Sunday, February 20, 2022

दर्शकों ने 'भारतीयता' व इसके विभिन्न पहलुओं पर जीवंत चर्चा का लिया आनंद


जयपुर।
 आईएएस एसोसिएशन, राजस्थान की ओर से आज आईएएस लिटरेरी सोसाइटी, राजस्थान के फेसबुक पेज पर दिलचस्प बुक टॉक का आयोजन किया गया। यह टॉक सिविल सेवक से लेखक बनीं तारिका रॉय (आईआरएएस) और सौम्या गुप्ता (आईएफएस) द्वारा लिखित पुस्तक 'मेड(ई) इन इंडिया' पर आधारित थी। इन्होंने आईएएस एसोसिएशन, राजस्थान की आईएएस साहित्य सचिव,  मुग्धा सिन्हा के साथ बातचीत की। टॉक के तहत पुस्तक की अवधारणा, रेलवे यात्रा के अनुभव, भारत में बच्चों के पालन-पोषण और पुस्तक लिखने के दौरान की चुनौतियों पर चर्चा की गई। इस अवसर पर दोनों ने पुस्तक के अपने पसंदीदा चैप्टर भी पढ़े।

पुस्तक की अवधारणा के बारे में बात करते हुए तारिका रॉय ने बताया कि यह नियत पुस्तक तब लिखी गई, जब भारत की अपनी स्पष्ट खोज को साझा करने के लिए कई समानताओं वाले दो बहुत भिन्न लोग एक साथ आए। कई बार हुई बातचीत के माध्यम से यह अहसास हुआ कि भारत के बारे में कई प्रश्न भी थे और हम दोनों में काफी उत्साह था। लोगों को भारत को समझने के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में संदर्भ करने में सक्षम होने के अंतर की भरपाई करना इस पुस्तक का उद्देश्य है।
पुस्तक के 'पैरेंटल कंट्रोल' चैप्टर की चर्चा करते हुए सौम्या गुप्ता ने कहा कि पहले केवल डॉक्टरों व इंजीनियरों को ही उपयुक्त पेशा माना जाता था। लेकिन अब स्थिति बहुत बदल गई हैं और लोग अलग-अलग पेशे अपनाकर सफल हो रहे हैं। बच्चों की परवरिश करने वाले भारतीय पैरेंट्स की छोटी-छोटी विशिष्टताओं पर प्रकाश डालना इस चैप्टर का उद्देश्य है। भारत में माता-पिता अपने बच्चों को लेकर बहुत सतर्क रहते हैं। वे यह सुनिश्चित करने के लिए सब कुछ करते हैं कि उनके बच्चे सही वातावरण में बड़े हो रहे हैं। पैरेंट्स व बच्चे के बीच का यह जुड़ाव केवल भारत में ही देखने को मिलता है।
भारतीय रेलवे के यात्रा अनुभव की बात करते हुए तारिका रॉय ने कहा कि भारत में ट्रेन और प्लेटफॉर्म पर हमेशा त्योहार जैसा माहौल लगता है। 'स्वच्छ भारत अभियान' ने यह सुनिश्चित किया है कि रेलवे में काफी बदलाव आया है। इसी प्रकार 'सुगम्य भारत अभियान' (असेसिबल इंडिया कैम्पेन) का उद्देश्य विकलांग व्यक्तियों के लिए रेलवे स्टेशनों व ट्रेनों को सुलभ बनाना है। कनेक्टिविटी व यात्रा के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए ऐसी कई और पहल की जा रही हैं। रेलवे की गर्मजोशी, देखभाल व पुरानी यादों को बरकरार रखते हुए भारतीय रेलवे एक नए सेवा उद्योग के रूप में सामने आ रहा है।

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