Wednesday, August 25, 2021

गोदरेज लॉक्स ने ‘गोदरेज वैल्यू को-क्रिएटर्स क्लब’ की पेशकश की

मुंबई, 25 अगस्‍त, 2021: गोदरेज लॉक्‍स एंड आर्किटेक्‍चरल फिटिंग्‍स एंड सिस्‍टम्‍स (जीएलएएफएस) ने ‘गोदरेज वैल्‍यू को-क्रिएटर्स क्‍लब’ (जीवीसीसी) को लॉन्‍च किया है। जीवीसीसी आर्किटेक्‍ट्स एंड इंटीरियर डिजाइनर्स (एआईडी) कम्‍युनिटी के लिये की गई अपनी तरह की पहली अनूठी पहल है। जीएलएएफएस गोदरेज ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी गोदरेज एंड बॉयस की बिजनेस यूनिट है। यह प्रोग्राम अपने मेम्‍बर्स को खास फायदे देता है और डिजाइन-थिंकिंग पर जानकारियों के साथ सहयोग भी बढ़ाता है। इस प्रकार यह नवाचार को बढ़ावा देता है और एआईडी कम्‍युनिटी से भी अंतिम उपभोक्‍ताओं, ग्राहकों और भागीदारों के लिये सही उत्‍पादों तथा समाधानों की पेशकश के लिये इनपुट्स लेता है।

गोदरेज वैल्‍यू को-क्रिएटर्स क्‍लब प्रोग्राम का लक्ष्‍य एआईडी कम्‍युनिटी को उनकी डिजाइन सम्‍बंधी परिकल्‍पनाओं का सफल निष्‍पादन करने में सक्षम बनाना है, क्‍योंकि वे कमर्शियल स्‍पेसेस और घरों की डिजाइनिंग के समय फैसले करने की प्रक्रिया में होते हैं। जीवीसीसी प्रोग्राम के माध्‍यम से कंपनी सह-निर्माण के अवसर पैदा करना और गोदरेज लॉक्‍स एंड आर्किटेक्‍चरल फिटिंग्‍स द्वारा प्रस्‍तुत समाधानों पर जागरूकता बढ़ाना चाह रही है। यह समाधान हॉस्पिटैलिटी, हेल्‍थकेयर, कॉर्पोरेट ऑफिस, आईटी, आदि जैसे उद्योगों की जरूरतें पूरी करते हैं।

जीवीसीसी के माध्‍यम से, कंपनी एआईडी के साथ लगातार जुड़े रहकर मजबूत सम्‍बंध बनाना चाहती है। इससे सूचना का अबाध प्रवाह सुनिश्चित होगा, ताकि उनके फीडबैक को नये उत्‍पाद के विकास की योजना में शामिल किया जा सके और बाजार को प्रचलनों की बेहतर समझ मिल सके। जीवीसीसी पहल के हिस्‍से के तौर पर एआईडी कम्‍युनिटी के साथ लगातार जुड़ाव सुनिश्चित करने के लिये, गोदरेज लॉक्‍स समय-समय पर ऐसे वेबिनार्स का आयोजन करेगा, जो डिजाइन के प्रचलनों और प्रेरणाओं पर केन्द्रित होंगे और विभिन्‍न शहरों तथा उनके डिजाइन के रूझानों का ध्‍यान रखेंगे। इसके अलावा, कंपनी आर्किटेक्‍ट्स/ डिजाइनर्स के योगदान की सराहना करने के लिये एक सम्‍मान कार्यक्रम भी प्रस्‍तुत करेगी। साथ ही आर्किटेक्‍चर कम्‍युनिटी के उत्‍कृष्‍ट लोगों को सम्‍मानित करने के लिये एक वार्षिक पुरस्‍कार समारोह की स्‍था‍पना करेगी, जिसका नाम होगा ‘’द गीवीस’’।

