Wednesday, December 29, 2021

डिजिटल रूपान्तरण और आर एण्ड डी से तय होगा फार्मा उद्योग का भविष्य; साइमन गालाघेर (अंतरिम), जनरल मैनेजर, Takeda भारत

एक अनुमान के मुताबिक भारत का घरेलू फार्मा बाज़ार 2021 में 42 बिलियन अमेरिकी डॉलर का है जो 2024 तक 65 बिलियन अमेरिकी डॉलर के आंकड़े तक पहुंच जाएगा और 2030 तक 120-130 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है । शोधकर्ताओं, इंजीनियरों और डॉक्टरों की बड़ी संख्या के साथ ‘दुनिया की फार्मेसी’में जीवन की गुणवत्ता में बदलाव लाने की बड़ी क्षमता है। महामारी की बात करें तो घरेलु उद्योग ने विश्वस्तरीय प्रणाली के साथ मिलकर काम किया और जानलेवा वायरस के प्रसार को रोकने तथा उपचार एवं वैक्सीन के विकास के लिए पूरी मेहनत की। हेल्थकेयर एवं फार्मा उद्योग के भविष्य के अनुमानों पर बात करते हुए साइमन गालाघेर, जनरल मैनेजर (अंतरिम), Takeda इंडिया ने कहा कि आपसी सहयोग एवं साझेदारियां फार्मा उद्योग के भविष्य को मार्गदर्शन दे सकती हैं, जो पूरे देश के स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचे में बदलाव लाने में सक्षम हैं।

साल 2022 शुरू होने वाला है, और उद्योग जगत अन्य बीमारियों के उपचार एवं इलाज विकसित करने के प्रयासों में जुटा है। इसी बीच दुर्लभ रोगों के उपचार को प्राथमिकता देने पर चर्चा बढ़ी है। आने वाले सालों में इसमें और अधिक विकास का अनुमान है।

फार्मा उद्योग के आगामी रूझानों पर बात करते हुए साइमन गालाघेर (ंअंतरिम), जनरल मैनेजर, ज Takeda भारत ने कहा, ‘‘फार्मास्युटिकल सेक्टर पिछले दो सालों के दौरान इनोवेशन और तकनीक पर ज़्यादा ध्यान दे रहा है। इस दौर में स्वास्थ्यसेवा पेशेवेरों के द्वारा हाइब्रिड मॉडल को अपनाए जाने के कारण फिजिटल (फिज़िकल एवं डिजिटल) बदलाव देखे गए। आने वाले सालों में उम्मीद की जा रही है कि उद्योग जगत की डिजिटल क्षमता बढ़ेगी और मरीज़ों की देखभाल के लिए पर्सनलाइज़्ड उपकरणों के रूप में टेक्नोलॉजी को अधिक से अधिक अपनाया जाएगा। मरीज़ों को इलाज का बेहतर अनुभव प्रदान करने के लिए वर्चुअल टूल्स में सुधार के भी अपार अवसर हैं। ऐसे में न सिर्फ कोविड-19 बल्कि अन्य बीमारियों से लड़ने के लिए भी फार्मास्युटिकल का भविष्य उद्योग जगत में अनुसंधान और विकास पर निर्भर है। इनोवेशन की क्षमता के द्वारा गुणवत्तापूर्ण देखभाल को सुलभ बनाया जा सकता है और बेहतर चिकित्सा एवं फार्मा उपकरणों के लिए मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है।’

वहीं दूसरी ओर मरीज़ों की ज़रूरतों को समझने और उपचार प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए डेटा एवं डिजिटल के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। पारम्परिक दवाओं के विपरीत आने वाले सालों में अधिग्रहीत मानव रोगों के उपचार के लिए सैल और जीन थेरेपी का महत्व बढ़ सकता है।

असंख्य आगामी थेरेपियों के बावजूद, पिछले दो सालों ने हमें सिखाया कि भारत में चिकित्सा सेवाओं के आधुनिकीकरण के लिए वंचित समुदायों को गुणवत्तापूर्ण देखभाल उपलब्ध कराना बहुत ज़रूरी है। आने वाले सालों में फार्मा कंपनियां सार्वजनिक क्षेत्र के साथ मिलकर काम करेंगी तथा जागरुकता एवं समय पर निदान जैसे पहलुओं को विशेष महत्व देंगी। साथ ही स्वास्थ्यसेवाओं संबंधी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अनुसंधान एवं इनोवेशन को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

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