Sunday, March 6, 2022

दर्शकों ने जेकेके में नाटक ’हुंकारो’ और राजस्थानी सूफी नाईट का आनंद लिया


जयपुर।
 जवाहर कला केंद्र (जेकेके) द्वारा आयोजित परफॉर्मिंग आर्ट फेस्टिवल 'रसरंगम' के दूसरे दिन, शाम को जेकेके में रंगायन में मोहित टाकलकर द्वारा निर्देशित ’हुंकारो’ नाटक का मंचन हुआ। उजागर ड्रमेटिक एसोसिएशन, जयपुर द्वारा यह नाटक प्रस्तुत किया गया। यह नाटक विजयदान देथा, चिराग खंडेलवाल और अरविंद चारण की कहानियों पर आधारित थी। यह नाटक कोविड -19 की दूसरी लहर के बाद तैयार किया गया था, जिसमें इस बात का प्रतिबिंब था कि दुनिया ने महामारी के दौरान क्या सहन किया।

नाटक का विचार एक सरल लेकिन परेशान करने वाले अहसास से आया कि लॉकडाउन ने न केवल लोगों के ध्यान की अवधि बल्कि क्षमता और सुनने की आवश्यकता को भी कम कर दिया। लेकिन दुनिया उम्मीद पर जिंदा है, जो कि प्रस्तुति से बांधे रखती है। इस प्रस्तुति में राजस्थानी भाषा की सुंदरता पर जोर दिया गया है और भाषाओं के सौंदर्य मूल्य, बोले गए शब्द के महत्व के साथ-साथ सुनने की कला के बारे में बात की गई है। यह नाटक मांगणियार परंपरा से आए गीतों से भरा हुआ था, लेकिन इसमें संगीत वाद्ययंत्रों से परहेज करते हुए शब्दों पर जोर दिया गया था।
नाटक में प्रस्तुति देने वाले कलाकारों में इप्शिता चक्रवर्ती सिंह, पुनीत मिश्रा, महेश सैनी, भक्ति भारती, भास्कर शर्मा और अजीत सिंह पलावत शामिल थे। संगीत हाकम खान केसुंबला द्वारा प्रदान किया गया था। लाईट डिजाइन विक्रांत ठाकर ने और वेशभूषा देविका काले द्वारा थी। असिस्टेंट डायरेक्टर चिराग खंडेलवाल थे।
'शक्ति - इंटरनेशनल आर्ट कैम्प'
इसके साथ ही, नारी शक्ति को समर्पित एक 'शक्ति - इंटरनेशनल आर्ट कैम्प' की भी शुरूआत हुई। यह कैम्प जेकेके के ग्राफिक स्टूडियो में सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक प्रतिदिन 8 मार्च तक चलेगा। इस कैम्प में देश-विदेश से करीब 30 कलाकार हिस्सा ले रहे हैं। कैम्प को श्रेयांशी मनु द्वारा क्यूरेट किया गया है।
रेतीला बैण्ड द्वारा 'राजस्थानी सूफी नाईट'
शाम का समापन जेकेके में मध्यवर्ती में रेतीला बैण्ड द्वारा 'राजस्थानी सूफी नाईट' की प्रस्तुति के साथ हुआ। 
इस अवसर पर प्रमुख शासन सचिव, कला एवं संस्कृति, राजस्थान सरकार और जेकेके की महानिदेशक श्रीमती गायत्री राठौड़ मौजूद रहीं। बैण्ड ने गोविंद सिंह द्वारा निर्देशित एक विशेष परफॉरमेंस प्रस्तुत किया, जो दर्शकों को राजस्थान की जड़ों, विरासत और संगीत संस्कृति की एक यात्रा पर ले गया। उन्होंने शाह लतीफ, जीवन शाह, बुल्लेह शाह, खुसरों की कहानियों और मीरा, कबीर और संत शार्दुल के गीतों के माध्यम से सूफी संतों की कहानियों का जश्न मनाया। उनके प्रदर्शन में सिंधी सारंगी, अलगोजा, ढोलक, मोरचांग और खरताल जैसे प्राचीन वाद्ययंत्रों की ध्वनियों का इस्तेमाल किया गया था। इस शो में राजस्थान के असली सार को शामिल किया गया और राजस्थानी व सूफी प्रस्तुतियों के मिश्रण के साथ होली उत्सव के गीतों को प्रस्तुत किया गया। उन्होंने सुर बहारा, मेहंदी हसन हुसैन, घोड़ालियो, बयारियो (मांड), खिवरो, तेरे इश्क नाचया, छप तिलक, पिया, रश्के कंवल और नित खेर जैसे गीत प्रस्तुत किए। इसी तरह, उन्होंने होलिया मैं और बृज मैं कीकर होली खेलू (रसिया) भी गाया। बैंड के सदस्यों में शामिल थे- बुंदू खान (वोकल्स), दयाम खान (वोकल्स और हारमोनियम), मंजूर खान (वोकल्स), इकलश खान (वोकल्स और सारंगी), जाकिर खान (खरताल), शकूर खान (अल्गोजा और मोरचांग) और सादिक खान( ढोलक)।
सोमवार, 7 मार्च के कार्यक्रम
सोमवार, 7 मार्च को रंगायन में शाम 5 बजे शैडो कल्चर एंड सोशल वेलफेयर सोसाइटी, भोपाल के मनोज नायर की नाट्य प्रस्तुति 'नेपथ्य में शकुंतला' से शुरुआत होगी। इसके बाद शाम 7 बजे मध्यवर्ती में मोहित गंगानी एंड ग्रुप द्वारा 'द प्रोजेक्ट त्रिवेणी' की प्रस्तुति होगी। इसके साथ ही, नारी शक्ति को समर्पित एक 'शक्ति - इंटरनेशनल आर्ट कैम्प' का आयोजन जेकेके के ग्राफिक स्टूडियो में सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक प्रतिदिन 8 मार्च तक किया जा रहा है।

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