Monday, March 14, 2022

जेकेके में पुस्तक 'तुम्हें भूल चुका हूं' पर हुआ संवाद


जयपुर।
 आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत जवाहर कला केंद्र (जेकेके) द्वारा शायर अमित गोस्वामी की गजल और नज्म संग्रह 'तुम्हें भूल चुका हूं' पुस्तक पर संवाद का आयोजन किया गया। यह संवाद कार्यक्रम जेकेके के बुक क्लब में आयोजित किया गया। इस दौरान शायर अमित गोस्वामी ने अपनी पुस्तक के पीछे की प्रेरणा और शायरी लिखने की शुरूआत के बारे में चर्चा की। इसके साथ उन्होंने दर्शकों के अपनी लिखी कुछ नज्में और गजलें भी पढ़कर सुनाई। वे प्रख्यात लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ के साथ चर्चा कर रहे थे। अमित गोस्वामी ने उर्दू पढ़ने और समझने के बारे में बात करते हुए कहा कि यह उनके पिताजी की देन है। उनके पिता पं. जश करण गोस्वामी साहित्य प्रेमी थे। उन्होंने बताया कि मैंने बचपन से ही गालिब को पढ़ा व सुना है। उर्दू की बारीकियों को सुनकर और पढ़कर ज्यादा सीखा है। गजलें और नज्में लिखने की बात पर उन्होंने कहा कि मैं महसूस करके लिखता हूं। जो मैंने महसूस किया, वही मैंने लिखा है। नज्में ज्यादा पढ़ी हैं इसलिए वही जरिया बन गई। गोस्वामी ने आगे कहा कि मैंने गालिब सहित जिसको भी पढ़ा है, उनसे हमेशा कुछ न कुछ सीखा है। संवाद के दौरान श्री गोस्वामी ने अपनी लिखी कुछ नज्में और गजले जैसे कि 'तुम्हें भूल चुका हूं'; 'तुमको हाथों की लकीरों में नहीं लिखवाया'; 'अब उसके लहजे में अखबार जैसी खुश्की है'; 'आते-आते रह गया मुझको करार' आदि दर्शकों को पढ़कर सुनाई।

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