Tuesday, March 29, 2022

अब नए कलेवर के साथ होगी हथकरघा कला



'माई हैंडलूम माई प्राइड" का आयोजन

पारंपरिक हथकरघा कला की अब होगी "नवेथिति"

"नवेथिति" प्रदर्शित होंगे डिजाइन किए गए परिधान

बुनकर सेवा केंद्र जयपुर का आयोजन

बुनकर सेवा केंद्र जयपुर द्वारा 75वें आजादी के अमृत महोत्सव के तहत हथकरघा कला को प्रमोट करने के लिए 30 मार्च को पारम्परिक हथकरघा कला का प्रदर्शन किया जा रहा है। पोद्दार इंटरनेशनल कॉलेज के सहयोग सेहो ने जा रहे इस आयोजन का नाम है " माई हैंडलूम माई प्राइड" इस आयोजन के द्वारा पारम्परिक हथकरघा कला को नए कलेवर के साथ प्रदर्शित किया जाएगा। भारतीय पारंपरिक बुने हुए शिल्प को बढ़ावा देने के उद्देश्य के साथ आयोजित किए जा रहे इस आयोजन में परिधानों के जरिए हैंडलूम के तीन आयाम यानी प्रक्रियाओं को नजदीक से रूबरू होने का मौका इस दौरान मिलेगा। इन तीन प्रक्रियाओं में शामिल हैं हैंडस्पून वेट यानी- हाथसे  रंगाई, नेचुरल डाइंग यानी प्राकृतिक रंगाई और हैंडवॉवन यानी हाथ से बुना हुआ परिधान। “नवेत्रिति” शब्दके  द्वारा यहां हथकरघा की पारम्परिक कला को नए कलेवर के साथ डिजाइनर परिधानों में तब्दील करके प्रदर्शित किया जाएगा। “नवेश्रिति" शब्द का अर्थ यहां “नई रचना” से है और इस शब्द को संस्कृत, हिंदी, तमिल, मलयालम जैसी कई भारतीय भाषाओं को मिलाकर इजात किया गया है जिसका आर्थ नवनिर्माण से है। बुनकर सेवा केंद्र जयपुर का यह आयोजन पोद्दार इंटरनेशनल कॉलेज के सहयोग से किया जा रहा जिसमें पोद्दार इंटरनेशनल कॉलेज के फैशन एंड डिजाइनिंग डिपार्टमेंट के स्टूडेंट्स हथकरघा कला को प्रदर्शित करते हुए नए परिधानों को डिजाइनर परिवेश के साथ प्रदर्शित करेंगे। इस आयोजन की तैयारी पुरजोर तरीके से की जा रही है, बुनकर सेवा संस्थान का यह आयोजन हैंडलूम आर्ट और आर्टिजन्स को बढ़ावा देने के साथ-साथ हैंडलूम पाठ्यक्रम को प्रमोट करने के लिए किया जा रहा है।

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