Thursday, March 3, 2022

‘सामाजिक विज्ञान और मानविकी में बहु-विषयक रुझान’ पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन


जयपुर।
 मणिपाल विश्वविद्यालय जयपुर के कला विभाग, मानविकी और सामाजिक विज्ञान स्कूल, द्वारा ‘सामाजिक विज्ञान और मानविकी में बहु-विषयक रुझान’  पर एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया।सम्मेलन के मुख्य अतिथि धार्मिक कथाओं के प्रख्यात वक्ता और विद्वान डॉ. देवदत्त पटनायक थे। डॉ. पटनायक ने भारतीय धर्मशास्त्र की वैज्ञानिक व्याख्या की। उन्होंने बताया कि यज्ञ धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक प्रक्रिया है। अंग्रेजों ने इसका अनुवाद करते समय इसे ‘सैक्रिफाइस’  कर दिया, जो इसका सही अर्थ नहीं है। हमारे आख्यानों में, यज्ञ का अर्थ प्रतिदान देना है। प्रकृति हमें सब कुछ देती है; इसके प्रतिदान में हम उसे यज्ञ अर्पित करते हैं। जब यह प्रतिदान नहीं दिया जाता है, तो यह अधर्म बन जाता है। वर्तमान संदर्भ में हमें यह समझना होगा कि हमें अपने धार्मिक मीमांसाओं के लिए अधिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना होगा। अध्यक्षीय भाषण देते हुए विश्वविद्यालय के प्रो प्रेसिडेंट डॉ. एन। एन शर्मा ने कहा कि आज डॉ पटनायक जैसे विद्वान नई पीढ़ी को भारतीय परंपराओं से अवगत कराने का एक जटिल कार्य कर रहे हैं । कार्यक्रम की शुरुआत में स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज की निदेशक डॉ. ऋचा अरोड़ा ने सभी का स्वागत किया, डॉ. मीरा बैन्दूर ने सम्मेलन की रूपरेखा से अवगत कराया. कला विभाग के अध्यक्ष डॉ. मणि सचदेव ने वर्तमान संदर्भ में मानविकी और सामाजिक विज्ञान के महत्व को बताया। इस मौके पर सोफिया क्लब की पत्रिका ‘प्रतिबिंब’  का विमोचन किया गया। प्रोफेसर एंथोनी सेवरी राज ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. राधिकामोहन गुप्ता ने किया।

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