Tuesday, December 21, 2021

दिल्ली में हुए भव्य समारोह में जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2022 के प्रोग्राम की घोषणा


जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2022 एक हाईब्रिड अवतार में ऑन ग्राउंड और ऑफ ग्राउंड दोनों ही रूपों में होने जा रहा है| 28 जनवरी से 1 फरवरी 2022 की तारीखें ऑन ग्राउंड फेस्टिवल के लिए तय की गई हैं और 28 जनवरी से 6 फरवरी 2022, 10 दिनों तक फेस्टिवल ऑफ ग्राउंड यानी अपने डिजिटल स्वरुप में श्रोताओं से जुड़ेगा| पिछले सभी संस्करणों के तरह इस बार भी फेस्टिवल देश और दुनिया के जबरदस्त वक्ताओं, किताबों, विषयों और विचारों के साथ उपस्थित हुआ है| ‘धरती के सबसे बड़े साहित्यिक शो’ कहे जाने वाला यह फेस्टिवल पिछले दशकों में 5000 से अधिक वक्ताओं व कलाकारों की मेजबानी कर चुका है| इस साल भी 250 से अधिक वक्ता, लेखक, चिन्तक, राजनेता, पत्रकार देश-विदेश की 21 भाषाओँ का प्रतिनिधित्व करेंगे| इनमें नोबेल, बुकर, पुलित्ज़र, साहित्य अकादमी, पद्म भूषण, पद्म श्री और डीएससी प्राइस से सम्मानित व्यक्ति शामिल हैं| जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2022 प्रोग्राम का विमोचन आज दिल्ली में प्रोडूसर टीमवर्क आर्ट्स की मेजबानी में किया गया| प्रोग्राम में कला, जीवनी, बिजेनस व इकोनॉमिक्स, जलवायु परिवर्तन, करेंट अफेयर्स, खाद्य, काव्य, विज्ञान व तकनीक, आर्टिफिशल इंटेलिजेंस और लेखन प्रक्रिया जैसे विविध विषयों का समावेश रहा|   प्रोग्राम के मुख्य आकर्षणों में शामिल हैं नोबेल पुरस्कार विजेता अब्दुल रजाक गुरनाह का सत्र| गुरनाह को साहित्य के लिए वर्ष 2021 के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया; गुरनाह अफ्रीका के महान जीवित लेखकों में से एक हैं| उनका उपन्यास आफ्टरलाइव पूर्वी अफ्रीका में जर्मनी साम्राज्यी फौजों की क्रूरता की कहानी बयाँ करता है| दूसरे नोबेल पुरस्कार विजेता, डेनियल कानमन, प्रोफेसर ओलिवर सिबोनी और लीगल स्कोलर कास आर. संस्टेन के साथ मिलकर बताएँगे कि मनुष्य कोई भी फैसला लेने की जल्दी में क्यों होता है, और इसके बारे में क्या किया जा सकता है| इनका सत्र होगा ‘नॉइज़: ए फ्ला इन ह्यूमन जजमेंट’| एक अन्य सत्र में, एक और नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी और चेयेन ऑलिवर चर्चा करेंगे| ये दोनों अर्थशास्त्री, शेफ की भूमिका निभाते हुए आपको उन मज़ेदार व्यंजनों के बारे में बताएँगे, जिनका मजा उनके दोस्त, सहकर्मी और छात्र ले चुके हैं| बनर्जी की किताब कुकिंग टू सेव योर लाइफ उनके इसी रूप को दुनिया के सामने रखती है|    वर्ष 2021 का बुकर प्राइज जीत चुके लेखक डेमों गेलगट अपनी लेखन शैली, प्रेरणा और अपनी नई किताब द प्रोमिस की चर्चा करेंगे| बुकर प्राइज से सम्मानित लेखक की नई किताब आज के दक्षिण अफ्रीका की पृष्ठभूमि में सत्ता के खेल को दर्शाती है| बुकर पुरस्कार विजेता डीबीसी पिएरे का नया उपन्यास, मीनवाइल इन  डोपामिन सिटी साहित्यिक संभावनाओं की सीमाओं को दर्शाता है| उपन्यास में एक पिता तेजी से बदलती दुनिया के साथ कदमताल की कोशिश करता है, उसकी बेटी स्मार्टफोन की दुनिया से हर दिन कोई नई चुनौती उसके सामने रखती है| पिएरे इस काल्पनिक उपन्यास के माध्यम से वर्तमान की वास्तविक चुनौतियों को श्रोताओं के सम्मुख रखेंगे| ब्रिटिश लेखिका और अनुवादक डेबोरा स्मिथ अनुवादक अरुनाव सिन्हा से अनुवाद की चुनौतियों, परख और प्रतिबद्धता पर चर्चा करेंगी| कोरियाई लेखक हान कंग की किताब