Saturday, April 30, 2022

"किशन रूंगटा के जीवन में उन्हें गांधीजी के असाधारण गुणों ने प्रभावित किया"- मुकुंद रूंगटा



जयपुर।
 यह हमारा सौभाग्य था कि जब भी गांधीजी मुंबई आते थे, तो वे अपनी सुबह की पूजा रूंगटा हाउस में करते थे, जहां उन्हें बड़ी संख्या में जनता को संबोधित करना होता था। मेरे पिता ने मुझे बताया था कि यह गांधीजी की व्यवस्था थी कि जिसे भी उनका ऑटोग्राफ चाहिए होता था, उसे एक रुपया देना होता था और वो पैसे कांग्रेस किटी में जाते थे। एक बार पैसे न दे पाने पर एक व्यक्ति ने गांधीजी का ऑटोग्राफ लेने की गुहार लगाई थी, हालांकि गांधीजी ने उस व्यक्ति को साफ मना कर दिया था। मेरे पिता ने गांधीजी के न्याय परायण और साहसी होने के इन दुर्लभ गुणों को आत्मसात किया, जिन्हें उन्होंने अपने जीवन में बाद में आगे बढ़ाया। यह बात 'दस्तावेज ऑफ रूंगटास' पुस्तक के विमोचन के अवसर पर श्रोताओं को संबोधित करते हुए  किशन रूंगटा के पुत्र मुकुंद रूंगटा ने कही। वे आईटीसी राजपुताना में आकृति पेरीवाल से बातचीत कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि यह पुस्तक राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र के बग्गर के रूंगटा परिवार की ऐतिहासिक विरासत और लेखक किशन रूंगटा के नजरिए से परिवार में बीते समय में हुई घटनाओं और किस्सों के बारे में एक दस्तावेज है। यह पुस्तक लेखक, किशन रूंगटा पर भी केंद्रित है, जो एक रणजी ट्रॉफी खिलाड़ी थे और बीसीसीआई चयन समिति के अध्यक्ष भी रहे थे। किशन रूंगटा के व्यक्तित्व के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि मेरे पिता हमेशा से एक ऐसे व्यक्ति थे, जो लाइमलाइट में नहीं बल्कि काम करने में विश्वास करते थे। वे क्रिकेट के बारे में सब कुछ जानते थे, लेकिन कभी भी खेल में कोई कद नहीं लेना चाहते थे। हालांकि, उन्होंने कड़ी मेहनत की। वह भविष्य के लिए सोचते थे। वे हमेशा से युवाओं से बात करते, उनके विचारों को सुनते और नई दुनिया के बारे में सीखते थे। यही मुख्य कारण था कि उन्होंने महसूस किया कि जिन महत्वपूर्ण कारकों और लोगों की वजह से जो आज रूंगटा परिवार है, उनके बारे में इस पुस्तक के माध्यम से बताना उनकी जिम्मेदारी थी। मान इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन (एमआईसी) की स्थापना के बारे में बात करते हुए,  रूंगटा ने कहा कि यह कंपनी 1945 में स्थापित की गई थी। उस समय सिर्फ एक रोलिंग मिल थी, जिससे मेरे पिता ने स्टीलमेकिंग प्लांट, फोर्जिंग प्लांट, ट्रांसमिशन लाइन टॉवर, फेब्रिकेशन यूनिट आदि बनाया था। जब वे मुबंई से आए थे तब वे मां के साथ फेक्ट्री के बंगले में रहे, जहां सुरक्षा को लेकर गंभीर समस्याएं थी। लेकिन उन्होंने अपने चेहरे पर मुस्कान के साथ सभी कठिनाइयों, बाधाओं और चुनौतियों का सामना किया। रूंगटा के जीवन में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए की बात करते हुए उन्होंने आगे कहा कि मेरी मां एक बहुत ही रूढ़िवादी परिवार से हैं। उन्होंने अंग्रेजी अखबार पढ़ने, कालीन बनाने और युद्ध पीड़ितों के लिए स्वेटर बुनने जैसे विभिन्न कार्यों में शामिल होना शुरू किया। मेरे पिता ने हमेशा उनका समर्थन किया और उन्हें उनकी आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। यह परिवार में और कार्यस्थल पर महिलाओं की अगली पीढ़ी तक चला। वे ऐसे व्यक्ति थे जो दृढ़ता से मानते थे कि महिलाओं को पुरुषों के बराबर होना चाहिए।

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