Wednesday, April 27, 2022

जेकेके में लोकप्रिय नाटक 'बांयेन' और ’केंचुली’ का हुआ मंचन


जयपुर।
 जवाहर कला केन्द्र (जेकेके) एवं तारामणि फाउंडेशन, जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में परिकल्पित और निर्देशित 5 दिवसीय ’जयपुर थिएटर फेस्ट’ के तीसरे दिन 'कलासंबंधी' टॉक शो में वरिष्ठ रंगकर्मी आलोक चैटर्जी द्वारा 'द आर्ट ऑफ एक्टिंग' विषय पर चर्चा का आयोजन किया गया। शाम को कृष्णायन में कथाकार विजय दान देथा द्वारा रचित व महमूद अली और राजदीप द्वारा नाटक ’केंचुली’ का मंचन हुआ। इसके बाद रंगायन में स्वर्गीय उषा गांगुली निर्देशित तथा महाश्वेता देवी द्वार लिखित लोकप्रिय नाटक 'बांयेन' की प्रस्तुति दी गई। गौरतलब है कि यह थिएटर फेस्टीवल का पहला संस्करण है, जो कि 29 अप्रेल तक आयोजित होगा। फेस्टिवल के दौरान जयपुरवासियों को देश भर के कुछ बेहतरीन नाटकों को देखने और खुद को रोमांचित करने का अवसर प्राप्त हो रहा है।