द वेजिटेरियन के स्मिथ द्वारा किये अनुवाद को वर्ष 2016 मैन बुकर इंटरनेशनल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था| भारतीय-अमेरिकी बिजनेसवुमन और पेप्सिको की भूतपूर्व सीईओ इंद्रा नूई का संस्मरण माय लाइफ इन फुल: वर्क, फॅमिली, एंड आवर फ्यूचर उनके सफ़र, उनकी दृढ़ता की कहानी बयां करता है| ग्लोबल बिजनेस लीडर बनने की राह में उन्होंने कई पूर्वधारणाओं और बेड़ियों को तोड़ा| लेखिका अपर्णा पिरामल राजे के साथ संवाद में नूई अपने जीवन का फलसफा ‘मकसद के साथ काम’ की महत्ता के विषय में बतायेंगी| सीमा गोस्वामी के साथ संवाद में, भारतीय लोकप्रिय अदाकारा नीना गुप्ता चकाचौंध से दूर, अपने जीवन के वास्तविक उतार-चढ़ावों को दुनिया के सामने रखेंगी| अपनी आत्मकथा सच कहूँ तो में उन्होंने अपने निजी और व्यावसायिक जीवन की कई सच्चाइयों को बयां किया है| एक अन्य सत्र में साइंस फिक्शन के सबसे महान लेखक माने जाने वाले किम स्टेनले रोबिनसन, पत्रकार और लेखक रघु कर्नाड के साथ चर्चा में एक भविष्य के बारे में बताएँगे, जो बहुत दूर नहीं है| उनके हालिया उपन्यास द मिनिस्ट्री फोर द फ्यूचर की शुरुआत भारत में चल रही असहनीय गर्म हवा से होती है| द डौन ऑफ़ एवरीथिंग मानवीय इतिहास, सामाजिक विकास की एक असाधारण तस्वीर हमारे सामने रखता है| लेखक डेविड वेनग्रो प्राचीनकाल, बर्बरता, मानवीय वृति व यूरोपियन समाज के विवाद का अध्ययन करते हैं| रेबेका रेग सायकस के साथ संवाद डेविड बताएँगे कि उस पूर्व धारणा को हिलाने वाले कौन से तत्त्व रहे| प्रोग्राम में इतिहास का नजरिया बिखेरने के लिए इतिहासकार मनु एस. पिल्लई और लेखक व राजनीतिक डॉ. शशि थरूर, लेखिका इरा मुखोती के साथ चर्चा करेंगे| भारतीय महाराजा, जो जनहित के बजाय अपनी ही अय्याशियों में मशगूल थे, वो कितनी सहजता से ब्रिटिश पंजे के तले समाते चले गए| पिल्लई की नई किताब फाल्स अलाइस: इंडिया’स महाराजा इन द ऐज ऑफ़ रवि वर्मा इसी नजरिये को विस्तार से प्रस्तुत करती है| एन एरा ऑफ़ डार्कनेस जैसी किताबों के लेखक थरूर इस विचार का मजबूती से समर्थन करते हैं| एक अन्य सत्र में पिल्लई शोधकर्ता और लेखक अनिरुद्ध कनिसेटी के साथ दक्षिण के राजाओं की विरासत पर बात करेंगे| कनिसेटी की नई किताब लॉर्ड्स ऑफ़ द डेकन: साउथ इंडिया फ्रॉम द चालुक्य टू चोला दक्षिण भारत की मध्यकालीन राजनीति और संस्कृति को दर्शाती है| फेस्टिवल के अन्य सत्र में भारतीय कला इतिहासकार, पद्मश्री और पद्म भूषण, बीएन गोस्वामी और इतिहासकार, लेखक और फेस्टिवल को-डायरेक्टर विलियम डेलरिम्पल मौजूद रहेंगे| सत्र में भारत और दक्षिण एशिया की कला पर विस्तार से चर्चा होगी| गोस्वामी की हालिया किताब, कन्वर्सेशन आर्टवर्क पर आधारित है| ब्रिटिश जीवनीकार और लिटरेरी एजेंट एंड्रू लॉनी की द माउंटबेटन एडविना और डिकी के प्रेम और जीवन की कहानी है| लॉनी ने ब्रिटिश सरकार में याचिका दायर कर माउंटबेटन से जुड़े कुछ जरूरी कागज निकलवाए,  भारत के विभाजन, नेहरु और एडविना से जुड़े कुछ नए तथ्य सामने आये| इतिहासकार और लेखक नारायणी बासु के साथ चर्चा में लॉनी इस विरासत को हमारे सामने लायेंगे| लेखिका, स्तंभकार और क्यूरेटर सुजाता प्रसाद की किताब द ड्रीम ऑफ़ रेवोलुशन: ए बायोग्राफी ऑफ़ जयप्रकाश नारायण उस व्यक्तित्व को हमारे सामने रखती है, जिसकी राजनीति में गाँधी और मार्क्स दोनों की झलक दिखाई देती है| इतिहासकार और लेखिका नारायणी बासु और दीपांकर गुप्ता के साथ चर्चा में प्रसाद उस व्यक्तित्व पर विस्तृत चर्चा करेंगे|   

