Friday, March 4, 2022

लड़कियों के लिये ज्याेदा स्टेम की शिक्षा को प्रोत्सावहित करते हुए ओले ने भारत के स्कूल एडटेक यूनिकॉर्न लीड के साथ मिलकर #STEMTheGap के लिये छात्रवृत्तियों की फंडिंग की

 

मार्च 04, 2022, मुंबई: ऐसा क्‍यों होता है कि लड़कियों को उनके जन्‍मदिन पर किचन सेट्स दिये जाते हैं, जबकि लड़कों को खिलौने वाले रोबोट या कंस्‍ट्रक्‍शन सेंट्स दिये जाते हैं? क्‍या हमारे अवचेतन में छिपा लैंगिक पक्षपात लड़कियों को पीछे खींच रहा है? संयुक्‍त राष्ट्र के अनुसार, भारत में स्‍टेम (एसटीईएम यानी साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स) के कार्यबल में महिलाएं केवल 14% हैं। विज्ञान के ब्रांड होने के साथ-साथ महिलाओं का भी सगर्व अग्रणी स्किनकेयर ब्रांड, ओले का मानना है कि दुनिया को स्‍टेम में ज्‍यादा महिलाओं की जरूरत है और यह कि अब भारत में स्‍टेम के मामले में लैंगिक अंतर का समीकरण बदलने का वक्त आ गया है।

सांस्‍कृतिक बाधाओं और रूढि़वादी लैंगिक भूमिकाओं में फँसी महिलाओं को अक्‍सर देखभाल करने वालीं या गृहिणी माना जाता है और उनके अध्‍ययन क्षेत्र को पढ़ाने, नर्सिंग, फाइन आर्ट्स और घरेलू अर्थशास्‍त्र, आदि तक सीमित रखा जाता है। इसलिये ओले ने #STEMTheGap पहल लॉन्च की है, जिसके हिस्‍से के तौर पर ब्राण्‍ड भारत की ज्‍यादा से ज्‍यादा लड़कियों को निडर होकर स्‍टेम शिक्षा और कैरियर चुनने के लिये प्रोत्‍साहित कर रहा है। इसे अमल में लाने के लिये ओले ने भारत की सर्वश्रेष्‍ठ स्‍कूल एडटेक कंपनी लीड के साथ भागीदारी में लड़कियों के लिये स्‍टेम स्‍कॉलरशिप प्रोग्राम लॉन्‍च किया है।

लीड 3000 से ज्‍यादा स्‍कूलों के साथ काम करता है, जिनमें से अधिकांश कम आय वाले परिवारों को सेवा देते हैं और 1.2 मिलियन से ज्‍यादा विद्यार्थियों को अंतर्राष्‍ट्रीय मानक की शिक्षा प्रदान करते हैं। लीड पाठ्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने और विद्यार्थियों को बेहतर तरीके से अवधारणायें समझाने के तरीके खोजने में शिक्षकों की स‍हायता करके खासतौर से स्‍कूलों का कायाकल्‍प करता है और साथ ही किताबों और अन्‍य गुणवत्‍तापूर्ण संसाधनों की व्‍यवस्‍था करता है। भौगोलिक क्षेत्रों में जहाँ अन्यथा अभिगम प्राप्त नहीं होता, उच्च कोटि की शिक्षा के प्रति ठीक यही वचनबद्धता ही है जो लीड को ओले के स्‍टेम स्‍कॉलरशिप प्रोग्राम के लिये आदर्श भागीदार बनाती है। यह छात्रवृत्ति पाने वाली लड़कियाँ बहुत अच्‍छे अनुभव और शिक्षा से सशक्‍त होंगी, ताकि अपने शौक और रुचि के अनुसार आगे बढ़ सकें।

ओले 2021 से भारत के 6 राज्‍यों में लड़कियों के लिये ट्यूशन फीस, टेबलेट्स और डाटा पैक्‍स का प्रायोजक है। महामारी के परिदृश्‍य में टेबलेट और डाटा पैक्‍स खासतौर से महत्‍वपूर्ण हैं - कई परिवारों के पास घर में बहुत स्‍मार्टफोन्‍स या उपकरण नहीं हैं, इसलिये भौतिक और डिजिटल कक्षाओं के ऑनलाइन या मिश्रित वातावरण में भी लड़कियों की पढ़ाई जारी रखने के लिये तकनीक से युक्‍त समाधान प्रदान करना बहुत मायने रखता है।

