Tuesday, April 26, 2022

जेकेके में दर्शकों ने ’कास्ट ऑफ ऑल शेम’ और ’ऐसा ही होता है’ नाटक का आनंद उठाया

जयपुर। जवाहर कला केन्द्र (जेकेके) एवं तारामणि फाउंडेशन, जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में परिकल्पित और निर्देशित 5 दिवसीय ’जयपुर थिएटर फेस्ट’ के दूसरे दिन की शुरूआत मंगलवार को कलासंबंधी टॉक शो के साथ हुई। जेकेके के कृष्णायन में  'पैट्रॉन ऑफ आर्टिस्ट एन ऑडियंस ऑर कस्टमर?' और 'सर्वाइविंग द हार्डशिप्स ऑफ थिएटर' विषय पर चर्चा का आयोजन किया गया। इसके बाद मुंबई की अदाकारा डॉ. उल्का मयूर द्वारा नाटक ’कास्ट ऑफ ऑल शेम’ की प्रस्तुति हुई।भावपूर्ण कविताओं और कहानियों से युक्त यह नाटक दर्शकों के लिए एक मनोरंजक, आकर्षक और सशक्त अनुभव रहा। शाम को दूसरी प्रस्तुति भोपाल अथवा भारत के दिग्गज़ रंगकर्मी आलोक चैटर्जी द्वारा नाटक ’ऐसा ही होता है’ का मंचन किया गया। गौरतलब है कि यह थिएटर फेस्टीवल का पहला संस्करण है, जो कि 29 अप्रेल तक आयोजित होगा। फेस्टिवल के दौरान जयपुरवासियों को देश भर के कुछ बेहतरीन नाटकों को देखने और खुद को रोमांचित करने का अवसर प्राप्त होगा।