दो हालिया जीवनी विनायक दामोदर सावरकर के जीवन और विरासत को सामने लाती हैं| लेखक और इतिहासकार विक्रम संपत के दो जीवनीखंड, सावरकर: इकोस फ्रॉम ए फॉरगोटन पास्ट सावरकर के समाज कार्यों पर क्रांतिकारी नजर डालती है, जिन्होंने भारत के विभाजन और आज़ादी को प्रभावित किया| पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक और लेखक उदय माहुरकर की किताब वीर सावरकर: द मैन हु कुड हैव भारतीय सुरक्षा प्रणाली में सावरकर की भूमिका पर नजर डालती है| दोनों लेखक पत्रकार मंदिरा नायर से बात करते हुए अपना नजरिया पेश करेंगे| भारतीय राजनीति के इतिहास पर बात को जारी रखते हुए अकादमिक और लेखक त्रिपुरदमन सिंह लेखिका और पत्रकार प्रज्ञा तिवारी के साथ सत्र में अपनी नई किताब नेहरु: द डिबेट्स दैट डिफाइन इंडिया पर चर्चा करेंगे| नेहरु के साथ ही उनके समकालीनों मुहम्मद इकबाल, मुहम्मद अली जिन्ना, सरदार पटेल और श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नजरिया भी प्रस्तुत करेंगे|

एक सत्र भारत और बांग्लादेश के रिश्तों पर भी आधारित होगा, जिसमें दोनों देशों की सामाजिक-राजनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक पहलु पर बात होगी| प्रसिद्ध बंगलादेशी पत्रकार महफूज़ अनम, बांग्लादेश के प्रमुख अंग्रेजी अख़बार, द डेली स्टार के संपादक रहे हैं| वो द बंगाली: ए पोर्ट्रेट ऑफ़ ए कम्युनिटी के लेखक सुदीप चक्रवर्ती के साथ चर्चा करेंगे| उनकी बातचीत में राजनीति, समाज, रिफ्यूजी, पानी, विकास आदि मुद्दे हावी रहेंगे| भूतपूर्व राजनयिक और स्तंभकार पिनाक रंजन चक्रवर्ती भी सत्र का हिस्सा रहेंगे| 

लेखक, पटकथालेखक और कार्यकर्त्ता फारुख धोंडी अपने काम के माध्यम से बहुत सी कहानियां बयां करते हैं| उनके लेखन में स्वतंत्रता पूर्व भारत, विभाजन और बहुत से महान आंदोलनों का अनुभवजनित ब्यौरा शामिल रहता है| फिल्म और थियेटर डायरेक्टर अर्घ्या लहरी के साथ चर्चा में धोंडी अपने लेखकीय जीवन से जुड़े किस्से साझा करेंगे|

कला, संस्कृति, संगीत, काव्य इत्यादि पर आधारित सत्र फेस्टिवल के कला रुझान को प्रस्तुत करेंगे| पुरस्कृत कवयित्री, लेखिका और आलोचक अरुंधति सुब्रमण्यम का लेखन समकालीन अध्यात्मिकता को समर्पित है| सुब्रमण्यम साहित्य, संस्कृति और योग पर चर्चा करेंगी| तिशानी दोशी का काव्य संकलन, ए गॉड एट द डोर, समय में गोता लगाते हुए, प्रकृति और मानवता, हीलिंग और भिन्न पड़ावों की बात करता है| सत्र ‘द ग्रेट मुग़ल एंड द मोमेंट पोर्ट्रेचर’ में कला इतिहासकार उर्सुला वीकेस, लेखिका और इतिहासकार यशस्वनी चन्द्र से उनकी हालिया किताब पर चर्चा करेंगी, जिसमें मुग़ल दरबार के माहौल पर विस्तृत रूप से लिखा गया है| संगीत प्रेमियों के लिए रेमो फ़र्नांडिस एक आइकॉन रहे हैं| उनकी निजी सफलताएँ और विफलताएं एक यादगार संस्मरण में एक तस्वीर की भांति उतर आई हैं| टीमवर्क आर्ट्स के मैनेजिंग डायरेक्टर और फेस्टिवल के प्रोडूसर, संजॉय के. रॉय से बात करते हुए, रेमो अपने सबसे बड़े प्यार: संगीत, कला और लेखन के साथ ही गोवा में गुजरे अपने बचपन को याद करेंगे| एक दूसरे सत्र में रॉय थियेटर पर्सनेलिटी डॉली ठाकोर, लेखिका और पटकथा लेखक अर्घ्या लहरी और फेमिनिस्ट, प्रकाशक और लेखिका रितु मेनन के साथ थियेटर के मैजिक पर चर्चा करेंगे|  

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