Tuesday, March 8, 2022

जेकेके में दर्शकों ने शास्त्रीय संगीत और नृत्य प्रस्तुतियों का आनंद लिया


जयपुर।
 जवाहर कला केन्द्र द्वारा आयोजित परफॉर्मिंग आर्ट फेस्टीवल- 'रसरंगम' के चौथे दिन मंगलवार को दर्शकों ने प्रो. सुमन यादव द्वारा 'शास्त्रीय गायन' और डॉ रेखा ठाकर द्वारा 'शक्ति' कथक नृत्य प्रस्तुति का आंनद उठाया। गौरतलब है कि यह फेस्टिवल 13 मार्च तक चलेगा और इसमें शास्त्रीय संगीत, वाद्य, शास्त्रीय नृत्य एवं नाट्य प्रस्तुतियां आयोजित की जा रही हैं। इस अवसर पर आरपीएससी सदस्य डॉ संगीता आर्य भी उपस्थित रहीं।

जेकेके के मध्यवर्ती में प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका, प्रो सुमन यादव ने अपने परफॉर्मेंस 'शास्त्रीय गायन' में मुख्य रूप से आगामी होली त्यौहार को ध्यान रखते हुए 'ख्याल' और 'ठुमरी' प्रस्तुत की। उनके साथ हारमोनियम पर पंडित आलोक भट्ट, तबले पर श्री कपूर चंद और तानपुरा पर डॉ शालिनी गुप्ता और डॉ कंचन गुप्ता थे। प्रो. सुमन यादव ग्वालियर घराने के डॉ. लीलावा अडसुले के कुशल संरक्षण में प्रशिक्षित एक प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका हैं। उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से हिंदुस्तानी संगीत (वोकल) में स्नातकोत्तर डिग्री और गंधर्व मंडल, बॉम्बे से संगीत में डॉक्टरेट (संगीत प्रवीण) की उपाधि प्राप्त की है। वह ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन की 'ए' ग्रेड कलाकार हैं और उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रमुख संगीत मंचों पर प्रदर्शन किया है।

इसके बाद प्रसिद्ध कथक मास्टर, डॉ रेखा ठाकर द्वारा कोरियोग्राफ किए गए जीवंत और ऊर्जावान कथक नृत्य प्रस्तुति के साथ दिन का समापन हुआ। यह प्रस्तुति इस विचार पर आधारित थी कि मां देवी सभी जीवित प्राणियों में एक मां, एक पत्नी या एक बेटी के रूप में, ऊर्जा और शांति के रूप में प्रकट होती हैं। शक्ति पॉवर, ताकत और प्रेम है। प्रस्तुति में 'शक्ति विनाश की' और 'शक्ति सृजन की, प्रेम की' का संयोजन प्रदर्शित किया गया। बुराई का अंत करके प्रेम की रचना ब्रह्मांड में शक्ति की उपस्थिति का प्रमाण है। प्रस्तुति की शुरुआत 'ताल रूपक' में 'देवी स्तुति' से हुई, जिसके बोल थे 'श्री भाल लसत विशाल शशि मृग मीन खंजन लोचनी'। इसके साथ शुद्ध पारंपरिक जयपुर घराना कथक और कवि महादेवी वर्मा द्वारा लिखित एक रचना 'नाश भी हूं अनंत विकास का क्रम भी' थी।

प्रस्तुति में साथ देने वाले कलाकारों में - डॉ प्रवीण आर्य (ताल निर्देशन और पखावज), श्री मुन्ना लाल भट्ट (गायन और संगीत), मुजफ्फर रहमान (तबला) और श्री हरि हरशरण भट (सितार) थे। प्रस्तुति करने वाले कलाकार थे - रेखा सेन, कनिका कोठारी, शगुन शर्मा, चित्रांश तंवर, अनन्या दलवी, प्रेरणा कौशिक और रिया शर्मा।

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