Friday, June 3, 2022

'अभूतपूर्व होगी राजस्थान की विकास की कहानी' - राजीव अरोड़ा


-फिक्की राजस्थान स्टेट काउंसिल द्वारा आयोजित किया गया पांचवां राजस्थान एमएसएमई समिट

-निवेशकों में इन्वेस्टमेंट समिट के प्रति भारी उत्साह
जयपुर । 
राजस्थान राज्य आज अभूतपूर्व विकास के सफर पर है। और इसकी विकास की कहानी मुख्य रूप से एमएसएमई क्षेत्र द्वारा परिभाषित की जाएगी। राज्य में 90 प्रतिशत उद्योग एमएसएमई क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं और ये इकाइयां बहुत अधिक रोजगार उत्पन्न करती हैं और जीडीपी को बढ़ावा देती हैं। राजस्थान लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष, राजीव अरोड़ा ने आज यह बात कही। वे आज जयपुर में फिक्की राजस्थान स्टेट काउंसिल द्वारा आयोजित 5वें राजस्थान एमएसएमई समिट को संबोधित कर रहे थे। यह समिट 'रीइमेजनिंग द एमएसएमई ग्रोथ स्टोरी इन राजस्थान' पर केंद्रित था। अरोड़ा ने आगे कहा कि अक्टूबर में राज्य में हो रहे इन्वेस्ट राजस्थान समिट को बहुत ही सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। राज्य में निवेश के लिए 10 लाख करोड़ रुपए के एमओयू और एलओआई पर हस्ताक्षर किए गए हैं। बीकानेर में एक नया आईसीडी और उदयपुर में कार्गो कॉम्पलैक्स शरू होने जा रहा है।
एमएसएमई के विकास को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए राजस्थान सरकार के उद्योग की एडिशनल चीफ सेक्रेटरी, सुश्री वीनू गुप्ता ने कहा कि रीको द्वारा विशेष रूप से एमएसएमई के लिए औद्योगिक क्षेत्रों में प्लॉट चिह्नित किए गए हैं। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि राजस्थान पहला राज्य है जिसने एमएसएमई को शुरुआती तीन वर्षों के लिए बिना किसी मंजूरी या स्वीकृति के प्रोजेक्ट्स शुरू करने की अनुमति दी है। अब इस अवधि को बढ़ाकर पांच वर्ष किया जा रहा है।
गुप्ता ने आगे जानकारी दी कि भुगतान की सुविधा के लिए कई और एमएसएमई फेसिलिटेशन काउंसिल्स शुरू की गई हैं। एमएसएमई के लिए वित्त की समस्या के समाधान हेतु एक आकर्षक योजना 'मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना' शुरू की गई है। एक व्यापक एमएसएमई नीति भी तैयार की जा रही है और यह एक महीने में जारी की जाएगी।
अपने संबोधन में फिक्की राजस्थान स्टेट काउंसिल के सदस्य और आरसीसीआई के ऑनरेरी महासचिव, डॉ. के.एल. जैन ने एमएसएमई क्षेत्र के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में बताया, जिनमें पीएसयू से भुगतान में देरी, बैंकों द्वारा फाइनेंसिंग के संबंध में की जाने वालीे औपचारिकताएं तथा उच्च ब्याज दरें शामिल थीं। उन्होंने इस बारे में सुझाव भी दिए कि एमएसएमई के लिए प्रक्रियाओं को कैसे आसान बनाया जा सकता है।
रिसर्जेंट इंडिया लिमिटेड के निदेशक, के.के. गुप्ता ने कहा कि उद्योग के हितधारकों व सरकार को वित्तीय चुनौतियों के साथ-साथ तकनीकी, मार्केटिंग और कच्चे माल की सोर्सिंग जैसे अन्य पहलुओं पर भी ध्यान देना चाहिए।
इससे पूर्व अपने स्वागत भाषण में, फिक्की राजस्थान की मैन्यूफैक्चरिंग एंड एक्सपोर्टर्स सब कमेटी के चेयरमेन तथा ग्लोबल सर्फेसेज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक, मयंक शाह ने बताया कि एमएसएमई किस प्रकार न केवल रोजगार के व्यापक अवसर प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, बल्कि ग्रामीण व पिछड़े क्षेत्रों के औद्योगीकरण में भी मदद करते हैं।
इस अवसर पर रिसर्जेंट इंडिया लिमिटेड द्वारा तैयार किया गया नॉलेज पेपर 'रिविजिटिंग द फ्यूचर ऑफ एमएसएमई इन राजस्थान' का विमोचन भी किया गया।

फिक्की राजस्थान स्टेट काउंसिल के सलाहकार, श्री अजय सिंघा द्वारा सत्र का संचालन किया गया। फिक्की राजस्थान की इंफ्रास्ट्रक्चर सब कमेटी के चेयरमेन और इनसोलेशन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमेन, श्री मनीष गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

बाद में 'ए न्यू पैरडाइम एफआईटीई: फाइनेंसिंग, इनोवेशन, टेक्नोलाॅजी एंड एंटरप्रिन्योरशिप' तथा 'इन्टेग्रेटिंग एमएसएमईज विद ग्लोबल वैल्यू चेन' विषयों पर दो प्लेनरी सैशन भी आयोजित किए गए।

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