने में मदद मिलती है।

एसीसी ने वायु उत्सर्जन की निगरानी के लिए अपने सभी 17 सीमेंट संयंत्रों में निरंतर उत्सर्जन निगरानी प्रणाली भी स्थापित की है। एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों के माध्यम से निरंतर वायु गुणवत्ता की निगरानी भी की जाती है। सभी संयंत्रों में सभी परिचालनों में उच्च दक्षता वाले बैग फिल्टर होते हैं, जिसमें क्लिंकर कूलर एप्लीकेशंस में नवीनतम इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रीसिपिटेटर तैनात होते हैं। अधिकतम दक्षता के लिए सभी उपकरणों का समय-समय पर रखरखाव भी किया जाता है।

इसके अलावा, एसीसी ने कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए कई उपाय किए हैं, जैसे कि क्लिंकर फैक्टर को कम करना, थर्मल सबस्टीट्यूशन रेट में सुधार करना, थर्मल और विद्युत ऊर्जा की तीव्रता को कम करना, वेस्ट हीट रिकवरी सिस्टम को लागू करना, और नवीकरणीय ऊर्जा खपत की दर में वृद्धि करना, और नई टैक्नोलॉजी की शुरुआत करना।

एसीसी लिमिटेड के एमडी और सीईओ श्री श्रीधर बालकृष्णन ने कहा, ‘‘हमारा उद्देश्य अपने सभी हितधारकों को एक उद्देश्यपूर्ण और सस्टेनेबल तरीके से मूल्य प्रदान करना है। और यहीं से हमारा वह विजन शुरू होता है, जिसमें पर्यावरण को सर्वप्रथम रखा जाता है। हमारा मानना है कि हमारे उत्सर्जन का स्तर इतना ही हो कि इससे न केवल नियामक आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके, बल्कि साल-दर-साल हमें खुद में भी सुधार करना चाहिए।’’

एसीसी को ग्लोबल एन्वायर्नमेंटल नॉन-प्रॉफिट सीडीपी द्वारा कॉर्पाेरेट सस्टेनेबिलिटी में अग्रणी स्थिति के लिए भी मान्यता प्रदान की गई है। कंपनी ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए प्रतिष्ठित ए लिस्टमें स्थान हासिल किया है। एसीसी को उत्सर्जन में कटौती, जलवायु जोखिमों को कम करने और कम कार्बन वाली अर्थव्यवस्था विकसित करने के अपने कार्यों के लिए मान्यता दी गई है।

2021 में एसीसी साइंस-बेस्ड टार्गेट्स इनिशिएटिव (एसबीटीआई) द्वारा अनुमोदित 2030 मध्यवर्ती लक्ष्यों के साथ बिजनेस एम्बिशन फॉर 1.5 डिग्री सेल्सियसपर हस्ताक्षर करने वाली पहली भारतीय सीमेंट कंपनी बन गई। इन लक्ष्यों के साथ, एसीसी सीमेंट संचालन में अपनी कार्बन तीव्रता को 2018 में 511 किलोग्राम से घटाकर 2030 तक 409 किलोग्राम कार्बन प्रति टन सीमेंटयुक्त सामग्री करने के लिए प्रतिबद्ध है। 2020 में देश में कार्बन उत्सर्जन के मामले में 493 किलोग्राम कार्बन प्रति टन सीमेंटयुक्त सामग्री के साथ एसीसी का प्रदर्शन सबसे कम विशिष्ट रहा है।

यह पर्यावरण की सुरक्षा की दिशा में एसीसी के बहुआयामी दृष्टिकोण से भी जुड़ा है।

कंपनी अपने वायु उत्सर्जन को कम करने के अलावा जैव विविधता को भी निरंतर बढ़ावा देती है और अपने एन्वायर्नमेंटल फुटप्रिंट को कम करने के लिए पानी की रीसाइकलिंग भी करती है। साथ ही कंपनी हमारे परिवेश को पोषित और हरा-भरा करने के लिए भी सक्रिय प्रयास करती है। उदाहरण के लिए, पिछले तीन वर्षों में, एसीसी ने अपने चंदा और वाडी विनिर्माण संयंत्रों में मियावाकी तकनीक का उपयोग करके वन विकसित किए हैं।

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