Monday, May 2, 2022

दर्शकों ने मां-बेटी की कविता पर आधारित पुस्तक की भावनात्मक और प्रेरक यात्रा को जाना


जयपुर।
 आईएएस एसोसिएशन, राजस्थान द्वारा रविवार शाम आईएएस लिटरेरी सोसाइटी, राजस्थान के फेसबुक पेज पर एक जीवंत बुक टॉक का आयोजन किया गया। यह चर्चा नंदना देव सेन द्वारा अनुवादित कविताओं की पुस्तक 'एक्रोबैट' पर आधारित थी। उन्होंने इस पुस्तक में अपनी स्वर्गीय मां नबनीता देव सेन की बंगाली कविताओं का अंग्रेजी में अनुवाद किया, जो कि उनकी मां द्वारा किया आखिरी कार्य भी था। वे आईएएस लिटरेरी सेक्रेटरी, आईएएस एसोसिएशन, राजस्थान, मुग्धा सिन्हा के साथ बातचीत कर रही थीं। यह चर्चा एक कवि के रूप में उनकी मां, उनके मातृत्व, सेलिब्रिटी माता-पिता की संतान होने का दबाव (उनके पिता डॉ अमर्त्य सेन हैं), बच्चों के लिए लिखना, उनकी माँ की प्रेरणा आदि विषयों पर आधारित थी। एक कवि के रूप में अपनी मां और उनकी मातृ आकृति के बारे में बात करते हुए, सेन ने कहा कि एक बच्चा हमेशा यह मानता है कि उसकी मां बहुत ही मजबूत है। उनकी मां हमेशा मुखर आवाज के साथ एक नारीवादी औरत थीं। वह बहुत मज़ेदार थी जो कि उनके काम में झलकता था। अपनी कविता में, उनकी माँ ने अपने गहरे और अंतरंग स्व को प्रस्तुत किया जिसे नंदना ने कविताओं का अनुवाद करते समय समझना शुरू किया। उनकी मां का काम उनकी भेद्यता, दर्द की गहराई और सच्चाई की कई भावनात्मक परतों के लिए एक खिड़की की तरह थीं।


बच्चों के लिए लिखना कितना अलग है, इस बारे में बात करते हुए सेन ने कहा कि बच्चों के लिए लिखना एक बड़ी जिम्मेदारी है। यह उनके विचारों को प्रभावशाली रूप से असर डालता है। बच्चों के जीवन को देखने का नजरिया बदल सकता है। मस्ती के बीच एक अच्छा संतुलन होना चाहिए और उन्हें बोरियत का एहसास कराए बिना सहानुभूति, समानता और एकता के बारे में सोचने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। लिखने के लिए अपनी मां की प्रेरणा के बारे में बात करते हुए, सेन ने साझा किया कि उनकी मां ने बंगाली साहित्य जैसे कि रवींद्रनाथ टैगोर से प्रेरणा ली। उनके माता-पिता दोनों का टैगोर के साथ एक करीबी रिश्ता था। इसके अलावा, वह अन्य लेखकों जैसे - आशापूर्णा देवी, बुद्धदेव बोस, आलोकरंजन दासगुप्ता, आदि से प्रभावित थीं। वे सिल्विया प्लैथ, टी.एस. एलियॉट, मार्गरेट एटवुड, एलिस वॉकर, ग्लोरिया नायलर, जैसे राष्ट्रीय कवियों से भी प्रभावित थीं। उनकी मां ने अपने अतीत से प्रेरणा ली, लेकिन उन्होंने अपनी पीढ़ी के वर्तमान लेखकों के साथ-साथ युवा पीढ़ी जो लिख रही थी, उसे भी देखा और समझा। इस दौरान नंदना सेन ने पुस्तक से अपनी कुछ पसंदीदा कविताएं भी दर्शकों के लिए पढ़ीं।

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