Thursday, March 10, 2022

जेकेके में दर्शकों ने शास्त्रीय जुगलबंदी और मनमोहक कथक प्रस्तुति का आनंद उठाया


जयपुर।
 जवाहर कला केंद्र (जेकेके) द्वारा आयोजित 9 दिवसीय परफॉर्मिंग आर्ट फेस्टिवल- 'रसरंगम' के छठे दिन गुरूवार को दर्शकों ने जेकेके के ओपन थिएटर में शास्त्रीय जुगलबंदी और मनमोहक कथक प्रस्तुतियों का आनंद उठाया। इसके साथ ही एक महिला के अकेलेपन को दर्शाने पर आधारित नाटक 'धूप का एक टुकड़ा' का भी मंचन हुआ। यह फेस्टिवल 13 मार्च तक चलेगा और इसमें शास्त्रीय संगीत, वाद्य, शास्त्रीय नृत्य और रंगमंच की प्रस्तुतियां होंगी।

नाटक 'धूप का एक टुकड़ा'
दिन की शुरुआत रूचि भार्गव नरूला द्वारा निर्देशित और निर्मल वर्मा द्वारा लिखित हिंदी नाटक 'धूप का एक टुकड़ा' से हुई। नाटक को कलंदर, जयपुर द्वारा प्रस्तुत किया गया था। 'धूप का एक टुकड़ा' 'तीन एकांत' में से एक है। नाटक में स्त्री के अकेलेपन के बारे में दिखाया गया है। अपने एकालाप के माध्यम से वह धूप के एक टुकड़े की तलाश में है। इस महिला को प्यार होता है, शादी होती है, फिर पति से अलग हो जाती है। वह एक स्वतंत्र जीवन जीने की कोशिश करती है, लेकिन अतीत उसका पीछा नहीं छोड़ता। एकाकी जीवन जीते हुए, वह प्रतिदिन पार्क और गिरजाघर जाती है। वह अपनी यादों को संजोने का प्रयास करती है। नाटक के भावनात्मक अंत ने दर्शकों को एक महिला के एकाकी जीवन की कठिनाइयों से रूबरू कराया। नाटक के कलाकारों में रुचि भार्गव नरूला और अनिल मारवाड़ी शामिल थे। संगीत अभिषेक मुद्गल ने दिया। लाईट्स राहुल जांगिड़ ने की। सेट को आसिफ शेर अली ने डिजाइन किया था। कॉ़स्ट्यूम और प्रॉपर्टीज पूजा भार्गव ने की थी।
'वाद्यवृन्द' की सुंदर संगीतमय प्रस्तुती
जेकेके के मध्यवर्ती में राजस्थान के प्रसिद्ध कलाकार वायलिन वादक गुलज़ार हूसैन ने अपने निर्देशन में सहयोगियों कलाकारों के साथ 'वाद्यवृन्द' की सुंदर संगीतमय प्रस्तुती दी। इस प्रस्तुति में वायलिन, सितार, शहनाई, दिलरुबा, गिटार और तबला जैसे पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्रों का सुंदर मिश्रण देखा गया। दक्षिण भारत के प्रसिद्ध मधुर राग 'हंसध्वनी' में झपटल मध्यालय की बंदिश को सभी कलाकारों ने एक साथ अपने वाद्य यंत्रों पर बखूबी प्रस्तुत किया। इसके बाद गुलजार हुसैन द्वारा रचित तीन 'बंदिश', जिसमें सभी कलाकारों की 'जुगलबंदी' ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। 'वाद्यवृन्द' की रचना मेहर घराने के प्रसिद्ध संगीतकार उस्ताद अलाउद्दीन खान साहब ने की थी। 'वाद्यवृन्द' में प्रस्तुति देने वाले कलाकारों में पंडित चंद्रमोहन भट्ट (सितार), उस्ताद अब्दुल रशीद (शहनाई), मोहम्मद उमर (दिलरुबा), बिलाल हुसैन (गिटार), और मेराज हुसैन और ज़ायन हुसैन (तबला) शामिल थे।
'रक्स ए दरबार' कथक प्रस्तुति
भारत की पहली ट्रांसजेंडर कथक कलाकार, देविका देवेंद्र एस मंगलामुखी ने मध्यवर्ती में 'रक्स ए दरबार'- एक मुगलई कथक प्रस्तुति का प्रदर्शन किया। यह शैली मुगल काल में कथक के बारे में बताती है। देविका देवेंद्र एस मंगलामुखी ने एकल कथक गायन को 'यारे मन बिया बिया' के साथ प्रस्तुत किया। इसके बाद 'सरगम ए सलाम', 'सरगम' पर आधारित एक पारंपरिक प्रस्तुति थी, जिसने मुगल काल में 'सलाम' की शोभा प्रदर्शित की। बाद में, राग दरबारी में 'नज़्म' और 'ठुमरी' के बाद एक सुंदर तीन ताल प्रस्तुत किया गया।
'कथक'
शाम का समापन प्रसिद्ध कथक एक्सपर्ट मनीषा गुलियानी द्वारा एक ऊर्जावान कथक प्रस्तुति के साथ हुआ। उन्होंने पारंपरिक जयपुर घराने में बुनी गई कथक प्रस्तुति का प्रदर्शन किया। उनके प्रदर्शन ने वसंत को सेलिब्रेट किया। उन्होंने होरी में 'अभिनय' के लिए एक सार प्रस्तुत किया। उनके साथ तबले पर दिल्ली के मोहित गंगानी, गायन पर कोलकाता से पीयू नंदी और सारंगी पर दिल्ली के मुदस्सर खान थे।
शुक्रवार, 11 मार्च के कार्यक्रम
शुक्रवार 11 मार्च को शाम 7 बजे डॉ चेतना पाठक द्वारा 'शास्त्रीय गायन' की प्रस्तुति होगी। इसके बाद शाम 7.45 बजे डॉ रीमा गोयल द्वारा शास्त्रीय नृत्य 'आया बसंत' की प्रस्तुति होगी। दोनों कार्यक्रम मध्यवर्ती में होंगे।

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