Tuesday, February 8, 2022

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2022 मनाएगा भारतीय स्वतंत्रता के 75वें वर्ष का जश्न





5-14 मार्च 2022 को आयोजित होने वाले जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के प्रमुख आकर्षणों में इंडिया 75 की थीम भी होगी| भारतीय आज़ादी के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर, फेस्टिवल के 15वें संस्करण में अनेकों ऐसे सत्रों को वरीयता दी गई है, जो भारत के सफ़र के भिन्न पहलुओं को उजागर करेंगे|  फेस्टिवल में शामिल अनेक बेहतरीन सत्रों में से एक सत्र चुनाव प्रक्रिया और लोकतान्त्रिक प्रणाली के पक्ष-विपक्ष पर केन्द्रित होगा| पैनल में शामिल होंगे भारत के भूतपूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त और एव्री वोट काउंट्स के लेखक नवीन बी. चावला; भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और मेकर्स ऑफ़ मॉडर्न दलित हिस्ट्री के लेखक गुरु प्रकाश पासवान; प्रतिष्ठित ज्यूरी और सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया के रिटायर्ड जज जस्टिस मदन बी. लोकुर| इन प्रसिद्ध वक्ताओं के साथ चर्चा करेंगी अकादमिक और लेखिका मुकुलिका बनर्जी|   आधुनिक भारत के विकास में राष्ट्रवाद के ऐतिहासिक, सामाजिक-राजनीतिक और दार्शनिक अध्ययन का अनोखा मिश्रण शामिल है| लेखक और पत्रकार साकेत सुमन की विचारों को झकझोर देने वाली किताब द सायकोलोजी ऑफ़ ए पेट्रियट इसी नए भारत की तस्वीर पेश करती है| लेखक, कवि और अकादमिक मकरंद आर. परांजपे की आने वाली किताबों में शामिल है जेएनयू: नेशनलिज्म एंड इंडिया’स अनसिविल वार | गुरमेहर कौर की नई किताब, द यंग एंड द रेस्टलेस: यूथ एंड पॉलिटिक्स इन इंडिया, भारतीय लोकतंत्र में चुनाव और आदर्शात्मकता की भागीदारी का निरीक्षण करती है| जाने-माने अकादमिक और लेखक बद्री नारायण की किताब, रिपब्लिक ऑफ़ हिंदुत्व: हाउ द संघ इज रिशेपिंग इंडियन डेमोक्रेसी आरएसएस के विश्वास और कार्यों पर नज़र डालती है| इनके साथ चर्चा में लेखिका, अकादमिक और सामाजिक मानवविज्ञानी मुकुलिका बनर्जी देश की नींव और भविष्य पर फोकस करेंगी| मुकुलिका बनर्जी का नया मोनोग्राफ कल्टीवेटिंग डेमोक्रेसी: पॉलिटिक्स एंड सिटिज़नशिप इन अग्रेरियन इंडिया ग्रामीण भारत, विशेषत: पश्चिम बंगाल के सन्दर्भ में, राजनीति और आम नागरिकों के बीच सम्बन्ध का ब्यौरा प्रस्तुत करता है| एक अन्य सत्र में, बनर्जी लेखिका, पत्रकार और अनुवादिका नमिता वायकर से चर्चा करेंगी| ये दोनों कृषि और राजनीति पर प्रकाश डालेंगी|  भारत में विकलांगता अधिकार आंदोलन प्रमुख है, लेकिन इसका प्रतिनिधित्व कम है| प्रोफेसर और उद्यमी अनीता शर्मा देश के 2000 से अधिक ड्राइविंग स्कूलों में गईं और पाया कि उनमें से किसी में भी अक्षम लोगों के लिए कोई समाधान नहीं है| अनीता पोलियो से पीड़ित होने की वजह से जानती हैं कि ऐसे लोगों के लिए ड्राइविंग सीखना कितना जरूरी है| तो उन्होंने ‘ऑन माय ओन’ नाम से अपना एक ड्राइविंग स्कूल शुरू किया, जहाँ अक्षम लोगों को ड्राइविंग सीखने में मदद की जाती है| भारतीय सामाजिक उद्यमी, लेखक और विकलांगता अधिकार कार्यकर्त्ता निपुण मल्होत्रा; पत्रकार और उपन्यासकार सी.के. मीणा, और SAP इंजीनियरिंग अकादेमी के सीनियर वाईस प्रेसिडेंट और हेड और सह-लेखन में भारत में विकलांगता से जूझ रहे लोगों पर एक प्रभावशाली किताब,  द इन्विसिबल मेजोरिटी: इंडिया’स एबल्ड डिसेबल्ड लिखने वाले वी.