#STEMTheGap पहल के बारे में प्रियाली कामथ, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, स्किन एंड पर्सनल केयर- एशिया पैसिफिक, मिडिल ईस्‍ट एवं अफ्रीका, प्रॉक्टर ऐंड गैम्‍बल (पी ऐंड जी) ने कहा कि, ‘’ओले ऐसा ब्राण्‍ड है, जो विज्ञान से काफी ओत-प्रोत है और हमारे 50% वैज्ञानिक महिलाएं हैं, इसलिये हम जानते हैं कि लड़कियों में बेहतरीन वैज्ञानिक बनने की क्षमता है। स्‍टेम ज्‍यादा से ज्‍यादा नौकरियों का आधार बन रहा है, तो हमारा मानना है कि लड़कियों को भविष्‍य की नौकरियों के लिये तैयार करना हमारी संयुक्‍त जिम्‍मेदारी है। इसलिये हम स्‍टेम में लैंगिक अंतर को दूर करने में सहायता के लिये प्रतिबद्ध हैं। आज लीड के साथ हमारा स्‍कॉलरशिप प्रोग्राम वास्‍तविक और मायने रखने वाला बदलाव कर रहा है और हम भारत में लड़कियों के लिये सकारात्‍मक भविष्‍य बनाने का हिस्‍सा बनकर रोमांचित हैं। आइये, हम मिलकर #STEMTheGap करें।‘‘

लीड के सह-संस्‍थापक एवं मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी सुमीत मेहता ने कहा कि, “ओले की छात्रवृत्तियाँ अत्‍यंत अर्थपूर्ण हैं, जो लड़कियों को अपने शौक और रुचियों के अनुसार चलने में समर्थ बनाएंगी। लीड में हमारा मिशन है उत्‍कृष्‍ट शिक्षा को हर बच्‍चे तक लेकर जाना, जिसके लिये स्‍कूलों का कायाकल्‍प किया जाता है, खासकर छोटे कस्‍बों में। ओले के साथ हमारी भागीदारी हमें विद्यार्थियों के लिये महत्‍व का निर्माण करने और पढ़ाई को लोकतांत्रिक बनाने की अनुमति देगी, चाहे कोई कहीं भी स्‍कूल जाए। शिक्षा के शुरूआती वर्ष लड़कियों के लिये बुनियादी होते हैं और हमें सकारात्‍मक परिवर्तन लाने के इस काम के लिये भागीदारी करने और स्‍टेम में लैंगिक अंतर को दूर करने की दिशा में काम करने पर गर्व है।”

छात्रवृत्ति पाने वालीं महाराष्‍ट्र के रायगढ़ जिले के मानगाँव  की 9-वर्षीया रिया बूटे के पेरेंट रणजीत बूटे ने कहा कि, “मैं एक बस चालक हूँ और मेरी बेटी रिया अभी तीसरी कक्षा में है। महामारी के दौरान हम अपनी बेटी की स्‍कूल फीस भरने के लिये संघर्ष कर रहे थे और हमें चिंता थी कि वह फेल हो जाएगी। जब लीड से हमें ओले की इस पहल का पता चला, जिससे हमारी बेटी की पूरी शिक्षा में मदद मिल सकती थी, तब हम बहुत खुश हुए और हमने राहत की साँस ली! हम ओले और लीड के हमेशा आभारी रहेंगे कि उन्‍होंने इस तनावपूर्ण समय में हमारी बच्‍ची की शिक्षा में इतना बड़ा सहयोग दिया।”

अपनी अर्थपूर्ण पहल #STEMTheGap के लॉन्‍च के साथ ओले इंडिया स्‍टेम में लैंगिक अंतर को दूर करने के लिये प्रतिबद्ध है। ब्राण्‍ड ने एक दमदार फिल्‍म भी प्रस्‍तुत की है, जो हमारे अवचेतन में छिपे भेदभाव, कि कैसे हम लड़कियों से कहते हैं कि स्‍टेम उनके लिये नहीं है, पर रोशनी डालती है और हमें #STEMTheGap के लिये मिलकर इस सोच को हराने के लिये आमंत्रित करती है।

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