Thursday, April 28, 2022

'अभिज्ञान शाकुंतलम' का मंचन रहा मुख्य आकर्षण


जयपुर।
 जवाहर कला केन्द्र (जेकेके) एवं तारामणि फाउंडेशन, जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में परिकल्पित और निर्देशित 5 दिवसीय ’जयपुर थिएटर फेस्ट’ के चौथे दिन, गुरूवार को जेकेके के कृष्णयान में समागम रंगमंडल, जबलपुर द्वारा नाटक 'अगरबत्ती' प्रस्तुत किया गया। इसके बाद रंगायन में फेस्टिवल का मुख्य आकर्षण कवि कालिदास द्वारा लिखित नाटक 'अभिज्ञान शाकुंतलम' का मंचन हुआ। पद्मश्री विदुषी रीटा गांगुली द्वारा निर्देशित इस नाटक ने शास्त्रीय रंगमंच को अपने उच्चतम रूप में प्रदर्शित किया। गौरतलब है कि यह थिएटर फेस्टीवल का पहला संस्करण है, जिसका 29 अप्रेल, शुक्रवार को समापन होगा।

स्वाति दुबे द्वारा नाटक 'अगरबत्ती'
जेकेके के कृष्णायन में स्वाति दुबे द्वारा निर्देशित नाटक 'अगरबत्ती' का मंचन समागम रंगमंडल, जबलपुर द्वारा किया गया। आशीष पाठक द्वारा लिखित नाटक को महिंद्रा एक्सीलेंस इन थिएटर अवार्ड्स (मेटा) में चार पुरस्कार मिले हैं। नाटक की कहानी कुछ यूं शुरू हुई कि 'बेहमई' में मारे गए ठाकुरों की विधवाओं के पुनर्वास के लिए सरकार एक अगरबत्ती का कारखाना खोलती है। चंबल की जेल में बंद 'बैंडिट क्वीन' के मरने तक, लाला राम ठकुराइन अपने पति की अस्थियों का विसर्जन नहीं करने का फैसला लेती है और कल्ली की मदद से सभी को संगठित करती है। दमयंती ने एक बहस शुरू की कि क्यों मारे गए सभी लोग केवल पुरुष थे, महिलाएं नहीं। इस दौरान घटनाओं, तर्कों, विघात और थोपने वाले भ्रम की श्रृंखला ने उन्हें दुर्लभ सत्य तक पहुँचाया कि एक अपराधी का कार्य अप्रत्यक्ष रूप से बिना इसमें भागीदारी के अपराध का कारण बनता है। लाला राम ठकुराइन बहस में अपना पक्ष रखती है, और अंत में अपने बचपन की पुरानी यादों को याद करते हुए, केवल वह एक महिला रह जाती है। अन्य आठ महिलाओं के साथ मिलकर उसने अपने पति की राख को अगरबत्ती की सामग्री में मिलाया। प्रकृति के न्याय की तरह, 'बेहमई' की राख अगरबत्ती में मिश्रित थी। जो बची वे सभी नौ महिलाएं थीं। जाति, वर्ग और लिंग से मुक्त होकर जलती हुई महिलाएं और अगरबत्ती। ध्वनि का संचालन आदित्य रूसिया और शिवम बावरिया ने किया था।
पद्मश्री विदुषी रीटा गांगुली द्वारा 'अभिज्ञान शाकुंतलम' का मंचन
जेकेके के रंगायन में फेस्टिवल का मुख्य आकर्षण कवि कालिदास द्वारा लिखित नाटक 'अभिज्ञान शाकुंतलम' का मंचन हुआ। यह नाटक राजा दुष्यंत के बारे में था जो घने जंगल में शिकार करते हुए एक आश्रम में शकुंतला से मिलते हैं और उसके प्यार को जीतने की कोशिश करते हैं। वे अपने राज्य लौट आते हैं और युवती को उसका अनुसरण करने के लिए कहते हैं। अपने ख्यालों में खोई प्रेम में डूबी लड़की से ऋषि दुर्वासा के प्रति आतिथ्य के कर्तव्यों की उपेक्षा हो जाती है। जब वे आश्रम आते हैं, तो उसे श्राप देते हैं कि जिस आदमी के ख्यालों में वह खो गई थी, वह अब उसे भूल जाएगा। बाद में, जब शकुंतला दुष्यंत के दरबार में पहुंचती है तो वहां उसका मजाक उड़ाया जाता है और पूरे मामले व उसकी गर्भावस्था को लेकर उसका अपमान किया जाता है। नाटककार ऋषि दुर्वासा के श्राप से निर्दोष युवती शकुंतला के प्रति दुष्यंत के रवैये का औचित्य सिद्ध करना चाहता था।
शुक्रवार, 29 अप्रेल के कार्यक्रम
29 अप्रैल को फेस्टिवल के समापन पर प्रसिद्ध फिल्म और थिएटर अभिनेता बहरुल इस्लाम द्वारा नाटक 'ऊंचाई' का प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने नाटक का निर्देशन भी किया है और वे 7 कलाकारों के साथ इसमें अभिनय भी करेंगे। समकालीन दुनिया के संदर्भ में व्यंग्य और स्वयं की अवधारणा की खोज करने का यह उनका पहला प्रयास है। नाटक के लिए प्रवेश टिकट द्वारा है।
कलासंबंधी टॉक शो के तहत कृष्णयान में सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे तक 'वर्तमान समय में शास्त्रीय रंगमंच का महत्व' विषय पर पद्मश्री विदुषी रीटा गांगुली चर्चा करेंगी। वहीं  दोपहर 12.05 से 1 बजे तक 'अगरबत्ती' और 'ऊंचाई' नाटक के कलाकारों द्वारा चर्चा का आयोजन होगा।

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