Friday, January 21, 2022

गुलाबी शहर में इश्क, गिरह और सूफिज्म पर चर्चा ने बांधा समां


जयपुर।
 जयपुर के साहित्यकार और पुस्तक प्रेमी गुरुवार की शाम को, 'इश्क', दोस्ती, आध्यात्मिकता, स्वीकृति, करुणा और मुक्ति जैसी सूफीवाद की विभिन्न अवधारणाओं, सोच और विचारों को सुनकर मंत्रमुग्ध हो गए। यह अवसर था आईएएस लिटरेरी सोसाइटी, राजस्थान और यंग इंडियंस, सीआईआई द्वारा आईटीसी राजपुताना में आयोजित चर्चा का, जहां लंदन के लेखक मोइन मीर के साथ उनकी पुस्तक 'द लॉस्ट फ्रैग्रेंस ऑफ इन्फिनिटी' पर चर्चा की गई। लेखक के साथ आईएएस एसोसिएशन की साहित्य सचिव और राजस्थान सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव मुग्धा सिन्हा ने चर्चा की। इस ऐतिहासिक उपन्यास में दिल्ली के एक युवा और परेशान शिल्पकार, क़रार अली नायक के रूप में हैं, जो कि एक लुप्त होते मुगल साम्राज्य, अशांत मध्य एशिया और पर्शिया, एक सांस्कृतिक रूप से पिछड़ने वाला ओटोमन साम्राज्य और स्पेनिश प्रभाव में अस्वीकृति से आई राजनीतिक अस्थिरता का सामना करता है। क़रार अली सूफ़ियों की पवित्र ज्यामिति में उम्मीद तलाशता है जिसके माध्यम से वह अपने जीवन के पुनर्निर्माण और प्रेम को फिर से खोजने का प्रयास करता है। सूफीवाद की विभिन्न अवधारणाओं के साथ-साथ मानवता, कला, गणित, रहस्यवाद और विज्ञान में इसके योगदान पर प्रकाश डालते हुए, यह उपन्यास एक गहरी भावुक प्रेम कहानी को भी बताता है। सूफीवाद पर एक अकादमिक कार्य के बजाय एक उपन्यास लिखने के बारे में बात करते हुए कि, लेखक मोइन मीर ने कहा: "अगर मैंने सूफीवाद पर एक अकादमिक कार्य लिखा होता, तो यह अकादमिक विद्वानों या सूफीवाद में पीएचडी करने वाले व्यक्ति तक ही सीमित होता। बहुस्तरीय कहानी और विविध दृष्टिकोणों ने इस पुस्तक को व्यापक पहुंच प्रदान की है।" सूफीवाद के उन पिलर्स के बारे में बात करते हुए, जिन्होंने उन्हें किताब लिखने के लिए प्रेरित किया, मीर ने कहा कि वे एकता और 'इश्क' के विचारों से प्रभावित थे। सूफिज्म में प्रेम के लगभग 300 स्तरित अर्थ हैं और अकादमिक रूप से इस तरह के विषय के बारे में लिखना संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि प्रेम के बारे में केवल प्रेम से ही बात की जा सकती है। नायक की आंतरिक यात्रा का वर्णन करने के लिए पुस्तक में कई 'सिम्बल' और 'मेटाफर्स' का भी उपयोग किया गया है। प्रमुख 'मेटाफर्स' में से एक 'गिरह' है - जिसका फारसी में अर्थ 'गांठ' है। इसमें केवल पांच टाइल शेप्स की व्यवस्था होती है,  जिसमें वास्तुशिल्प सजावट में डिजाइनों को बहुत बार दोहराया जा सकता है। यह इन टाइल डिजाइनों की "इंफिनिटी" है जिसका उल्लेख पुस्तक के शीर्षक द लॉस्ट फ्रैग्रेंस ऑफ इन्फिनिटी में किया गया है। गौरतलब है कि मोइन मीर, हज़रत मौदूद चिश्ती के वंशज हैं, जो चिश्ती सूफ़ी संप्रदाय के दिग्गज संस्थापकों में से एक हैं। मीर का जन्म और पालन-पोषण भारत में हुआ था और उन्होंने सूफीवाद के विद्वान, अपने दादा से प्रभावित होकर लिखना शुरू किया था। उनकी पहली पुस्तक, सूरत: फॉल ऑफ ए पोर्ट, राइज ऑफ ए प्रिंस ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी से सूरत की अपनी विरासत को पुनः प्राप्त करने के लिए उनके पूर्वजों की तलाश में एक जर्नी के बारे में थी।

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