Thursday, January 20, 2022

राजसमन्द, मेड़ता, डेगाणा, ब्यावर और जैतारण की रेल समस्याओं पर विस्तार से चर्चा

सांसद दीयाकुमारी ने की रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात, कहा-  लंबित और नई रेल परियोजनाओं का हो निस्तारण

जयपुर।  सांसद दीयाकुमारी ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर संसदीय क्षेत्र के मेड़ता, डेगाणा, ब्यावर, जैतारण और राजसमन्द में ब्रॉडगेज, नई रेल लाइनों, यात्री सुविधाओं का विकास तथा ट्रेनों के ठहराव की मांग रखी। केंद्रीय रेलमंत्री से मुलाकात के दौरान सांसद दीया ने रेलवे की विभिन्न समस्याओं को विधानसभावार प्रस्तुत किया।
विभिन्न स्टेशनों पर ट्रेनों के ठहराव की मांग की-  
संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विधानसभा क्षेत्र डेगाना और गोटन में जैसलमेर, बाडमेर से चलकर नई दिल्ली सराय रोहिल्ला को जाने वाली मालाणी एक्सप्रेस (14661/14662) का ठहराव था। इस ट्रेन को शालीमार एक्सप्रेस (14645/14646) बनाकर जम्मूतवी तक विस्तारित किया गया परन्तु विस्तारीकरण के साथ ही इसका ठहराव गोटन और डेगाना में बंद कर दिया गया। यह क्षेत्र औद्योगिक क्षेत्र है और ठहराव बंद होने से यहां से यात्रा करने वाले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिसका ठहराव सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इसी तरह मेड़ता रोड़, ब्यावर, सेंदड़ा, रेन आदि स्टेशन पर भी विभिन ट्रेनों के ठहराव की मांग रखी।
मावली-मारवाड़ आमान परिवर्तन दो चरणों में करने की मांग-
सांसद दीयाकुमारी ने मावली-मारवाड़ रेलवे लाइन के आमान परिवर्तन की मांग रखते हुए कहा कि आगामी रेल बजट में इस कार्य को पूर्ण करने हेतु नाथद्वारा से देवगढ़ और देवगढ़ से मारवाड़ जं. नई रेल लाइन दो चरणों में बिछाने की आवश्यकता है। संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली मावली-मारवाड़ रेल लाइन के आमान परिवर्तन की मांग वर्षों पुरानी और बहुप्रतीक्षित है। वर्तमान में मेवाड़ और मारवाड़ को जोड़ने के लिए छोटी रेलवे लाइन है। इन दोनों ही क्षेत्रों में आवागमन और माल के आदान-प्रदान के लिए सड़क मार्ग का ही उपयोग करना पड़ रहा है। इन दोनों क्षेत्रों के बीच ब्रॉडगेज लाइन बिछने के बाद उद्योग जगत में खासा उछाल भी आएगा। मेवाड़ क्षेत्र का मार्बल उद्योग मारवाड़ क्षेत्र तक पहुंचेगा। वहीं मारवाड़ के उत्पाद मेवाड़ में सीधे रेलवे मार्ग के माध्यम से पहुंचेंगे। योनान्तर्गत पूर्व में रेलवे मंत्रालय ने मंजूरी प्रदान की थी, लेकिन कुछ तकनीकी कारणों से यह कार्य अधूरा रहा गया। इस मीटरगेज रेलवे मार्ग को बदलने के लिए बरसों से मांग की जा रही थी। इस रेलवे ट्रैक का आमान परिवर्तन कराने के लिए रेलवे मंडल ने कई बार सर्वे कराया है। ट्रैफिक सर्वे में रेलवे अधिकारियों ने इस मार्ग को उपयुक्त पाया है।
रेन रेलवे स्टेशन पर सुविधाएं बढ़ाने की मांग-
रेन रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्मों पर दो लिफ्ट और स्वचालित सीढ़ियों सहित एक फुट ओवर ब्रिज की आवश्यकता पर जोर देते हुए सांसद ने कहा कि यह रेलवे स्टेशन जोधपुर डिवीजन के अंतर्गत आता है तथा इस रेलवे स्टेशन के पास बुटाटी धाम स्थित है। यह धाम पूरे देश में विख्यात है और यहां देश के हर कोने से प्रतिदिन हजारों की संख्या में लकवे से पीड़ित मरीज अपनी बीमारी ठीक करवाने के लिए आते हैं। रेन रेलवे स्टेशन पर हाल ही में नया प्लेटफॉर्म बनाया गया है। इस प्लेटफॉर्म के बन जाने से अब इस स्टेशन पर दो प्लेटफॉर्म हो गए हैं। इस स्थिति में यात्रियों को एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म पर आने-जाने के लिए रेलवे लाइन को पार करना पड़ता है। रेलवे स्टेशन पर उक्त यात्री सुविधाओं के अभाव में लकवे के मरीजों तथा अन्य यात्रियों को आवागमन में असुविधा होती है।
रास-मेड़ता नई रेल लाइन की रखी मांग-
मुलाकात के दौरान सांसद ने रेलमंत्री को बताया कि प्रस्तावित नई रेल लाइन रास-मेड़ता बिछाने की आवश्यकता है। उत्तर पश्चिम रेलवे मंडल की अनुशंसा पर रेलवे बोर्ड द्वारा मेड़ता सिटी से रास तक 48.60 किमी की रेल लाइन बिछाने के लिए सर्वे कराया जा रहा है। वर्तमान में पाली जिला नागौर जिले से सीधा रेल लाइन से नहीं जुड़ा हुआ है। भविष्य में रेल लाइन बन जाए तो पाली जिला नागौर से रेल लाइन से जुड़ सकेगा। रास में सीमेंट बनाने वाली अम्बुजा, श्रीसीमेंट, अल्ट्राटेक सहित अन्य कम्पनियों के प्लांट हैं। जहां पर सैकड़ों की संख्या में श्रमिक कार्यरत हैं। कोयला सहित अन्य कच्ची सामग्री सीमेंट बनने के लिए पहुंचती है। सीमेंट बनने के बाद वह बाहर अन्य राज्यों में जाता है। इसलिए व्यावसायिक दृष्टि से रास से मेड़ता सिटी तक रेल लाइन बिछाना रेलवे के लिए उपयोगी साबित होगा।
रास-मेड़ता नई रेल लाइन बिछाने हेतु आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की
सांसद दीयाकुमारी ने रेल मंत्री से बर-बिलाड़ा और पुष्कर-मेड़ता नई रेल लाइन की भी मांग भी रखी। भेंट के दौरान केंद्रीय रेलमंत्री ने सांसद को आश्वस्त किया कि सभी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए समस्याओं के समाधान का पूरा प्रयास किया जाएगा।

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