Tuesday, January 4, 2022

मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर में इंडियन इकोनॉमिक एसोसिएशन की 103वीं और 104वीं वार्षिक कॉन्फ्रेंस शुरू

 

4 जनवरी से 6 जनवरी तक आयोजन

अर्थशास्त्रियों को जमीनी हकीकत को समझने की जरूरत - राजेंद्र सिंह यादव, उच्च शिक्षा राज्य मंत्री
जयपुर। 
राजस्थान के उच्च शिक्षा राज्य मंत्री,  राजेंद्र सिंह यादव ने मंगलवार को कहा कि देश में अर्थशास्त्रियों को हमारे गांवों और समाज के वंचित वर्गों की जमीनी हकीकत को समझने की सख्त जरूरत है। उन्होंने कहा कि कॉन्फ्रेंस और सेमिनार्स का आयोजन करना बहुत अच्छा है, जिसमें देश के आर्थिक विकास से संबंधित आंकड़ों और संख्याओं पर चर्चा की जा सके। हालांकि, यह देखा गया है कि कभी-कभी आंकड़े जमीनी हकीकत से भिन्न हो सकते हैं। अर्थशास्त्रियों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे गरीबी को कम करने व अमीरों और वंचितों के बीच के अंतर को पाटने पर ध्यान दें। मंत्री  यादव मुख्य अतिथि के रूप में मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर (एमयूजे) में इंडियन इकोनॉमिक एसोसिएशन (आईईए) के 103वें और 104वें वार्षिक कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र में बोल रहे थे। मंत्री ने आगे बताया कि राजस्थान में वर्तमान सरकार उच्च शिक्षा को एक नए स्तर पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। आज 1800 निजी कॉलेज, 300 सरकारी कॉलेज और अन्य 123 सरकारी कॉलेज पाइपलाइन में हैं। 15वें वित्त आयोग के चेयरमैन,  एन.के. सिंह ने विश्व की पुरानी व्यवस्था को नई-विश्व व्यवस्था में बदलने की बात कही। उन्होंने कहा कि यह अनिवार्य है कि संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक, आईएमएफ आदि जैसे संगठनों को हाल के समय में सामने आई नई चुनौतियों से निपटने में सक्षम होने के लिए खुद में सुधारने लाने की जरूरत है। संयुक्त राष्ट्र पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित करते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों में महामारी से निपटने के लिए उन्होंने बहुत कम काम किया है। संयुक्त राष्ट्र को जलवायु नियंत्रण, साइबर सुरक्षा, आतंकवाद, गरीबी और महामारी से संबंधित स्थितियों से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। पूर्व प्रेसिडेंट, आईईए, पूर्व चेयरमैन, यूजीसी और आईसी एसएसआर, चीफ एडिटर, आईईजे, प्रो सुखदेव थोराट ने इस तथ्य पर जोर दिया कि सामाजिक समावेशी विकास (सोशल इन्क्लूजिव ग्रोथ) आज के समय की जरूरत है। अर्थशास्त्रियों को एक ऐसी रणनीति पर काम करने की जरूरत है, जिससे सामाजिक आर्थिक विकास से यह सुनिश्चित किया जा सके कि आर्थिक विकास से गरीब लाभान्वित हों। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि 1950 और 60 के दशक में प्रति व्यक्ति आय वृद्धि आर्थिक विकास का मापडंद था। हालांकि, अब यह स्पष्ट है कि केवल आर्थिक विकास से वंचितों को लाभ नहीं होगा बल्कि अब सामाजिक समावेशी विकास पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। फाउंडर एंड चेयरमैन, केआईआईटी और केआईएसएस, भुवनेश्वर, प्रो. अच्युत सामंत ने कहा कि सरकार को शिक्षा और स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए। महामारी के दौरान किसी भी तरह की सामाजिक सुरक्षा नहीं होने के कारण दिहाड़ी मजदूरों की दुर्दशा स्पष्ट रूप से देखी जा सकती थी। उन्होंने इस तथ्य पर भी जोर दिया कि आर्थिक विकास को अब समावेशी होने के साथ-साथ न्यायसंगत भी होना चाहिए। अर्थशास्त्रियों को इस लक्ष्य की दिशा में काम करना होगा। इससे पहले, एमयूजे के कुलपति, प्रो जीके प्रभु ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि आईईए के 103वें और 104वें वार्षिक कॉन्फ्रेंस की मेजबानी करना एमयूजे के लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि अर्थशास्त्र सभी पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है और शोध के लिए एक आवश्यक मांग भी है। इस अवसर पर वाईस प्रेसिडेंट, आईईए एचओडी ऑफ इकोनॉमिक्स, वीएसएसडी कॉलेज, कानपुर, डॉ देवेंद्र अवस्थी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान मंच पर गणमान्य व्यक्तियों द्वारा इंडियन इकोनॉमिक जर्नल और आईईए मेम्बरशिप प्रोफ़ाइल-2022 का कॉन्फ्रेंस स्पेशल अंक भी जारी किया गया।
कॉन्फ्रेंस में आज ये होंगे वक्ता
कॉन्फ्रेंस में आज बीआरए यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. अशोक मित्तल, राजस्थान यूनिवर्सिटी की पूर्व कुलपति प्रो. कांता आहूजा और कुवेम्बु यूनिवर्सिटी शिमोगा के कुलपति प्रो. बीपी वीरभद्रप्पा सहित देश-विदेश के प्रतिनिधि अपनी बात रखेंगे।

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