आर. फ़िरोज़| इनके साथ चर्चा करेंगे फेस्टिवल के प्रोडूसर और टीमवर्क आर्ट्स के मैनेजिंग डायरेक्टर संजॉय के. रॉय|   भारतीय ग्रामीण मध्य वर्ग में सैंकड़ों मिलियन लोग आते हैं, जो कृषि और उद्योग, दोनों ही क्षेत्रों से जुड़े हैं| ये संभवत: वैश्विक अर्थव्यवस्था का सबसे शानदार, जरूरी और उपेक्षित पहलु है| ग्रामीण अर्थव्यवस्था के प्रमुख स्कोलर मरयम अस्लानी की नई किताब, कंटेस्टेड कैपिटल: रूरल मिडिल क्लासेस इन इंडिया भारत में उभरते ग्रामीण मध्य वर्ग की बात करती है, जो पूरे देश के मध्य वर्ग का एक तिहाई से भी अधिक है| अस्लानी के साथ संवाद करेंगे लेखक, राजनीतिज्ञ और भूतपूर्व राजनयिक पवन के. वर्मा, जिनकी प्रभावशाली किताब द ग्रेट इंडियन मिडिल क्लास बीसवीं सदी के उभरते मध्यवर्ग की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का वर्णन करती है| भारत के सबसे चहेते प्रधानमंत्री, प्रबुद्ध राजनीतिज्ञ और स्नेही पिता की छवि लिए अटल बिहारी वाजपेयी की राजनीतिक विरासत, स्वतंत्रता पश्चात् भारत के विस्तृत इतिहास को पटल पर उकेरती है| वरिष्ठ पत्रकार और इंदिरा: इंडिया’स मोस्ट पावरफुल प्राइम मिनिस्टर की लेखिका सागरिका घोष अपने नई किताब, अटल बिहारी वाजपेयी में वाजपेयी के गहन व्यक्तित्व को प्रस्तुत करती हैं| लेखक, सामाजिक वैज्ञानिक और पत्रकार नलिन मेहता की नई किताब, द न्यू बीजेपी: मोदी एंड द मेकिंग ऑफ़ द वर्ल्ड’स लार्जेस्ट पॉलिटिकल पार्टी नए सामाजिक आयामों की पड़ताल करती है| इनके साथ संवाद करेंगी पत्रकार मंदिरा नायर1971 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध पर केन्द्रित किताब, ऑपरेशन X को भारतीय नेवी के भूतपूर्व ऑफिसर कैप्टेन MNR सामंत और लेखक संदीप उन्नीथन ने लिखा है| यह दुनिया के सबसे बड़े नेवी युद्ध के पीछे की कहानी कहती है| नौसेना इतिहासकार कॉमोडोर श्रीकांत बी. केंसुर के साथ संवाद में ये वक्ता कई छिपे किस्सों को श्रोताओं के सम्मुख रखेंगे|   कोविड-19 के प्रतिक्रिया स्वरूप होने वाले पहले सम्पूर्ण लॉकडाउन ने एक अकल्पनीय राष्ट्रीय आपदा को जन्म दिया| उस लॉकडाउन ने लाखों अप्रवासी मजदूरों को बेरोजगार, बेघर, भूखे मरने के लिए छोड़ दिया था| पुरस्कृत फ़िल्मकार विनोद कापरी की किताब, 1232 किलोमीटर एक ऐसे ही सफ़र का दस्तावेज़ है, जिसमें फ़िल्मकार ने अप्रवसी मजदूरों के साथ उनके घर तक का सफ़र तय किया| इस सफ़र में लाखों लोग पैदल ही अपने घरों के लिए निकल पड़े थे| साथी पत्रकार और लेखिका पूजा चंगोइवाला की होमबाउंड एक ऐसे परिवार की दृढ़ता की कहानी कहती है, जिसने अमानवीय परिस्थितियों का सामना किया| अकादमिक और लेखक चिन्मय तुम्बे के साथ संवाद में, कापरी और चंगोईवाला इन साधारण लोगों द्वारा झेली गई असाधारण परिस्थितियों पर प्रकाश डालेंगे|  ‘श्री औरोबिन्दो’ पर केन्द्रित एक सत्र में, मेडिकल डॉक्टर, कवि और दार्शनिक परीक्षित सिंह और लेखक मकरंद आर. परांजपे, अकादमिक, संपादिका और लेखिका मालाश्री लाल के साथ संवाद में श्री औरोबिन्दो के दर्शन और उनकी ‘आंतरिक खोज’ की पड़ताल करेंगे| परांजपे द्वारा संपादित संग्रह श्री औरोबिन्दो में उनके योगी और कवि रूप की विस्तृत चर्चा है| सिंह की किताब श्री औरोबिन्दो एंड द लिटरेरी रेनेंसा ऑफ़ इंडिया श्री औरोबिन्दो की तुलना दर्शन के पन्द्रह विद्वानों से करती है|  महान साहित्यकार रामधारी सिंह दिनकर और सुभद्राकुमारी चौहान का लेखन आदर्श और ओजस्व का प्रतिबिम्ब है| स्वतन्त्रतापूर्व दिनकर की देशप्रेम से सजी कविताएँ एक नए दिवस की ओर इशारा करती हैं, तो चौहान की आइकोनिक कविता ‘झाँसी की रानी’ पीढ़ियों से हमारे दिलों को गर्वोन्नत करती आ रही है| लेखक, कवि और संगीतज्ञ यतीन्द्र मिश्र और स्कोलर, लेखक, अकादमिक और इतिहासकार त्रिपुरदमन सिंह इन दो महान रचनाकारों की विरासत पर बात करते हुए, देशभक्ति की जड़ों में जायेंगे और उसके माध्यम से हिंदी साहित्य को समझने का प्रयत्न करेंगे| 

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