Friday, January 28, 2022

शनिवार को बिहार की ऐतिहासिक लोक कला मंजूषा पेंटिंग पर होगी वर्कशॉप



जयपुर: आर्टिस्ट कम्यूनिटी ‘द सर्किल‘ के लिये शनिवार, 29 जनवरी को दोपहर 3 बजे बिहार की ऐतिहासिक लोक कला मंजूषा पेंटिंग पर वर्कशॉप का निःशुल्क आयोजन किया जायेगा। रूफटॉप ऐप द्वारा आयोजित एवं राजस्थान स्टूडियो द्वारा प्रस्तुत इस वर्कशॉप का आयोजन आजादी का अमृत महोत्सव - सेलिब्रेटिंग इंडिया एट 75 के तहत किया जा रहा है। इस वर्कशॉप का संचालन भुवनेश्वर की कलाकार रोजाली पांडा करेंगी। मंजूषा पेंटिंग को भारतीय इतिहास में एकमात्र ऐसी कला शैली के रूप में जाना जाता है जिसमें कहानी का क्रमिक प्रदर्शन होता है। सिंधु घाटी सभ्यता में भी इस कला के ऐतिहासिक प्रमाण मिले हैं। इसे स्क्रॉल पेंटिंग भी कहा जाता है। 7वीं शताब्दी की यह आर्ट अंग प्रदेश (भागलपुर, बिहार) में बेहद लोकप्रिय है।  उल्लेखनीय है कि इस कला का उद्गम बिहुला और विषहरी की लोककथा से हुआ है। यह विषहरी पूजा के धार्मिक महत्व को भी प्रदर्शित करती है। इस पेंटिंग में पाँच प्रकार की बॉर्डर होती हैं - लहरिया, बेलपत्र, सर्प की लडी, त्रिभुज और मोखा। इसमें मुख्य रूप से तीन रंगों - गुलाबी, हरे और पीले रंग का प्रयोग किया जाता है। 

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