Friday, May 13, 2022

रंगायन में मांड गायन प्रस्तुति


जयपुर। 
आजादी का अमृत महोत्सव के तहत जवाहर कला केंद्र (जेकेके) द्वारा शुक्रवार शाम को रंगायन में मांड गायन प्रस्तुति का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कलाकार श्रीडूंगरगढ़, बीकानेर से श्री सांवरमल कथक और जोधपुर से बनारसी लाल ने प्रस्तुति देकर समां बांध दिया। इस दौरान कलाकारों ने केसरिया बालम, पंखीयो, म्हारी सजनी, नैण कटारी मत मारो, आवणीया करोनी, म्हारा साजनीयां, चंद रावल बैल, चांदनी में उबा ढोला आदि गीतों की प्रस्तुति दी।  

राजस्थान की प्रसिद्ध लोक गायन शैलियों में से एक है मांड गायन। 10 वीं-11 वीं शताब्दी में जैसलमेर क्षेत्र मांड क्षेत्र कहलाता था। अतः यहां विकसित गायन शैली मांड गायन शैली कहलाई गई। यह शास्त्रीय गायकों के बीच प्रचलित और राजस्थान के लोक गीतों में बहुत महत्वपूर्ण शैली है। यह शैली ठुमरी या ग़ज़ल के बहुत करीब है। यह भारत के शास्त्रीय संगीत में राजस्थानी लोक कथाओं का अनन्य योगदान है। यह शैली राजस्थान की लोक संगीत की सबसे परिष्कृत शैली है और इसका भारत के शास्त्रीय संगीत में सबसे विशिष्ट योगदान है।
शनिवार, 14 मई को 'बनफूल की बत्ती गुल' नाटक का मंचन
जवाहर कला केंद्र (जेकेके) की सहभागिता में पीपुल्स मीडिया थियेटर द्वारा 'बनफूल की बत्ती गुल' नाटक का मंचन किया जाएगा। नाटक का मंचन शनिवार को जेकेके के रंगायन में शाम 7 बजे होगा। इस नाटक का निर्देशन अशोक राही ने किया है और इसके लेखक अनुरोध शर्मा मुम्बई हैं। 
रविवार, 15 मई को 'लोक संगीत की जाजम' कार्यक्रम
जवाहर कला केंद्र (जेकेके) और जाजम फाउंडेशन द्वारा रविवार, 15 मई को 'हरिजस - लोक संगीत' की प्रस्तुति का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन जेकेके के लॉन में सुबह 7 से 8 बजे तक आयोजित होगा। कार्यक्रम में कलाकार बरकत और जलाल खान मांगणियार द्वारा लोक संगीत की प्रस्तुति दी जाएगी।

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