Sunday, February 6, 2022

बसंत पर्व पर बसंत गीतों से सराबोर हुआ जेकेके का रंगायन



जयपुर ।
 आज़ादी का अमृत महोत्सव के अन्तर्गत कला, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग, राजस्थान सरकार, जवाहर कला केन्द्र व जयपुर कत्थक केन्द्र द्वारा बसंत पंचमी के अवसर पर 'बसन्त पर्व' का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जेकेके 'रंगायन सभागार' में आयोजित हुआ जहां कलाकारों ने गायन और नृत्य की प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। इस अवसर पर कला, साहित्य, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग, राजस्थान सरकार के संयुक्त सचिव,  पंकज ओझा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। संगीतकार व गायक  राजीव भट्ट के निर्देशन में सरस्वती वन्दना व बसन्त वंदन की प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम की शुरूआत हुई। कार्यक्रम में कलाकार  राजीव भट्ट, शिखा भट्ट, देवव्रत भट्ट, रेखा भट्ट, वर्षा विजयवर्गीय ने सुरीली प्रस्तुतियों से बसंत ऋतु का आह्वान व बसन्त वंदन किया। प्रस्तुति के दौरान कीबोर्ड पर  पियूष कुमार, तबले पर सावन डांगी और ओक्टापैड व मंजीरे पर  महेश खाण्डे ने साथ दिया। कलाकारों ने 'जगत जननी ज्वाला मुखी माता सरस्वती', 'कुसुमल कुसुम-वरण अर्पण है', 'देखो बसंत बहार आई', 'बसंत है आया बसंती', 'आओ रे आओ सखी' आदि गीत प्रस्तुत किए।  राजीव भट्ट के निर्देशन में कार्यक्रम का संचालन श्रीमती प्रोमिला 'राजीव' ने किया। इसके बाद श्रीमती डॉ. रेखा ठाकर के निर्देशन में "नव बसन्त आया सखी री" के अंतरर्गत कथक नृत्य की प्रस्तुतियां हुईं। जयपुर घराने के कथक के साथ बसंत ऋतु पर तीन बंदिशे 'कोयलिया बोले अमुआ की डार', 'नववसंत आया' और 'कुंज कुंजवन निकुंज' प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम में प्रस्तुति देने वाले कलाकारों में गार्गी शर्मा, शगुन शर्मा, चित्रांश तंवर, प्रेरणा कौशिक और अनन्या दलवी शामिल थीं। वहीं संगतकारों में डॉ. प्रवीण आर्य (पखावाज वादन),  मुन्ना लाल भट्ट (गायन),  हरिहर शरण भट्ट (सितार वादन), मोईनुद्दीन खान ( सारंगी वादन) और मुजफ्फर रहमान (तबला वादन) शामिल थे।

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