Friday, April 29, 2022

'जयपुर थिएटर फेस्ट’ का टॉक शो और नाटक 'ऊंचाई' की प्रस्तुति के साथ समापन


जयपुर।
 जवाहर कला केन्द्र (जेकेके) में 5 दिवसीय ’जयपुर थिएटर फेस्ट’ का शुक्रवार को प्रसिद्ध फिल्म और थिएटर अभिनेता, बहरुल इस्लाम के नाटक 'ऊंचाई' की प्रस्तुति के साथ समापन हुआ। समापन दिवस पर जेकेके बुक क्लब में कलासंबंधी टॉक शो के तहत 'वर्तमान समय में शास्त्रीय रंगमंच का महत्व' विषय पर पद्मश्री विदुषी रीटा गांगुली द्वारा चर्चा का भी आयोजन किया गया। वहीं दूसरे सेशन में नाटक 'अगरबत्ती' और 'ऊंचाई' नाटक के लेखक और निर्देशकों ने अपने नाटक के बारे में विस्तार से चर्चा की। गौरतलब है कि फेस्टिवल का आयोजन तारामणि फाउंडेशन द्वारा जेकेके के सहयोग से किया गया था।

'वर्तमान समय में शास्त्रीय रंगमंच का महत्व' विषय चर्चा
कलासंबंधी टॉक शो के तहत 'वर्तमान समय में शास्त्रीय रंगमंच का महत्व' विषय पर वार्ता का आयोजन किया गया। टॉक शो के दौरान कवि कालिदास द्वारा लिखित प्रसिद्ध नाटक 'अभिज्ञान शाकुंतलम' की निर्देशक पद्मश्री विदुषी रीटा गांगुली ने चर्चा की। इस दौरान उन्होंने अपने जीवन के अनुभव, नाटक 'अभिज्ञान शाकुंतलम', भारत के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से मुलाकात का किस्सा, नाटक में स्थायी भाव और रस की उत्पत्ति आदि विषयों पर उन्होंने प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि परफॉर्मिंग आर्ट द्वारा आप समाज की समस्याओं को सामने ला सकते हैं लेकिन उनका उद्धार नहीं कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि एक कलाकार को पात्र के रंग में ढालने के लिए, खुद को रिक्त रखना चाहिए।रीटा गांगुली ने कहा कि नाट्यशास्त्र को समझने के लिए बौद्धिकता का स्तर अलग है। इसके अलावा उन्होंने नाट्यशास्त्र के स्थायी भावों जैसे कि रति, हास्य, क्रोध, उत्साह आदि के बारे में और रस उत्पत्ति के बारे में विस्तार से बताया।
'अगरबत्ती' और 'ऊंचाई' नाटक पर हुई चर्चा
इसके बाद टॉक शो के अंतर्गत दूसरा सत्र आयोजित किया गया जिसमें नाटक 'अगरबत्ती' की निर्देशक स्वाति दुबे और लेखक आशीष पाठक ने अपने नाटक के बारे में चर्चा की। उनके साथ नाटक 'ऊंचाई' के बहरूल इस्लाम भी शामिल रहे, जिन्होंने अपने नाटक की स्टोरी और कॉन्सेप्ट पर प्रकाश डाला। नाटक 'अगरबत्ती' के लेखक आशीष पाठक ने कहा कि फिल्म 'बैंडिट क्वीन' देखने के बाद इस नाटक का विचार आया। उन्होंने कहा फूलन देवी के यथार्थ ने मुझे प्रभावित किया। जिसके बाद मैंने इस कहानी को अपनी कल्पना के माध्यम से सामने लाया। कल्पना होना कला की महत्वपूर्ण शर्त है। वहीं नाटक की निर्देशक स्वाति दुबे ने कहा कि हमेशा से ही मुझे औरतों के मुद्दों ने प्रभावित किया है। मैंने शुरूआत से अपने आस पास जातिवाद, महिलाओं के दमन, और उनसे जुड़े मुद्दों को बड़े करीब से देखा है।उन्हीं मुद्दों को मैं सामने लाने का प्रयास करती हूं। इसके अलावा नाटक 'ऊंचाई' के निर्देशक बहरूल इस्लाम ने कहा कि मैं नाटक की स्टोरी और कॉन्सेप्ट पर काम करता हूं। समकालीन दुनिया के संदर्भ में व्यंग्य और स्वयं की अवधारणा की खोज करने का यह उनका पहला प्रयास है। दोनों सेशंस का संचालन तारामणि फाउंडेशन के नरेंद्र अरोड़ा ने किया।
बहरूल इस्लाम द्वारा नाटक 'ऊंचाई'
जेकेके के कृष्णायन में प्रसिद्ध फिल्म और थिएटर अभिनेता, बहरुल इस्लाम द्वारा नाटक 'ऊंचाई' का प्रदर्शन किया गया। बहरुल इस्लाम ने नाटक का निर्देशन किया है और इस 7 सदस्यीय कलाकारों में अभिनय भी किया। कहानी एक मिथ्याचारी व्यक्ति के बारे में थी जिसने हेरोस्ट्रेटस के मार्ग का अनुसरण करने और एक बुरे काम के माध्यम से छह अलग-अलग लोगों (उसकी रिवॉल्वर में प्रत्येक गोली एक के लिए ) को मारकर इतिहास बनाने का संकल्प लिया। जब वह अपनी रिवॉल्वर को अपनी जेब में सड़कों पर निकलता है, तो उसे प्राप्त होने वाली शक्ति की भावना से उसे प्रसन्नता होती है। लेकिन उसने अब रिवॉल्वर से नहीं, बल्कि खुद से आश्वासन मिला कि वह रिवॉल्वर, टारपीडो या बम की तरह बन गया।नाटक ने दर्शकों को एक अंतर्दृष्टिपूर्ण विवरण दिया कि कैसे एक व्यक्ति की प्रकृति उसके पास होने वाली वस्तुओं के साथ बदलती है, जैसा कि निष्कर्ष में देखा गया कि वस्तु स्वयं आंतरिक व्यक्ति को बदलने में असमर्थ है। नाटक के कलाकारों में शामिल थे - भगीरथी बाई, बहरुल इस्लाम, मौसमी तालुकदार, प्रशांत कालिता और जीत बरुआ। कहानी जीन पॉल सार्त्रे द्वारा लिखी गई थी। लाइट डिजाइन दिबोश ज्योति बोरुआ द्वारा किया गया था, सेट देबोजीत बोरठाकुर और संगीत ओम प्रतिम गोगोई द्वारा प्रदान किया गया था।

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