इस प्रोग्राम को शुरू करने और एआईडी कम्‍युनिटी से जुड़ने के लक्ष्‍य से जीएलएएफएस ने ‘अनलॉकिंग फ्यूचरिस्टिक डिजाइंस’ विषय पर एक खास वेबिनार का आयोजन किया था। इस वेबिनार में ‘एनविजनिंग स्‍पेसेस इन द न्‍यू नॉर्मल’ विषय पर उसने एक पैनल चर्चा की मेजबानी भी की थी। इस वेबिनार का संचालन आर्किटेक्‍ट एंड इंटीरियर्स इंडिया की एडिटर सुमिशा गिलोत्रा ने किया था और इसमें कुछ प्रतिष्ठित पैनलिस्‍ट्स शामिल थे, जैसे गोदरेज लॉक्‍स एंड आर्किटेक्‍चरल फिटिंग्‍स एंड सिस्‍टम्‍स के ईवीपी और बिजनेस हेड श्‍याम मोटवानी, संजय पुरी आर्किटेक्‍ट्स के प्रिंसिपल आर्किटेक्‍ट संजय पुरी, सोमाया एंड कलप्‍पा कंसल्‍टेन्‍ट्स (एसएनके) की डायरेक्‍टर नंदिनी सोमाया संपत, सुमेश मेनन असोसिएट्स के फाउंडर सुमेश मेनन और रहेजा रियल्‍टी के सीईओ राम रहेजा। चर्चा इस बात पर हुई कि महामारी ने कैसे उन स्‍पेसेस की डिजाइनिंग पर ध्‍यान केन्द्रित किया है, जो लचीले हों और भविष्‍य के स्‍पेसेस की कल्‍पना में एआईडी कम्‍युनिटी के लिये असीमित संभावनाएं पेश करें।

गोदरेज वैल्‍यू को-क्रिएटर्स क्‍लब के लॉन्‍च पर अपनी बात रखते हुए, गोदरेज लॉक्‍स एंड आर्किटेक्‍चरल फिटिंग्‍स एंड सिस्‍टम्‍स के ईवीपी और बिजनेस हेड श्‍याम मोटवानी ने कहा, ‘’एआईडी कम्‍युनिटी हमारे बिजनेस का एक अभिन्‍न हिस्‍सा रही है और इसलिये उनके विकास के सफर में हमेशा उन्‍हें सहयोग देना हमारे लिये महत्‍वपूर्ण है। हम कई प्रोजेक्‍ट्स के लिये आर्किटेक्‍ट्स के साथ काम करते आ रहे हैं, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि हमने इस तरह का एक प्रोग्राम शुरू किया है। ताकि एक ही छत के नीचे उनके अनुभव और ज्ञान को इकट्ठा करके मिलकर काम किया जा सके। गोदरेज वैल्‍यू को-क्रिएटर्स क्‍लब एक पहल है, जिसके द्वारा हम अपने ब्राण्‍ड के चिंतन में अग्रणी होने और एआईडी की रचनात्‍मकता को अच्‍छी तरह से मिलाकर अपने अंतिम उपभोक्‍ताओं, ग्राहकों और भागीदारों को ज्‍यादा महत्‍व देना चाहते हैं। इस पहल के माध्‍यम से अगले 4 वर्षों में एआईडी कम्‍युनिटी के योगदान को 4 गुना बढ़ाने का लक्ष्‍य है।‘’

वेबिनार में 230+ लोगों के साथ किये गये सर्वे से पता चला कि एआईडी कम्‍युनिटी के 78% ग्राहक घरों की डिजाइनिंग के समय लॉकिंग सॉल्‍यूशंस को शामिल करने की मांग करते हैं। और तो और, एआईडी कम्‍युनिटी के 98% लोग होम डिजाइन में लॉकिंग सॉल्‍यूशंस को शामिल करना महत्‍वपूर्ण मानते हैं। किसी प्रोजेक्‍ट के सुरक्षा सम्‍बंधी उद्देश्‍यों की पूर्ति में आर्किटेक्‍ट्स और डिजाइनर्स महत्‍वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। चर्चा से मिली इन जानकारियों ने डिजाइन की जरूरतों के हिस्‍से के तौर पर सुरक्षा के महत्‍व को उजागर किया कि इससे किसी भी प्रोजेक्‍ट का महत्‍व कैसे बढ़ सकता है, खासकर न्‍यू नॉर्मल में स्‍पेसेस को डिजाइन करते समय।

