Sunday, January 9, 2022

गंगा जन-जन की है, इसके लिए सबको मिलकर कार्य करना होगा- राजीव रंजन मिश्रा


-आईएएस एसोसिएशन, राजस्थान द्वारा आयोजन

-'गंगा - रीइमेंजनिंग, रीजूविनेटिंग, रीकनेक्टिंग' पुस्तक पर चर्चा

जयपुर। आईएएस एसोसिएशन, राजस्थान द्वारा रविवार को आईएएस लिटरेरी सोसायटी, राजस्थान के फेसबुक पेज पर लाइव बुक ऑथर कन्वर्सेशन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ आईएस अधिकारी राजीव रंजन मिश्रा एवं एनडीएमसी के वित्तीय सलाहकार पुष्कल उपाध्याय द्वारा लिखित पुस्तक -'गंगा - रीइमेंजनिंग, रीजूविनेटिंग, रीकनेक्टिंग' पर चर्चा की गई। उन्होंने आईएएस लिटरेरी सेक्रेटरी, आईएएस एसोसिएशन, राजस्थान, श्रीमती मुग्धा सिन्हा के साथ चर्चा की। कन्वर्सेशन के दौरान नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी), नमामि गंगे मिशन, गंगा पर स्वामित्व, शहरीकरण, औद्योगीकरण सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। वरिष्ठ सिविल सेवक राजीव मिश्रा ने पुस्तक लिखने के विचार पर बात करते हुए कहा कि यह पुस्तक गंगा को स्वच्छ बनाने से लेकर गंगा के कायाकल्प के दौरान आई चुनौतियों, लर्निंग्स और जर्नी को साझा करती है। उन्होंने बताया कि कैसे नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के अंतर्गत शुरू किया गया नमामि गंगे मिशन गंगा नदी को स्वच्छ करने, जीवंत करने और गंगा के कायाकल्प में बड़ी भूमिका निभा रहा है। राजीव मिश्रा ने कहा कि नदियां लोगों के स्वास्थ्य को दर्शाती है। स्वच्छ गंगा का अर्थ है स्वच्छ सभ्यता। गंगा के साथ-साथ हमें हमारे शहरों, गांवों और इलाकों को साफ रखना होगा। इसके लिए आमजन की जागरूकता जरूरी है। राजीव मिश्रा ने 11 राज्यों में मिशन पर कार्य करने के अनुभव और चुनौतियों पर बात करते हुए कहा कि हर राज्य की अपनी अलग-अलग प्रक्रिया होती है। इसमें समय और प्रोक्योरमेंट प्रोसेस सबसे बड़ी चुनौती है। आपदा प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन के विषय पर बात करते हुए मिश्रा ने कहा कि हम इंसानों को प्रकृति से सीखने की जरूरत है। हमें प्रकृति को संरक्षित और सुरक्षित रखते हुए प्रकृति के साथ रहना सीखना होगा। प्रकृति सिर्फ मनुष्यों की नहीं, इस पृथ्वी पर रहने वाले हर जीव की है। पुस्तक के सह-लेखक, पुष्कल उपाध्याय ने गंगा के स्वामित्म (ओनरशिप) के संदर्भ में बात करते हुए कहा कि गंगा नदी विभिन्न मंत्रालय और अथॉरिटीज के बीच बंटी है। सभी के अपने नियम और कार्य करने का अलग तरीका है। जिसका कोई नोडल नहीं है, इस लिए ही नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा को सेंट्रल नोडल अथॉरिटी बनाया गया। लेकिन माना जाए तो गंगा नदी हम सबकी है, जनता इसकी असली मालिक है। अगर जनता चाहे तो बदलाव लाया जा सकता है। जनता जागरूक होगी तो इस चुनौती से जीता जा सकता है। स्टेकहोल्डर्स की बात करते हुए उन्होंने कहा कि साधु-संत भी बहुत महत्वपूर्ण स्टेकहोल्डर्स हैं। इसके साथ ही उन्होंने हायब्रिड एन्यूटी मॉडल और एसटीपी पर भी चर्चा की। इस इंटरैक्टिव सेशन के दौरान दर्शकों ने प्रश्न भी पूछे और गंगा को स्वच्छ बनाने के मिशन को लेकर विभिन्न सुझाव और विचार भी साझा किए।

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