Friday, May 6, 2022

दर्शकों ने जेकेके में आयोजित नाटक 'पगला घोड़ा' का आनंद लिया


जयपुर।
 'पगला घोड़ा' पश्चिम बंगाल की लोकप्रिय बंगाली कविता है, जो एक जंगली व पागल घोड़े पर आधारित है, जो अपनी अदम्य सुंदरता के साथ शक्ति, अनियंत्रण, अप्रत्याशित एवं भयानकता का प्रतीक है। यह नाटक पुरुष-महिला संबंधों पर केंद्रित था और पितृसत्तात्मक समाज में महिला की अधीनता को उजागर करता है। यह समाज के चार अलग-अलग सामाजिक-आर्थिक क्षेत्रों से संबंधों के बारे बताता है। जवाहर कला केंद्र (जेकेके) में पाक्षिक थिएटर श्रृंखला के तहत शुक्रवार शाम को नाटक 'पगला घोड़ा' का मंचन किया गया। नाटक का निर्देशन साबिर खान ने किया था और इसे बादल सरकार ने लिखा था। नाटक का मंचन जेकेके के रंगायन में हुआ। नाटक 'पगला घोड़ा' में चार पुरुषों की कहानी बताई गई, जो आत्महत्या करके मरने वाली एक युवा लड़की के अंतिम संस्कार के लिए रात में श्मशान घाट आते हैं और वहां प्रतीक्षा करते हैं। जैसे-जैसे रात होती है, उस मृतक गुमनाम लड़की की आत्मा प्रकट होती है। वे पुरुष आत्मा से अपनी-अपनी प्रेम कहानियां साझा करते हैं और उन्हें अपराध बोध व पश्चाताप होता है। नाटककार आत्महत्या के पक्ष में बिल्कुल भी नहीं है। वे नाटक के माध्यम से जिंदा रहने और जीवन को भरपूर जीने का संदेश देते हैं। नाटककार ने ऐसे जीवन की हिमायत की है जो सुंदर हो। नाटक के अंत में कार्तिक, जो कंपाउंडर और पुरुष पात्रों में से एक है, चिता पर जलती हुई लड़की से प्यार करता था, उसे याद आता है किया कि वह जहर लेने के लिए उसके पास आई थी, तब उसने उसे सलाह दी थी कि, 'अगर कोई जीवित रहता है, तो सबकुछ संभव है। बावजूद इसके, लड़की ने आत्महत्या कर ली और अपराधबोध, चेतना और पछतावे को महसूस करते हुए, कार्तिक भी अपना जीवन समाप्त करना चाहता था। उसने अपने गिलास में जहर डाला, और जैसे ही उसने पीने का मन बनाया, उसे याद आया कि उसने लड़की से क्या कहा था और उसने अपना जहर का ग्लास फर्श पर गिरा दिया। इस दौरान वे चारों पुरूष अपनी-अपनी प्रेमिकाओं के बारे में सोचते हैं कि किन कारणों से उन्होंने अपनी जान दी थी। नाटक में सभी महिलाएं, प्रेम के मामलों में निडर, साहसी, ईमानदार और समर्पित थीं। वे बिना किसी आरक्षण के सच्चे प्यार की आदर्श छवि थीं। वे विपत्तियों का सामना करने के लिए तैयार थीं और उनमें से प्रत्येक ने प्रेम के नेक काम के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। जबकि चारों पुरुष पाखंडी, कायर और निष्ठाहीन दिखाई दिए और इसी कारण उन्होंने अपने जीवन में महिलाओं को धोखा दिया। वे अपनी प्रतिष्ठा का जोखिम उठाने के बजाय उस महिला को खोने के लिए तैयार थे जिसे वे प्यार करते थे। नाटक में कार्तिक की भूमिका आरिफ खान ने, सतु बाबू की भूमिका महिपाल सिंह, हिमादरी की भानुशाली वर्मा, शशि बाबू की संदीप ने और लड़की की भूमिका यूथिका अग्रवाल ने निभाई। वहीं लाइट्स राजीव मिश्रा, म्यूजिक उल्लास पुरोहित और कॉस्टयूम प्रबंध रोशन आरा द्वारा किया गया।

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