Monday, August 30, 2021

स्पाइस मनी ने ग्रामीण भारत में 1 लाख माइक्रो-एटीएम का विशाल एटीएम नेटवर्क स्थापपित किया; भारत के लि‪ये वित्तीयय समावेशन और आर्थिक आजादी का अपना वादा पूरा किया

मुंबई, 30 अगस्‍त, 2021: भारत का प्रमुख रूरल फिनटेक स्‍पाइस मनी ग्रामीण लोगों की आर्थिक आजादी को बढ़ावा दे रहा है। इसके लि‪ये वह भारत में आर्थिक और डिजिटल समावेशन लाने के मिशन पर है। इस मिशन को और गति देने के सफर में, स्‍पाइस मनी ने आज यह घोषणा की है कि उसने ग्रामीण भारत में चल रहे 1 लाख स्‍पाइस मनी माइक्रो-एटीएम का एक विशाल एटीएम नेटवर्क स्‍थापित कर दिया है। एटीएम इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को मजबूत करना इस सफर में उसका एक महत्‍वपूर्ण कदम है और 1 लाख का आंकड़ा छूना एक उल्‍लेखनीय उपलब्धि है। देश में अब तक किसी बैंक द्वारा इंस्‍टॉल किये गये पारंपरिक एटीएम की अधिकतम संख्‍या लगभग 60,000 है। इसलिये स्‍पाइस मनी देश का सबसे तेजी से बढ़ रहा माइक्रो-एटीएम नेटवर्क है। स्‍पाइस मनी के माइक्रो-एटीएम नेटवर्क पर मासिक आधार पर 1000 करोड़ रूपये से ज्‍यादा के ट्रांजैक्‍शंस होते हैं।

वर्ष 2021 में भारत में पारंपरिक बैंकिंग बंद हो गई थी और इम्‍पीरियल बैंक ऑफ इंडिया अकेली बैंक थी, जो भारतीयों को सेवाएं दे रही थी। तब से अब तक भारत ने एक लंबा सफर तय किया है। 1950 के दशक में निजी कंपनियों के खुलने से लेकर आज वैश्विक बैंकिंग तथा फिनटेक की क्रांति के अग्रणियों में से एक बनने तक। बीतते वर्षों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों की बैंकिंग तक पहुँच बेहतर हुई है, लेकिन वर्ष 2019 में 6 लाख में से केवल 5% गाँवों में वाणिज्यिक बैंक की शाखा थी। विश्‍व में भारत के समकक्ष देशों से तुलना करें, तो भारत उन देशों में शामिल है, जहाँ दुनिया में एटीएम की पहुँच सबसे कम है। भारत में लगभग 650,000 गाँव हैं, लेकिन 10 गाँवों में तो केवल एक ही एटीएम है। भारत की 65% से ज्‍यादा आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है, लेकिन देश के ग्रामीण क्षेत्रों में भारत के केवल 20% एटीएम हैं। इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर का खर्च, जागरूकता की कमी के कारण कम इस्‍तेमाल, बिजली का लगातार उपलब्‍ध न रहना, चोरी, गुंडई, यह ग्रामीण क्षेत्रों में एटीएम संचालकों के लिये बड़ी बाधाओं में से कुछ हैं। यह चुनौतियाँ ग्रामीण आबादी को बैंकिंग की मूलभूत सुविधाएं देने की गति को धीमा कर रही हैं।

ग्रामीणों की आय बढ़ रही है, इसलिये ग्रामीण भारत में बैंकिंग सेवाओं की मांग भी तेज हो रही है। भारत का डिजिटल फुटप्रिंट बढ़ रहा है, जिससे डिजिटल बैंकिंग सॉल्‍यूशंस मिल रहे हैं, जो बैंक से कम सेवा प्राप्‍त या बैंक-रहित ग्रामीण क्षेत्रों को बैंकिंग सिस्‍टम के मानचित्र पर लाते हैं। ग्रामीण आर्थिक नेटवर्क में टेक्‍नोलॉजी को एकीकृत करने वाली कंपनी के तौर पर स्‍पाइस मनी अपने अधिकारियों (बैंकिंग अभिकर्ताओं), नजदीकी किराना स्‍टोर्स/ स्‍टेशनरी दुकानों या लोगों को इंटरनेट से सशक्‍त कर रही है, ताकि वे स्‍पाइस मनी के माइक्रो-एटीएम से जुड़ सकें। इस प्रकार वे अपने बिजनेस को ‘स्‍पाइस मनी डिजिटल दुकान’ में बदल सकते हैं और अपने स्‍थानीय समुदायों के लिये नगद निकासी ओर जमा जैसी जरूरी बैंकिंग सेवाओं की पेशकश कर सकते हैं। खासकर महामारी के बाद लगे लॉकडाउन के दौरान, माइक्रो एटीएम ने नगद निकासी और अन्‍य जरूरी सेवाओं से लोगों की सहायता की थी। फरवरी 2020 में स्‍पाइस मनी के माइक्रो-एटीएम नेटवर्क में 18,000 से ज्‍यादा एटीएम थे, जो कई गुना बढ़कर आज 1 लाख से ज्‍यादा हो गये हैं। कंपनी 7 लाख से ज्‍यादा अधिकारियों के अपने नेटवर्क से भारत के 95% ग्रामीण पिनकोड्स को कवर करती है। कंपनी देश के आर्थिक रूप से कम सेवा प्राप्‍त और नगदी से चलने वाले भागों में माइक्रो-एटीएम की पहुँच को बढ़ाती जा रही है। 

