Thursday, November 25, 2021

तंजौर पेंटिंग वर्कशॉप का होगा ऑनलाईन आयोजन

 





जयपुर: भारत की प्राचीन पारंपरिक कला शैलियों में से एक तंजौर पेंटिंग पर आधारित पेंटिंग वर्कशॉप का आयोजन राजस्थान स्टूडियो की सहायता से शुक्रवार, 26 नवम्बर को दोपहर 3 बजे किया जायेगा। भारत की आर्टिस्ट कम्यूनिटी ‘द सर्किल‘ के लिये आयोजित इस निःशुल्क वर्कशॉप का संचालन चेन्नई के प्रसिद्ध कलाकार गुरु डॉ. शिवाजी संतोष करेंगे। वर्कशॉप का आयोजन आजादी का अमृत महोत्सव - सेलिब्रेटिंग इंडिया एट 75 के तहत किया जा रहा है। कला संत के रूप में प्रसिद्ध शिवाजी संतोष दक्षिण भारत के सबसे प्रसिद्ध एवं पारंपरिक परिवार से हैं, उनके पूर्वज महान विद्वान और शिक्षाविद थे। मात्र 17 वर्ष की उम्र में इन्होंने विश्व शांति पर जोर देने के लिए 15 किमी तक चलते हुए रंगों से चित्र बना कर कीर्तिमान बनाया था। विभिन्न देशों में शिष्य एवं विद्यार्थी भारतीय पारंपरिक कला निरंतर अभ्यास करते हैं। अनुसंधान एवं कला में उनके महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए अमेरिकन तमिल विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि से भी सम्मानित किया गया है। तंजौर पेंटिंग की भौगोलिक पहचान (जियोग्रॉफिक आइडेंटिटी) भी है। तंजौर चित्रकला की मूल संरचना भित्ति-चित्रों के रूप में थी। बाद में, मराठा शासकों ने इस पेंटिंग में बहुमूल्य रत्नों और स्वर्ण का उपयोग किया। तंजौर पेंटिंग सूती कपड़े से ढके हुए लकड़ी पर बनाई जाती है। इसके ऊपर बेसिक स्केच बना कर प्राकृतिक रंगों की मदद से रेखाचित्रों को सुंदर एवं सुरुचिपूर्ण ढंग से भरा जाता है। प्राचीन काल में इसमें प्राकृतिक रंगों से पेंटिंग की जाती थी, जबकि वर्तमान में इसमें पोस्टर रंगों का उपयोग होता है।

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