Monday, January 17, 2022

पुरस्कार विजेता अंतरराष्ट्रीय डॉक्यूमेंट्री में दिखीं जयपुर की डॉक्टर



जयपुर। 
जयपुर की प्रख्यात रिहैबिलिटेशन फिजिशियन, डॉ पूजा मुकुल को हाल ही में आयोजित जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (जिफ) में प्रदर्शित एक अंतरराष्ट्रीय डॉक्यूमेंट्री, 'द प्राइस ऑफ चीप' में दिखाया गया। यह टोरंटो के डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर और स्क्रीन राईटर, बैरी स्टीवंस द्वारा निर्देशित है। यह एक प्रभावशाली फिल्म है जो फैशन सप्लाई चेन्स में गुम मॉर्डन स्लेव्स की कहानियों को बताती है। गरीबी और कर्ज में डूबे होने के कारण माता-पिता अपने छोटे बच्चों को कारखानों और कपड़ा मिलों में काम करने के लिए भेजने के लिए मजबूर हो जाते हैं, जहां वास्तविक रूप से उन्हें एक बंधक के रूप में रहना पड़ता है। यह फिल्म बच्चों को बचाने के लिए उन असुरक्षित कारखानों पर छापेमारी करने वाले एक्टिविस्ट और उन बचाए गए बच्चों के जीवन के पुनर्निर्माण की कोशिश पर आधारित है। इस फिल्म ने दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल्स में 17 पुरस्कार जीते हैं। अजय ऐसे ही एक आधुनिक ज़माने का स्लेव था। 15 साल की उम्र में, अजय ने मिल में काम करते हुए मशीन में हाथ फंसने से अपना दाहिना हाथ खो दिया और उसके हाथ को कंधे तक काटना पड़ा। अजय और उनका परिवार टूट चुका था, उनको अपना भविष्य अंधकारमय लग रहा था। हाथ कटने के साढ़े तीन साल बाद अजय को रिहैबिलिटेशन के लिए जयपुर में डॉ पूजा मुकुल के जयपुर फुट रिहैबिलिटेशन सेंटर में लाया गया। जहां उसके एक एडवांस मायोइलेक्ट्रिक आर्टिफिशियल हाथ लगाया गया था। दो दिन के प्रशिक्षण के बाद अजय नें अपना आर्टिफिशियल हाथ को चलाना सीख लिया। अजय में परिवर्तन स्पष्ट रूप से देखा जा सकता था, अजय अब एक नया, आत्मविश्वास से भरा, पूर्ण और खुश व्यक्ति था। अजय दिसंबर 2021 में फॉलो-अप के लिए जयपुर लौटा था। वर्तमान में, वे राजस्थान में उदयपुर के पास फुटेला गांव में अपनी आटा चक्की चलाते हैं और अपने माता-पिता व भाई-बहनों का आर्थिक रूप से सहयोग करते हैं। डॉ. पूजा ने कहा, "एक आर्टिफिशियल अंग का प्रभाव व्यक्ति की कार्यात्मक स्वतंत्रता को बहाल करने से कहीं बड़ा है। यह उसे आर्थिक रूप से उत्पादक बनाता है, उसकी गरिमा को पुनर्स्थापित करता है और सामाजिक समावेश को बढ़ावा देता है।" फिल्म के बारे में बताते हुए, उन्होंने कहा कि "यह डॉक्यूमेंट्री विचारोत्तेजक है। इसका उद्देश्य हमारा ध्यान उन कपड़ों की ओर केंद्रित करना है, जो हम खरीदते हैं। हमें पुराने स्टाइल और ब्रैंड्स को देखने और इस पर ध्यान देने की जरूरत है कि कपड़े कहां से आते हैं, कौन लोग इन्हें बनाते हैं और हमारी पसंद उनके जीवन को कैसे प्रभावित करती है।"

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