'पैट्रॉन ऑफ आर्टिस्ट एन ऑडियंस ऑर कस्टमर?' विषय पर टॉक शो
फेस्टिवल के दूसरे दिन के कृष्णायन में  'पैट्रॉन ऑफ आर्टिस्ट एन ऑडियंस ऑर कस्टमर?' विषय पर इंटरैक्टिव चर्चा का आयोजन हुआ। इस दौरान नाटक 'संगीत बारी' की निर्देशिका सावित्री मेधातुल और नाटक के लेखक भूषण कोरगांवकर ने 'संगीत बारी', लावणी नृत्य, कला के संरक्षक आदि पर विस्तार से चर्चा की। सावित्री मेधातुल ने कहा कि कला के लिए समर्पित स्थान की आवश्यकता है, जहां कला फल-फूल सके। कई लावणी कलाकार अपनी कला के माध्यम से इतनी सक्षम हुईं कि वे आज कई थियेटर्स की मालिक भी हैं। वहीं कलाकारों के संरक्षकों को ऑडियंस कहा जाए या कस्टमर, इस विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह कलाकारों और उनके दर्शकों के बीच पार्टनरशिप की तरह है, जहां कलाकार अच्छी प्रस्तुति देता है, तो वहां उनकी कला को सराहना और प्रोत्साहन के साथ-साथ आर्थिक रूप से संरक्षण मिलना चाहिए। समाज को भी कला और कलाकारों को सहयोग करने की जरूरत है। इस चर्चा का संचालन फेस्टिवल डायरेक्टर वैभव शर्मा ने किया। टॉक शो के दौरान वरिष्ठ रंगमंचकर्मी ईश्वर दत्त माथुर और तारामणि फाउंडेशन के नरेंद्र अरोड़ा भी मौजूद थे। चर्चा के दौरान दर्शकों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
'सर्वाइविंग द हार्डशिप्स ऑफ थिएटर' विषय पर टॉक शो
कृष्णयान में दूसरा टॉक शो 'सर्वाइविंग द हार्डशिप्स ऑफ थिएटर' विषय पर आयोजित हुआ जिसमें देश के जाने-माने रंगकर्मियों ने चर्चा की। टॉक शो में भोपाल अथवा भारत के दिग्गज़ रंगकर्मी आलोक चैटर्जी, मुंबई की उल्का मयूर और जयपुर के वरिष्ठ थिएटर कलाकार महमूद अली ने रंगमंच से जुड़े अपने अनुभव, संघर्ष और नजरियों के बारे में विस्तार से बातचीत की। इस सत्र का संचालन वरिष्ठ रंगमंचकर्मी ईश्वर दत्त माथुर ने किया।  आलोक चैटर्जी ने कहा कि वे अपने जीवन के अनुभवों को मंच पर लाते हैं। उन्होंने कहा कि मैं थियेटर को जीने वाला व्यक्ति हूं, मैने कभी इसे बोझ की तरह नहीं समझा। थिएटर में सफलता इस पर निर्भर करती है कि आप अपना पूरा 100 प्रतिशत इसे दें, आपने थिएटर को कितना पढ़ा है और आप इसे कितना समझते हैं। वहीं मुंबई की उल्का मयूर पूरी ने बताया कि मुझे कहानियां कहना और लिखने में बेहद रूचि रही है। थियेटर के माध्यम से मैंने खुद को व्यक्त करना सीखा है। जयपुर के थिएटर कलाकार महमूद अली ने कहा कि रंगमंच के दौरान जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए। रंगमंच ने मेरे व्यक्तित्व को निखारा है। जीवन के रंगमंच और स्टेज के रंगमंच के बीच तालमेल बेहद जरूरी है।  
डॉ उल्का मयूर द्वारा 'द कास्ट ऑफ ऑल शेम' नाटक
जेकेके के कृष्णायन में डॉ उल्का मयूर द्वारा 'द कास्ट ऑफ ऑल शेम' नाटक का मंचन किया गया। 'कास्ट ऑफ ऑल शेम' की शुरुआत एक भक्ति कवि की भावना, 'जनाबाई' के जीवंत होने और एक रेडियो शो को आरजे के रूप में संभालने के साथ हुई। इसके बाद उन्होंने विभिन्न महिला कॉलर्स से बात की, जो लिंग और पितृसत्ता के अपने रोजमर्रा के मुद्दों के साथ उनके पास पहुंचीं। सोलो थिएटर प्रस्तुति में कुछ प्रफुल्लित करने वाली, कुछ अलग-अलग वर्गों और सेटिंग्स से भारतीय महिलाओं के बारे में विचलित करने वाले शब्दचित्रों की एक श्रृंखला शामिल थी। उनकी स्थितियों को महिला भक्ति कवियों- जनाबाई, लाल देड, अक्का महादेवी, एववाइयर, सोयराबाई द्वारा प्रकाश में लाया गया- जिनकी कविताएँ शो में 'पात्रों' के रूप में दिखाई दीं। नाटक में संगीत प्रिया सरैया और सागर केंदुरकर द्वारा प्रस्तुत किया गया था। म्यूजिक ऑपरेशन सौमिक घोष ने किया था।
आलोक चैटर्जी द्वारा नाटक, 'ऐसा ही होता है'
वहीं रंगायन में आलोक चैटर्जी द्वारा लिखित, निर्देशित और प्रस्तुत नाटक 'ऐसा ही होता है' रंगमंच की दुनिया में उनकी यात्रा पर आधारित था। आलोक ने एक थिएटर कलाकार के रूप में अपने जीवन की यात्रा को ठीक उसी समय से चित्रित किया जब उन्होंने थिएटर को करियर विकल्प के रूप में लेने का फैसला किया था। उनके प्रदर्शन के माध्यम से, दर्शकों को बी बी कारंथ और प्रसिद्ध कवि, अज्ञेय जैसी महान हस्तियों के जीवन के विभिन्न पहलुओं के बारे में पता चला। एनएसडी के छात्रों के जीवन पर भी प्रकाश डाला कि वे क्या पढ़ते हैं, वहां किस तरह का माहौल है और संस्थान अपने स्टूडेंट्स के ज्ञान और समझ को कैसे बढ़ाता है।
बुधवार, 27 अप्रैल के कार्यक्रम
फेस्टिवल के तीसरे दिन 27 अप्रेल को राजस्थान के चेखोव कहे जाने वाले कथाकार विजय दान देथा द्वारा रचित कहानी ’केंचुली’ का राजस्थानी अथवा हिंदी भाषा में मंचन होगा। महमूद अली द्वारा निर्देशित इस नाटक का मंचन शाम 6 बजे कृष्णयान में किया जाएगा। वहीं दूसरी ओर रंगायन में स्वर्गीय उषा गांगुली निर्देशित तथा महाश्वेता देवी द्वार लिखित लोकप्रिय नाटक 'बायन' की प्रस्तुति नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (Repertory Company)द्वारा दी जायेगी। यह आयोजन रंगायन में शाम 4 बजे और शाम 7.30 बजे होगा। नाटकों में प्रवेश टिकट के माध्यम से है।
कलासंबंधी टॉक शो के तहत, जेकेके के कृष्णयान में सुबह 11 से दोपहर 1 बजे तक आलोक चैटर्जी द्वारा 'द आर्ट ऑफ एक्टिंग' पर चर्चा आयोजित की जाएगी।

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