संपादक के लिये टिप्‍पणी: हमारे पैनलिस्‍ट्स के कथनों के लिये कृपया परिशिष्‍ट देखें।

कथन परिशिष्‍ट

संजय पुरी- प्रिंसिपल आर्किटेक्‍ट, संजय पुरी आर्किटेक्‍ट्स, ने कहा, ‘’महामारी के कारण घरों ने वर्कस्‍टेशंस, स्‍कूल्‍स, प्‍लेग्राउंड्स का रूप ले लिया है और इसलिये उन विभिन्‍न मांगों को पूरा करना जरूरी है, जो भविष्‍य में हमारे ग्राहक स्‍पेसेस की डिजाइनिंग की परिकल्‍पना के समय कर सकते हैं। अब चूंकि हम घर पर ज्‍यादा समय बिता रहे हैं और हमें अपने परिजनों के साथ सीमित जगह को ही साझा करना है, तो हमें उपलब्‍ध जगह का इष्‍टतम उपयोग सुनिश्चित करना होगा और न्‍यू नॉर्मल में दूरदर्शी घर बनाने होंगे।‘’

सुमेश मेनन- फाउंडर, सुमेश मेनन एसोसिएट्स, ने अपनी बात रखते हुए कहा, ‘’रेसिडेंशियल स्‍पेसेस के मामले में, कोविड के बाद लोगों ने बाउंस बैक किया है और वे लक्‍जरी पर खर्च करना चाहते हैं। प्रमुख भारतीय ब्राण्‍ड्स की ओर सभी का ध्‍यान गया है और उच्‍च गुणवत्‍ता के तथा अनूठे उत्‍पादों की मांग बढ़ी है।‘’

राम रहेजा- सीईओ, रहेजा रियल्‍टी, ने कहा, ‘’आज कई ग्राहक मानते हैं कि पहले से ज्ञात भविष्‍य में उनका जीवन बहुत अलग होगा। महामारी के बाद से घरों की खरीदी में उपभोक्‍ता का व्‍यवहार डिजाइन, सुविधाओं, अतिरिक्‍त कमरों, समग्र जीवनशैली, आदि की मांगों के मामले में उल्‍लेखनीय ढंग से बदला है। कोविड-19 महामारी ने दुनियाभर के उद्योगों को म‍हत्‍वपूर्ण ढंग से बदला और प्रभावित किया है।‘’

नंदिनी सोमाया संपत, डायरेक्‍टर, सोमाया एंड कलप्‍पा कंसल्‍टेन्‍ट्स (एसएनके), ने कहा, ‘’बतौर आर्किटेक्‍ट्स और डिजाइनर्स, अब हमें जगहों और स्‍थानों के भविष्‍य की नई कल्‍पना करनी होगी। हमें इस पर भी बहुत ध्‍यान देना होगा कि न्‍यू नॉर्मल में काम करने और रहने में बदलाव के जवाब में कम्‍युनिटीज की जरूरतों को हम कैसे पूरा कर सकते हैं। यह सुनिश्चित करना महत्‍वपूर्ण है कि स्‍पेसेस सभी को सुरक्षा देने के लिये बनें या सुरक्षा के लिये अनुकूल हों। हमारा ध्‍यान अब इस पर जा रहा है कि हम टेक्‍नोलॉजी का फायदा उठाने के लिये कैसे डिजाइन कर सकते हैं और लोगों के लिये कैसे वह समग्र वातावरण बना सकते हैं, जो महामारी में खो गया था।‘’ 

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