Sunday, December 26, 2021

राजस्थानी भाषा कवि सम्मेलन के साथ हुआ लोकरंग-2021 का समापन

 

- 11 दिवसीय लोकरंग उत्सव का हुआ समापन

- जेकेके में 2 दिवसीय राजस्थानी युवा लेखक महोत्सव हुआ शुरू
जयपुर।
 जवाहर कला केंद्र (जेकेके) में लोक कलाकारों के उत्सव, 24वें 'लोकरंग-2021' का समापन रविवार को राजस्थानी भाषा कवि सम्मेलन के साथ हुआ। कार्यक्रम में प्रदेशभर के विख्यात साहित्यकारों एवं कवियों ने राजस्थानी भाषा, संस्कृति और साहित्य पर अपनी-अपनी कविताओं, गीत-संगीत से दर्शकों का मन मोह लिया। यह आयोजन जेकेके के मध्यवर्ती में हुआ, जहां बड़ी संख्या में दर्शकों ने राजस्थानी भाषा में विविध शैलियों की कविता पाठ का आनंद उठाया। यह उत्सव आजादी का अमृत महोत्सव के तहत जेकेके, कला एवं संस्कृति विभाग और रुडा (ग्रामीण गैर कृषि विकास अभिकरण) द्वारा आयोजित किया गया। सम्मेलन में प्रसिद्ध कवियत्री डॉ शारदा कृष्ण ने अपनी कविता ’अणतोली घणमोली म्हांरी, बोली रा बोल अडाणै है, जिण भासा ने इतियास रच्यो, वीं री पीड़ा कुण जाणै है’’ के माध्यम से राजस्थानी भाषा की पीड़ा व्यक्त की। इसके साथ ही डॉ गजादान चारण ने ‘लाडो ऐ बातां लख लीजे’ कविता के द्वारा किशोर बेटियों को सीख देती रचना प्रस्तुत कर ‘गुड टच एवं बेड टच’ की सरस पहचान करवाई। सम्मेलन में कविताएं पढ़ने वाले अन्य कवियों में प्रह्लाद सिंह झोरड़ा, छेलू चारण छैल, अभिलाषा पारीक, राजूराम बिजारणियां, जितेंद्र निर्मोही, देवीलाल महिया, महेंद्र सिंह छायण, नहुष व्यास, प्रतिमा पुलक शामिल थीं। इसके साथ ही उत्सव के अंतिम दिन जेकेके के शिल्पग्राम में भी रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन हुआ, जिसमें प्रदेश का कलाकारों ने लोक संगीत और नृत्य की प्रस्तुति देकर समां बांध दिया। राजस्थानी कलाकारों ने पद गायन, ग्रामीण भवाई, लोक गायन के साथ लोक नृत्य प्रस्तुत किए। इसके अलावा शहनाई-नगाड़ा और बहरूपिया भी प्रस्तुत किया।  
जवाहर कला केंद्र में राजस्थानी युवा लेखक महोत्सव का हुआ आगाज़
जेकेके में जयपुर आखर के अंतर्गत राजस्थानी युवा लेखक महोत्सव का आगाज रविवार से हुआ। राजस्थानी भाषा के इस दो दिवसीय महोत्सव की शुरूआत मोहन आलोक सत्र से हुई। इस दौरान प्रसिद्ध लेखक राजेश व्यास ने संबोधित करते हुए कहा कि, "भाषा का अपना सौंदर्य होता है और हमारी भाषा किसी से कम नहीं है। जब हम स्वयं अधिक से अधिक राजस्थानी बोलेंगे, पढ़ेंगे और लिखेंगे तभी भाषा का विकास होगा और प्रभाव पड़ेगा।" वहीं पर्यटन विशेषज्ञ दुर्गा सिंह मंडावा ने कहा कि, राजस्थानी को आगे बढ़ाने के लिए हमें अपने बच्चों से भी राजस्थानी भाषा में ही संवाद करना चाहिए। इससे वह धीरे-धीरे अपनी भाषा के शब्दों का परिचय जान सकेंगे। कार्यक्रम में प्रभा खेतान फाउंडेशन की उत्तर भारत प्रभारी अपरा कुच्छल ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्रभा खेतान अपने समय की प्रतिष्ठित उद्यमी और लेखिका रही। कर्म ही जीवन है उनके इस मंत्र का पालन करते हुए प्रभा खेतान फाउंडेशन साहित्यिक, सांस्कृतिक विकास और महिला सशक्तिकरण के लिए कार्य कर रहा है। पहले सत्र में साहित्यकार डॉ सत्यनारायण, डॉ राजेश व्यास और विजय जोशी ने कविता, कहानी, गीत, बाल साहित्य, निबंध, रिपोर्ताज, उपन्यास, संस्मरण, व्यंग्य आदि पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। दूसरा सत्र डॉ शक्तिदान कविया हुआ जिसमें साहित्यकार मदन गोपाल लढ़ा, मोनिका गौर, घनश्याम दास और चेतन औचित्य ने संवाद किया। इस दो दिवसीय कार्यक्रम का समापन सोमवार 27 दिसंबर को होगा। महोत्सव के दूसरे दिन कमला कमलेश सत्र का आयोजन किया जायेगा जिसमें साहित्यकार विमला नागला, डॉ हरिमोहन सारस्वत, कुंदन माली और लेखिका संतोष चौधरी संवाद करेंगें।

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