Sunday, February 27, 2022

जेकेके में दो दिवसीय 'संग कबीर म्यूजिक फेस्टिवल' का हुआ समापन


जयपुर।
जवाहर कला केंद्र (जेकेके) द्वारा बीकानेर की सांस्कृतिक संस्थान— लोकायन और राजस्थान कबीर यात्रा के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय 'संग कबीर म्यूजिक फेस्टिवल' का रविवार को समापन हुआ। 'संग कबीर' का उद्देश्य सांप्रदायिक सद्भाव, आध्यात्मिकता को बढ़ाना और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करना है। फेस्टिवल के अंतिम दिन, दर्शकों ने हिमांशु बाजपेयी, वेदांत भारद्वाज और नीरज आर्य कबीर कैफे जैसे प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा प्रस्तुतियों का आनंद लिया।

शाम की शुरुआत लखनऊ के साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता, हिमांशु बाजपेयी और चेन्नई के वेदांत भारद्वाज के 'कबीर की दास्तान-म्यूजिकल दास्तानगोई' से हुई। वेदांत भारद्वाज, प्रशंसित फीचर फिल्म- हिज फादर्स वॉयस 2019 सहित कई फीचर फिल्मों के संगीतकार के रूप में भी प्रसिद्ध हैं। दास्तानगोई उर्दू कहानी कहने की कला है जो कि 13वीं शताब्दी में उत्पन्न हुई और लखनऊ-दिल्ली क्षेत्र में प्रचलित थी। कुछ शताब्दियों बाद, यह फीकी पड़ गई। मॉर्डन 'दास्तानगो' (स्टोरीटेलर) ने 'दास्तानगोई' को एक ऐसा माध्यम बना दिया है, जिसके द्वारा वे महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों के बारे में जागरूकता फैलाते हैं और पुरानी कहानियों को संगीत के रूप में सुनाते हैं। प्रस्तुति के दौरान उन्होंने कबीर के दोहे और उनकी सीख को गीतों और कहानी के माध्यम से प्रस्तुत किया।

यह फेस्टिवल नीरज आर्य कबीर कैफे द्वारा रोमांचक प्रस्तुति के साथ समाप्त हुआ। यह मुंबई का फोक फ्यूजन बैंड है जो कि कबीर के भजनों को फ्यूज़न शैली में प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं और युवाओं के बीच काफी प्रचलित हैं। बैंड में प्रस्तुति देने वालों में नीरज आर्य (लीड वोकल्स और रिदम गिटार), विक्रम और वीरेन सोलंकी (पर्कशंस और ड्रम), मुकुंद रामास्वामी (वायलिन), और पूबुआनपो ब्रिटो केसी (बास गिटार और बैकिंग वोकलिस्ट) और पीयूष आचार्य (हार्मोनियम) शामिल थे। . अपनी प्रस्तुति के माध्यम से, उन्होंने सुनिश्चित किया कि कबीर दास के छंद न केवल पुराने दोहो में, बल्कि पॉप, रॉक, रेगे और सामयिक कार्नेटिक संगीत के माध्यम से दुनिया के अन्य हिस्सों तक भी पहुंचें।
संग कबीर आर्ट सर्किल
संग कबीर आर्ट सर्किल के एक भाग के रूप में दर्शन सिंह द्वारा 'एक्सप्लोरिंग स्पीच एंड साउंड' पर एक सत्र आयोजित किया गया था। सत्र में, लोगों ने 'कबीर वाणी' के माध्यम से ध्वनि कंपन की यात्रा में खुद को तल्लीन करना सीखा और अपने अस्तित्व की उपस्थिति का अनुभव किया।
ड्रम सर्किल
इसी तरह, कला क्यूरेटर, कवि और कलाकार, मनु द्वारा 'ड्रम सर्किल' में दर्शकों ने एक साथ ड्रम बजाया और दिल खोलकर डांस किया। दर्शकों ने एक सर्किल में खड़े होकर रिदम पर मजेदार गेम्स खेले।

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