'द आर्ट ऑफ एक्टिंग' विषय पर टॉक शो
दिन की शुरूआत जेकेके के कृष्णायन में 'कलासंबंधी' टॉक शो के साथ हुई। इस दौरान भोपाल अथवा भारत के दिग्गज़ रंगकर्मी, अभिनेता व निर्देशक आलोक चैटर्जी द्वारा 'द आर्ट ऑफ एक्टिंग' विषय पर चर्चा की गई। श्री आलोक चैटर्जी ने एक्टिंग के बेसिक स्किल्स, एक्टर की ट्रेनिंग, परफॉर्मेंस के एस्थेटिक्स, बौद्धिक ज्ञान आदि के बारे में विस्तार से बातचीत की।श्री चैटर्जी ने कहा एक अभिनेता के लिए शारीरिक ट्रेनिंग बेहद जरूरी है, जिसमें उनकी बॉडी और वॉयस पर काम करने के साथ-साथ उनकी दिनचर्या में बदलाव जैसे कि खाने-पीने का समय, सोने-उठने का समय और एक्सरसाइज पर भी ध्यान देना आवश्यक है। इसके साथ ही अभिनेता की बौद्धिक तैयारी भी जरूरी है। जिसके लिए उन्हें अधिक से अधिक पढ़ने की आदत, अपने आस-पास की घटनाओं के बारे में जागरूक होना, अपनी जड़ों और संस्कृति की समझ होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि रंगमंच से भारतीय सिनेमा की शुरूआत हुई है। नाटक वालों ने सिनेमा बनाया है। श्री चैटर्जी ने आगे कहा कि नाट्यशास्त्र में संपूर्ण अभिनेता की मांग है, जो कि अभिनय के साथ-साथ अन्य कलाओं जैसे कि गायन, नृत्य, वाद्ययंत्र आदि के बारे में ज्ञान रखता हो। एक अभिनेता जितना खुद पर काम करेंगा, उतना ही वो निखरेगा।
स्वर्गीय उषा गांगुली का नाटक 'बांयेन'
जेकेके के रंगायन में स्वर्गीय उषा गांगुली निर्देशित तथा महाश्वेता देवी द्वार लिखित लोकप्रिय नाटक 'बांयेन' की प्रस्तुति हुई। महाश्वेता देवी की कहानी पर आधारित, नाटक 'बांयेन' ने उनके लेखन की मूल अभिव्यक्ति, यानी कि सामाजिक-आर्थिक असमानताओं और मानव जीवन के विभिन्न रंगों के बारे में जागरूकता पैदा की। हिंदी भाषा के नाटक का मंचन नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा रिपर्टरी कंपनी के बैनर तले किया गया। नाटक 'बांयेन' में दिखाया कि चंडी दासी को बहुत ही कम उम्र में मरे हुए जानवरों को दफनाने के काम में लगा दिया जाता है। अपने पूर्वजों के काम को करने की उसकी जिम्मेदारी का हवाला देकर उसे बेहद कष्टप्रद जीवन जीने को मजबूर किया जाता है। समय के साथ, उसने मलिंदर के साथ शादी के बंधन में बंधने का फैसला किया, वह व्यक्ति जो सरकारी श्मशान में काम करता था और जिसने उसकी जिम्मेदारी ली थी। हालांकि, बाद में मलिंदर उसे ‘बांयेन’ घोषित कर देता है और इसके बाद चंडी सामान्य जीवन जीने के अधिकार से भी वंचित हो जाती है। धीरे धीरे वो स्वयं मान लेती है कि ऐसा अमानवीय जीवन जीना ही उसकी नियति है।
महमूद अली और राजदीप द्वारा नाटक ’केंचुली’
कृष्णयान में महमूद अली द्वारा निर्देशित नाटक 'केंचुली' का मंचन राजस्थानी और हिंदी भाषा में किया गया। विजय दान देथा (बिज्जी) की कहानी पर आधारित, नाटक 'लाछी' का अनुसरण करता है, जिसने अपने घर के आराम, अपने परिवार के प्यार और अपने दोस्तों की संगत को छोड़कर एक अपरिचित जगह पर उत्साह और खुशी से भरे दिल के साथ जाती है। लेकिन, उसकी स्थिति भयावय हो गई क्योंकि वह सोचने लगी कि अगर शादी करना उसके लिए एक लाश होने के समान बुरा है तो उसने शादी क्यों की? सिर्फ उसका पेट भरने के लिए और उसकी यौन जरूरतों को पूरा करने के अलावा इस शादी में क्या कुछ था। 'लाछी' के लिए अब अपने पति के साथ रहना नामुमकिन हो गया था। नाटक इस बात पर प्रकाश डालता है कि क्या घर की दुविधाएं जो जाति, संस्कृति, धर्म, मूल्यों और कई और परतों के इर्द-गिर्द घूमती है विवाह को जोड़े रखती है या 'लाछी' इन सभी परतों को फेंक कर मुक्त हो जाती है। नाटक के कलाकारों में महमूद अली, राजदीप वर्मा और ललिता मीणा शामिल थे। मंच संचालन दधीचि पटेल ने और लाइट डिजाइन गगन मिश्रा ने किया।
गुरूवार, 28 अप्रेल के कार्यक्रम
28 अप्रैल को समागम रंगमंडल, जबलपुर द्वारा दोपहर 2.30 बजे और शाम 5.30 बजे कृष्णयान में नाटक 'अगरबत्ती' प्रस्तुत किया जाएगा। नाटक को महिंद्रा एक्सीलेंस इन थिएटर अवार्ड्स (मेटा) में चार पुरस्कार मिले हैं।फेस्टिवल का मुख्य आकर्षण कवि कालिदास द्वारा लिखित नाटक 'अभिज्ञान शाकुंतलम' का मंचन शाम 7.30 बजे रंगायन में होगा। नाटककार निर्दोष युवती शकुंतला के प्रति दुष्यंत के रवैये का औचित्य सिद्ध करना चाहता है। पद्मश्री विदुषी रीता गांगुली द्वारा निर्देशित यह नाटक शास्त्रीय रंगमंच को अपने उच्चतम रूप में प्रदर्शित करेगा। दोनों नाटकों में प्रवेश टिकट द्वारा है। इसके अलावा, कलासंबंधी के भाग के रूप में, जेकेके के कृष्णायन में सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे तक नाटक 'बांयेन' के कलाकार चर्चा करेंगे।

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