Tuesday, December 21, 2021

लोकरंग के छठे दिन राजस्थान के स्वांग नृत्य और पंजाब के भांगड़ा पर झूम उठे दर्शक

 





- लोकरंग उत्सव का आज छठा दिन

- देश और प्रदेश के लोक कलाकार दे रहे रंगारंग प्रस्तुतियां

- 26 दिसंबर तक चलेगा लोकरंग उत्सव

- रिदम ऑफ केरला के तहत अर्जुन नृत्यम की हुई प्रस्तुति
जयपुर। 
आजादी का अमृत महोत्सव के तहत जवाहर कला केन्द्र (जेकेके) में चल रहे 11-दिवसीय 24वें 'लोकरंग-2021' के छठे दिन मंगलवार को हिमाचल, उत्तराखंड, कश्मीर, पंजाब के लोक नृत्यों ने समां बांध दिया। देश के विभिन्न हिस्सों की लोक कलाओं का दर्शकों ने भरपूर आनंद उठाया। इस दौरान जेकेके के मध्यवर्ती में गुजरात के कलाकारों ने रास व होली नृत्य (डांग) प्रस्तुत किया। वहीं हिमाचल प्रदेश का सिरमौर नाटी, उत्तराखंड का छप्पेली, कश्मीर का रऊफ नृत्य, पंजाब का भांगड़ा मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा। राजस्थान के स्वांग नृत्य (सहरिया) व तेजाजी गायन की प्रस्तुति पर दर्शक झूम उठे। इसी के साथ ही हरियाणा के कलाकारो ने घूमर और असम के कलाकारों ने बारदोई शिकला नृत्य की प्रस्तुति दी।

लोकरंग उत्सव के अंतर्गत रिदम ऑफ केरला कार्यक्रम का आयोजन हो रहा है। जिसके तहत मंगलवार को केरल का अर्जुन नृत्यम प्रस्तुत किया गया। इस कार्यक्रम के तहत 22 दिसंबर तक केरल के विभिन्न लोक संगीत और नृत्यों की प्रस्तुति दी जाएंगी।

इसी प्रकार से मंगलवार को जेकेके के शिल्पग्राम में भी रंगारंग लोक प्रस्तुतियां आयोजित हुईं। जिसमें राजस्थान के कलाकारों ने भोपा गायन, अलगोजा, राजस्थानी नृत्य व जादूगर की प्रस्तुति दी। वहीं पंजाब का नचार, राजस्थान के सिरोही का गरासिया, हरियाणा का बीन, असम का बीहू, बालोतरा का गैर आंगी नृत्य भी प्रस्तुत किया गया। लोक प्रस्तुतियों के साथ ही शिल्पग्राम में राष्ट्रीय हस्तशिल्प मेला भी चल रहा है। इस मेले में देशभर के पुरस्कृत शिल्पियों द्वारा निर्मित कलात्मक हस्तशिल्प उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई जा रही है व ब्रिकी हो रही है। विजिटर्स के लिए यह मेला 26 दिसंबर तक प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से रात 9.30 बजे तक खुला है। यह आयोजन जेकेके, कला एवं संस्कृति विभाग और रुडा (ग्रामीण गैर कृषि विकास अभिकरण) द्वारा आयोजित किया जा रहा है।
बुधवार, 22 दिसम्बर के कार्यक्रम
जेकेके के मध्यवर्ती में बुधवार को शाम 6.30 बजे से देशभर के विभिन्न हिस्सों की लोक कलाओं की रंगारंग प्रस्तुतियां होंगी। इनमें बीहू नृत्य (असम), बोरदायी सकला (असम), झूमर (पंजाब), घूमर, (हरियाणा), सिरमोर नाटी (हिमाचल प्रदेश), रऊफ (जम्मू कश्मीर), छप्पेली (उत्तराखण्ड), नाचड़ (पंजाब), बीन (हरियाणा), रास (गुजरात), डांगी (गुजरात), केरल के लोक नृत्य, झारखण्ड उरावं नृत्य, मानभूम छउ नृत्य, शिकारी नृत्य, असम के लोक नृत्य, मसक वादन, नागौर, छत्तीसगढ़ लोक नृत्य, गैर सफेद परिधान, बाडमेर प्रस्तुतियां शामिल हैं। वहीं शिल्पग्राम में शाम 4.30 बजे से शहनाई-नगाड़ा, कच्छी घोड़ी, कठपुतली, बहुरूपिया, राजस्थानी नृत्य (बूंदी), गरासिया नृत्य (सिरोही), भपंग वादन (भरतपुर), तेराताली (पाली) की प्रस्तुति होगी।

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