Saturday, May 21, 2022

जेकेके में महाकाव्य महाभारत पर आधारित नाटक 'उरूभंगम' का हुआ मंचन


जयपुर।
 जवाहर कला केंद्र (जेकेके) के रंगायन में पाक्षिक नाट्य योजना के तहत रंग साधना थिएटर ग्रुप, जयपुर द्वारा शनिवार शाम को नाटक 'उरूभंगम' का मंचन किया गया। उरुभंगम नाटक सुप्रसिद्ध महाकाव्य महाभारत पर आधारित दूसरी से तीसरी शताब्दी के बीच महाकवि भास द्वारा लिखित संस्कृत नाटक है। नाटक का निर्देशन विवेक माथुर ने किया। वहीं संगीत निर्देशन प्रतिश रावत व कुणाल शर्मा द्वारा किया गया। उरुभंगम प्रसंग भीम और दुर्योधन के बीच युद्ध के दौरान और युद्ध के पश्चात दुर्योधन के चरित्र पर आधारित है। नाटक में दिखाया गया कि गदा युद्ध में दुर्योधन भीम से श्रेष्ठ था। दोनों के बीच युद्ध के दौरान जब भीम दुर्योधन को हराने में विफल हो रहा था तब श्रीकृष्ण के आदेशानुसार छलपूर्वक दुर्योधन की जंघा पर वार कर उसे घायल कर दिया। इस प्रकरण से गुरु बलराम भीम पर क्रोधित हो जाते हैं और साथ ही धृतराष्ट्र, गांधारी, दुर्जय और अश्वथामा भी दुर्योधन को इस स्थिति में देखकर परेशान एवं दुखी हो जाते हैं। तब दुर्योधन कहता है कि मैं अपने दुष्कर्मों का फल भोग रहा हूँ, अत: आप सभी लोग क्रोध त्याग कर पांडवों को क्षमा कर दें। वह दुर्जय से यह भी कहता है कि वह पांडवों का उतना ही सम्मान करे जितना वो हम लोगों का करता है। नाटक के अंत में दुर्योधन अपने पूर्वजों का आह्वान करते हुए मृत्यु को प्राप्त हो जाता है। इस नाटक की केंद्रीय पटकथा वही है जो मूल महाभारत में है। लेकिन महाकवि भास ने कुछ परिलक्ष्यों को बदल कर कथा का निरूपण बदल दिया है। इसमें सबसे चरम बदलाव यह है कि जहां दुर्योधन का चित्रण महाभारत में एक खलनायक की तरह दिखाया गया है, वहीं उरूभंगम नाटक में उसे अपेक्षाकृत ज्यादा मानवीयगुणोपेत दिखाया गया। प्राय: संस्कृत में दुखांत नाटक दुर्लभ होते हैं, परंतु लेखक द्वारा कथा में दुर्योधन वाला पक्ष प्रदर्शित करना इस नाटक में दुखांतकीय तत्व डाल देता है। नाटक के सूत्रधार विपिन शर्मा थे। नाटक में प्रस्तुति देने वाले कलाकारों में कमलेश सायर (दुर्योधन), आत्माराम सिंहल (धृतराष्ट्र),  सुरेन्द्र जोशी (बलदेव), बीजेन्द्र सिंह गुर्जर (भीमसेन), विवेक पाराशर (अश्वथामा), आदित्य चंद्र स्वामी(दुर्जय), सरस्वती (गांधारी), सिद्धि माहेश्वरी (द्रोपदी) शामिल थे। इनके अलावा कोरस में हेमेन्द्र सिंह पँवार, परमजीत सिंह, रामकेश मीणा, केशव सिंह, शशांक अग्रवाल, संस्कार रोहिला, हिमांशु वर्मा, संजय कुमार शर्मा शामिल रहे। आर्ट डायरेक्टर - विपिन शर्मा व संजय शर्मा थे और प्रकाश व्यवस्था ओमप्रकाश सैनी ने की। वहीं रूप सज्जा असलम पठान द्वारा और वस्त्र विन्यास विवेक माथुर व आशीष मोटवानी द्वारा किया गया।

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