Tuesday, December 7, 2021

"अपनी नीति व नियत बदले बड़े स्कूल" - विजयवर्गीय

बिड़ला, सैंट एंसेल्म एवं महेश्वरी स्कूलों पर त्वरित कार्यवाही के निर्देश

राजधानी जयपुर सहित प्रदेश के अनेक नामचीन बड़े स्कूलों द्वारा बकाया फीस के कारण मासूम विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को मानसिक प्रताड़ना देते हुए ऑनलाइन कक्षाओं से बाहर किया जाना जारी है। प्रदेश के विद्यार्थियों एवं अभिभावकों की समस्याओं के समाधान, कोरोना काल में प्रभावित व पीड़ितों को राहत की मांगों को लेकर संघर्षरत अभिभावक एकता आंदोलन राजस्थान के प्रदेश संयोजक मनीष विजयवर्गीय द्वारा शिक्षा विभाग को प्रेषित शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए संयुक्त निदेशक, स्कूल शिक्षा घनश्याम दत्त जाट ने राजधानी के तीन बड़े नामचीन विद्यालयों - सीडलिंग, रुक्मणी बिड़ला, सैंट एंसेल्म एवं महेश्वरी स्कूलों में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों तथा केंद्र व राज्य सरकार द्वारा जारी आदेशों, बोर्ड की संबद्धता एवं परीक्षा उप नियमों का पालन करवाए जाने हेतु जिला शिक्षा अधिकारी को त्वरित कार्यवाही हेतु निर्देशित राजकीय पत्र जारी किया गया है। 
हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों पर तुरंत संज्ञान-
अभिभावक एकता संघ के मीडिया कोऑर्डिनेटर हरिओम सिंह चौधरी ने बताया कि अभिभावक हेल्पलाइन लाइन 9309333662 पर पिछले 15 दिनों में 500 से अधिक अभिभावकों ने शिकायत की है, रुक्मणी बिरला के अभिभावक रवि शर्मा, सैंट एंसेल्म मानसरोवर के पंकज शर्मा एवं माहेश्वरी इंटरनेशनल स्कूल तिलक नगर के सुशील स्वामी ने दर्ज करवाई थी शिकायत।
शिक्षा मंत्री ने दिए थे कार्यवाही के निर्देश-
हाल ही सेंट्रल एकेडेमी, अंबाबाड़ी के छात्र प्रियांशु शर्मा जिसके की माता पिता का देहांत हो चुका है को बकाया फीस के कारण बोर्ड की परीक्षा में ना बिठाए जाने की शिकायत अभिभावक आंदोलन राजस्थान के संयोजक मनीष विजयवर्गीय ने शिक्षा मंत्री बीडी कल्ला से मुलाकात कर की थी एवं प्रदेश के ऐसे स्कूलों का नामजद ज्ञापन भी दिया था जिन्होंने बकाया फीस के कारण विद्यार्थियों को ऑनलाइन कक्षाओं अथवा परीक्षाओं से वंचित कर दिया था इस पर शिक्षा मंत्री ने त्वरित कार्यवाही करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी रविंद्र कुमार को तलब कर इस संबंध में सर्कुलर जारी करने के निर्देश दिए थे कि फीस विवाद में छात्र को परीक्षा में नहीं बैठाने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
मनीष विजयवर्गीय ने कहा कि जहां एक और कोरोना काल में जहां सामाजिक संगठन एवं सरकार पीड़ित एवं प्रभावितों को राहत के प्रकल्प चला रही हैं वहीं प्रदेश के अनेक नामचीन बड़े निजी स्कूल विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को राहत देने की बजाय मनमानी कर रहे हैं जमीनी हालात यह है कि शिक्षा विभाग के साथ-साथ सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की खुली अवमानना यह कर रहे हैं, मध्यम एवं निम्न तबके के विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले अधिकांश स्कूल ऐसा नहीं कर रहे आज भी कहीं ना कहीं सेवा का भाव रखते हैं परंतु तीन सितारा व पांच सितारा इमारतों के तहत व्यापार की तरह चलाए जा रहे बड़े स्कूलों ने सम्मेलनों के साथ इंसानियत को शर्मसार ही किया है यदि ऐसे स्कूलों ने अपनी नीति और नियत नहीं सुधारी तो इन्हें अपने कर्मों के परिणाम भुगतने होंगे।

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