Wednesday, December 22, 2021

लोकरंग में देश और प्रदेश के लोक कलाकार दे रहे रंगारंग प्रस्तुतियां




- लोकरंग उत्सव का सातवां दिन, 
- 26 दिसंबर तक चलेगा लोकरंग उत्सव - रिदम ऑफ केरल में केरल की फ्यूजन प्रस्तुति हुई

जयपुर। आजादी का अमृत महोत्सव के तहत जवाहर कला केन्द्र (जेकेके) में चल रहे 11-दिवसीय 24वें 'लोकरंग-2021' के सातवें दिन बुधवार को भी कलाकारों और दर्शकों में भरपूर उत्साह देखने को मिला। लोकरंग उत्सव में दर्शकों को राजस्थान के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों की लोक कलाओं और संस्कृतियों को देखने और जानने का अद्भुत अवसर प्राप्त हो रहा है। बुधवार को जेकेके के मध्यवर्ती में राजस्थान के नागौर के कलाकारों ने मशक वादन किया वहीं सफेद परिधान पहने कलाकारों ने बाड़मेर का प्रसिद्ध गैर नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया। छत्तीसगढ़ और झारखंड की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र थीं। छत्तीसगढ़ के कलाकारों ने पंडवाणी और झारखंड का मानभूम छउ नृत्य प्रस्तुत किया। इसके साथ ही कलाकारों ने गुजरात का रास, जम्मू-कश्मीर का रऊफ, उत्तराखंड का घसियारी, हिमाचल प्रदेश का सिरमौर नाटी, असम का बीहू और पंजाब का लुड्डी नृत्य भी प्रस्तुत किया। इस दौरान लोकरंग उत्सव के अंतर्गत रिदम ऑफ केरल के तहत केरल की लोक कलाओं की फ्यूजन प्रस्तुति हुई। इसी प्रकार से जेकेके के शिल्पग्राम में भी रंगारंग लोक प्रस्तुतियां आयोजित हुईं। जिसमें राजस्थान का बैल नृत्य दर्शकों को बहुत लुभाया। राजस्थानी कलाकारों ने विभिन्न प्रस्तुतियां दी जिनमें तेराताली, सिरोही का गरासिया, भरतपुर का भपंग वादन व भवाई नृत्य शामिल था। इसके साथ ही हरियाणा के कलाकारों ने घूमर और बीन, पंजाब के कलाकारों ने नचार, गुजरात का डांगी और असम का बारदोई शिकला प्रस्तुत किया गया। वहीं, झारखंड के उरावं नृत्य और शिकारी नृत्य और छत्तीसगढ़ के पंथी की भी प्रस्तुति हुई। लोक प्रस्तुतियों के साथ ही शिल्पग्राम में राष्ट्रीय हस्तशिल्प मेला भी चल रहा है। इस मेले में देशभर के पुरस्कृत शिल्पियों द्वारा निर्मित कलात्मक हस्तशिल्प उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई जा रही है व ब्रिकी हो रही है। विजिटर्स के लिए यह मेला 26 दिसंबर तक प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से रात 9.30 बजे तक खुला है। यह आयोजन जेकेके, कला एवं संस्कृति विभाग और रुडा (ग्रामीण गैर कृषि विकास अभिकरण) द्वारा आयोजित किया जा रहा है।  

गुरूवार, 23 दिसंबर के कार्यक्रम- 
गुरूवार, 23 दिसंबर को जेकेके के मध्यवर्ती में शाम 6.30 बजे से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होंगे। कार्यक्रम में बीहू नृत्य (असम), बोरदायी सकला (असम), लुड्डी (पंजाब), घूमर, (हरियाणा), सिरमोर नाटी (हिमाचल प्रदेश), रऊफ (जम्मू कश्मीर), छप्पेली (उत्तराखण्ड), नाचड़ (पंजाब), बीन (हरियाणा), रास (गुजरात), डांगी (गुजरात), केरल के लोक नृत्य, झारखण्ड उरावं नृत्य, मानभूम छउ नृत्य, शिकारी नृत्य, डांगडी गैर (बासंवाड़ा), खारी नृत्य (अलवर) की प्रस्तुति होगी। वहीं शिल्पग्राम में शाम 4.30 बजे से शहनाई-नगाड़ा, कच्छी घोड़ी, कठपुतली, बहुरूपिया, कालबेलिया नृत्य, जादूगर, मसक वादन (नागौर), गैर सफेद परिधान (बाडमेर), भपंग वादन (भरतपुर), तेराताली (पाली), मांड गायन की प्रस्तुति होगी।

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