Sunday, February 20, 2022

एमयूजे में एडवांसेज इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग एंड नैनो टेक्नोलॉजी विषय पर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का समापन


जयपुर। 
मणिपाल यूनिवर्सिटी, जयपुर (एमयूजे) के मैकेनिकल इंजीनियरिंग द्वारा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, उत्तराखंड के रिसर्च एंड कंसल्टेंसी सैक्शन के सहयोग से एडवांसेज इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग एंड नैनो टेक्नोलॉजी (आईसीएएमएन) 2022 विषय पर आयोजित चतुर्थ इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। एमयूजे में इस दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस का शनिवार को समापन हुआ।

एमयूजे के मैकेनिकल एंड मेक्ट्रोनिक्स इंजीनियरिंग के स्कूल ऑफ ऑटोमोबाइल के निदेशक प्रो. शिवा प्रसाद एच सी के स्वागत भाषण के साथ कॉन्फ्रेंस की शुरूआत हुई। एमयूजे के प्रेसीडेंट डॉ. जी. के. प्रभु ने उद्घाटन भाषण दिया। उन्होंने सभी क्षेत्रों में मैकेनिकल इंजीनियरिंग व नैनो टेक्नोलॉजी के विकास के महत्व पर प्रकाश डाला। इसके पश्चात नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, उत्तराखंड के आर. एंड सी. के डीन डॉ. धर्मेंद्र त्रिपाठी ने एनआईटी, उत्तराखंड एवं मणिपाल यूनिवर्सिटी, जयपुर की साझेदारी में वर्तमान आयोजित की जा रही और भविष्य की गतिविधियों के बारे में बताया।
इस अवसर पर सीएसआईआर- सेंट्रल मैकेनिकल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट, दुर्गापुर के निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) हरीश हिरानी मुख्य अतिथि थे। उन्होंने रिसर्च के महत्व पर बात की और इस बात पर जोर दिया कि शोध कार्य का परिणाम समाज के लाभ के लिए होना चाहिए। उन्होंने भारतीय संदर्भ में तकनीकी विकास व आत्मनिर्भरता पर भी प्रकाश डाला।
अपने प्लेनरी एड्रेस में प्रो. हिरानी ने समाज के उत्थान की दिशा में एक इको-सिस्टम में साथ मिलकर काम करके सोशल इंजीनियरिंग के प्रबंधन के बारे में बात की। उन्होंने कॉन्फ्रेंस के प्रतिभागियों को सीएसआईआर-सीएमईआरआई द्वारा विकसित तकनीकों (1960 के दशक में विकसित प्रथम स्वदेशी ट्रैक्टर 'स्वराज' और 2000 के दशक में विकसित 'सोनालिका') के सामाजिक प्रभाव से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि इन दोनों तकनीकों ने 12000 करोड़ से अधिक के सामाजिक-आर्थिक मूल्य सृजन के साथ जबरदस्त सामाजिक प्रभाव उत्पन्न किया है।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, उत्तराखंड के डायरेक्टर प्रोफेसर (डॉ.) ललित कुमार अवस्थी गेस्ट ऑफ ऑनर थे। उन्होंने इस तरह के आयोजनों की महत्ता बताई और मैकेनिकल इंजीनियरिंग व नैनो टेक्नोलॉजी क्षेत्रों के शोधकर्ताओं को प्रोत्साहित किया।
इन कॉन्फ्रेंस के पांच उप विषय— थर्मल इंजीनियरिंग, डिजाइन इंजीनियरिंग, मैटेरियल साइंस, प्रोडक्शन व इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग हैं। ऑनलाइन आयोजित की गई इस दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस में करीब 150 रिसर्च आर्टिकल प्रस्तुत किए गए। कॉन्फ्रेंस में सीएसआईआर- सेंट्रल मैकेनिकल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट, दुर्गापुर, भारत के निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) हरीश हिरानी; कंसल्टेंट (आर एंड डी), लेखक व जर्मनी के विजिटिंग लेक्चरर डॉ. हेराल्ड मेहलिंग; मणिपाल यूनिवर्सिटी, जयपुर, भारत के प्रो-प्रेसीडेंट व प्रोफेसर (डॉ.) नितिन निपुण शर्मा; सनवे यूनिवर्सिटी, मलेशिया के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर (डॉ.) मोहम्मद खालिद और पीडीपीएम इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग, जबलपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रोफेसर (डॉ.) प्रशांत कुमार जैन जैसे प्रतिष्ठित विशेषज्ञों की एक्सपर्ट टॉक हुईं। साथ ही दुनिया भर के रिसर्चर्स द्वारा रिसर्च क्षेत्रों के वर्तमान शोध कार्यों तथा उनके द्वारा सामना की जा रही चुनौतियों पर भी चर्चा की गई।
विभिन्न तकनीकी सत्रों में नवीनतम क्षेत्रों में हो रहे कई उच्च गुणवत्ता वाले कार्यों को प्रस्तुत किया गया। इनमें प्रोसेथिक घुटने का डिजाइन व ऑप्टिमाइजेशन, विभिन्न नवीन सामग्रियों का लक्षण वर्णन, नए कम्पांजिट एप्लीकेशंस, फेस चेंज मैटेरियल एनर्जी स्टोरेज व डिसेमनेशन कुछ प्रमुख कार्य हैं। प्रत्येक स्ट्रीम में से सर्वश्रेष्ठ पेपर का चयन किया गया और उन्हें समापन समारोह में प्रस्तुत किया गया। कॉन्फ्रेंस के संयोजक संयोजक डॉ. संतोष पाटिल और डॉ. रवि कुमार शर्मा द्वारा आईसीएएमएन—2022 की समरी रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। मैटेरियल्स टुडेज प्रोसीडिंग्ज (स्कोपस) और इंटरनेशनल जनरल ऑफ व्हीकल्स स्ट्रक्चर्स एंड स्टेबिलिटी (आईजेवीएसएस-क्यू 3 जर्नल) कॉन्फ्रेंस के पब्लिकेशन पार्टनर थे। आईसीएएमएन-22 के आयोजन सचिव डॉ. अभिषेक शर्मा द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

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