Tuesday, March 8, 2022

'पावर को रीडिफाइन करके ही सशक्त होंगी महिलाएं'


जयपुर ।
 जवाहर कला केंद्र (जेकेके) द्वारा आयोजित किए जा रहे परफॉर्मिंग आर्ट्स फेस्टिवल 'रसरंगम' के चौथे दिन की शुरुआत कृष्णयान में 'थिएटर में महिलाओं की भूमिका' पर परिचर्चा के साथ हुई। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के खास अवसर पर हुई इस टॉक की वक्ता नादिरा जहीर बब्बर, पूर्वा नरेश, रुचि भार्गव एवं इप्शिता चक्रवर्ती सिंह थीं। मूमल तंवर द्वारा परिचर्चा का संचालन किया गया। इन सभी ने यह बात स्वीकारी कि महिलाओं द्वारा थिएटर में कार्य करने की कंडीशनिंग चॉइस को एम्पावर्ड चॉइस में बदलना होगा। नादिरा जहीर बब्बर ने कहा कि थिएटर में काम करने वाली महिलाओं के समक्ष पारिवारिक जिम्मेदारियों व थिएटर वर्क में सामंजस्य बैठाना और रात के समय काम करने जैसी कई समस्याएं होती हैं। थिएटर में काम करने से बहुत ज्यादा अर्निंग भी नहीं होती है। ऐसे में जब तक महिलाओं में 'वे जो चाहे कर सकती हैं' का अहसास नहीं होगा, तब तक इन समस्याओं का हल नहीं होगा। जयपुर के थिएटर में महिलाओं की स्थिति की बात करते हुए रुचि भार्गव ने  कहा कि पहले यहां रंगमंच में महिलाओं ही नहीं, बल्कि पुरुषों के लिए भी ज्यादा अवसर नहीं थे, पहले यहां शौकिया रंगमंच ही रहा है, लेकिन अब धीरे—धीरे बदलाव आ रहा है। पूर्वा नरेश ने कहा कि पावर को रीडिफाइन करना ही महिलाओं को एम्पावर करने का एकमात्र तरीका है। इप्शिता चक्रवर्ती सिंह ने कहा कि हर क्षेत्र की तरह रंगमंच में भी महिलाओं को अपनी आवाज स्वयं रखनी होगी और सबसे पहले स्वयं को खुश रखने को प्राथमिकता देनी होगी। परिचर्चा की शुरुआत में सभी वक्ताओं ने रंगमंच के अपने सफर को भी साझा किया।

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