Saturday, April 23, 2022

जेकेके में नाटक 'केंचुली' का हुआ मंचन


जयपुर। 
आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत जवाहर कला केंद्र (जेकेके) के रंगायन में शनिवार शाम को पाक्षिक नाट्य योजना के तहत नाटक 'केंचुली' का मंचन किया गया। यह नाटक पद्मश्री विजयदान देथा की कहानी पर आधारित था। नीलेश कुमार दीपक द्वारा निर्देशित इस नाटक के नाट्यकार सुमन कुमार हैं। कहानी 'केंचुली' एक ऐसी ही लोककथा है जो स्त्री मन के कई सवाल को सुनाती है। इस कहानी की रोचकता और अंत हमें चौंकाता है। यह कहानी सामाजिक बेड़ियों को तोड़कर, केंचुली से निकली साँप की तरह आजाद होती स्त्री की दास्तान है। कहानी केंचुली एक स्त्री के मन की कई उधेडबुन पड़तों की पड़ताल और खुद की लड़ाई का आत्मबोध कराती है। लाछी की सुन्दरता पर मोहित गांव के जमीन्दार ठाकुर और उसके चमचे 'भोजा' की अतिवादिता और पति 'गूजर' की अवहेलना से उपजी मन व्यग्रता को इस कहानी में दर्शया गया। इस कहानी का अन्त सामाजिक बेड़ियो को तोड़कर, केंचुली से निकली साँप की तरह आजाद होती स्त्री की दास्तान है जो सम्पूर्ण जगत में निर्वासना घूमती है। नाटक में प्रस्तुति देने वाले मुख्य कलाकारों में परिभाषा मिश्रा, दीलिप गुप्ता, राहुल, गणेश गौरव सहित पूजा, गौरव कुमार, वैभवि, आदिल और विराट भी शामिल थे। इसके साथ ही संगीत/गायन/ तबले पर लखन लाल अहिरवाल, हारमोनियम पर सतीश कुमार, सारंगी पर अनिल मिश्रा और गायन - राजीव रंजन व दीपक ठाकुर द्वारा प्रस्तुत किया गया। इसके अलावा मेकअप बब्बू खान व मुकेश झा द्वारा, वेशभूषा डालचन्द द्वारा, प्रोप्स प्रबंध रितु झा द्वारा किया गया। वहीं मंच परिकल्पना भुनेश्वर भास्कर और प्रकाश परिकल्पना दिव्यांग ने की। गौरतलब है कि विजयदान देथा की कहानियाँ और उनकी रचनाएँ लोक की कोख से उपजी कथा को आधुनिक और वैश्विक परिदृश्य पर ले जाती है। वे अपनी कहानियों में आम जन की समस्याओं, उनकी दमित इक्छाओं, मानवता की विकृति होती क्षरण को उजागर करने और समाज की विडम्बनापूर्ण कुरूतियों को लौकिक रूप से वर्णन करते हैं।

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