स्‍पाइस मनी के चीफ एक्‍जीक्‍यूटिव ऑफिसर संजीव कुमार ने कहा, ‘’अपनी संस्‍थापना के बाद से ही स्‍पाइस मनी का मिशन भारत की ग्रामीण आबादी के वित्‍तीय समावेशन पर केन्द्रित रहा है। इस प्रकार एंड यूजर्स और हमारे ग्रामीण उद्यमियों, यानि अधिकारियों की आर्थिक आजादी में बढ़त होती है। यह भारत की स्‍वतंत्रता का 75वां वर्ष हैं। ऐसे अवसर पर हम अपना वादा निभाते हुए इस महत्‍वपूर्ण वर्ष का जश्‍न  मनाकर खुश हैं।‘’

संजीव ने आगे कहा, ‘’मार्च 2021 के अंत तक, भारत के पास 1.3 अरब से ज्‍यादा आबादी के लि‪ये केवल 2.39 लाख एटीएम थे। यह संख्‍या अर्द्ध-शहरी और ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था की जरूरतों को पूरा करने में हमारे देश में एटीएम इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर की कमी दर्शाती है। ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था तो जन धन खातों के माध्‍यम से होने वाले डायरेक्‍ट बेनेफिट ट्रांसफर के कारण वृद्धि कर रही है। लेकिन कई मामलों में, इन भागों में एटीएम नेटवर्क छोटा हुआ है और नगदी से प्रचुर इस अर्थव्‍यवस्‍था को डिजिटल आर्थिक सेवाओं तक कम पहुँच के कारण संघर्ष करना पड़ा है। यह देश में आर्थिक समावेश के लि‪ఀये एक बड़ी बाधा है। स्‍पाइस मनी देश के हर कोने में माइक्रो-एटीएम नेटवर्क के विस्‍तार हेतु लगातार काम कर रहा है, ताकि आर्थिक और डिजिटल सशक्तिकरण हो सके और ग्रामीण ग्राहकों को अपना पैसा मिले और आर्थिक आजादी भी। एक लाख एटीएम का मजबूत नेटवर्क स्‍थापित करना हमारे लिये ऐतिहासिक उपलब्धि है और हम अपनी पहुँच को बढ़ाना तथा ज्‍यादा से  ज्‍यादा ग्रामीण ग्राहकों की आर्थिक जरूरतें पूरी करने में सहयोग देना जारी रखेंगे।‘’

स्‍पाइस मनी के ब्राण्‍ड एम्‍बेसेडर और एडवाइजरी बोर्ड मेम्‍बर सोनू सूद ने कहा, ‘’मैं वृद्धि के ज्‍यादा अवसरों के साथ छोटे व्‍यवसायों को सहयोग देता आ रहा हूँ, ताकि वे फले-फूलें और उस स्‍थानीय समुदाय को भी फायदा पहुँचायें, जहाँ वे काम करते हैं। स्‍पाइस मनी माइक्रो एटीएम ऐसे छोटे कारोबारियों के लिये परफेक्‍ट है, जो अब अपने बिजनेस को बिना खर्च ‘स्‍पाइस मनी डिजिटल दुकान’ में बदल सकते हैं और अपने ग्राहकों को जरूरी बैंकिंग प्रोडक्‍ट्स की अतिरिक्‍त सेवा दे सकते हैं। माइक्रो-एटीएम ग्रामीण भारत में नजदीकी किराना स्‍टोर्स को बैंकिंग ट्रांजैक्‍शंस की सुविधा देकर आर्थिक सेवाओं की कमी को पूरा करने की महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।‘

इस साल, इससे पहले भी स्‍पाइस मनी ने एक पहल की थी और बिना किसी खर्च के, कंपनी के माइक्रो-एटीएम डिवाइसेस की पेशकश की थी। यह वित्‍तीय समावेशन के उसके सपने को पंख देने और एक विशाल एटीएम नेटवर्क बनाने में अधिकारियों की सहभागिता को प्रोत्‍साहित करने के लिये था। मई 2021 में, स्‍पाइस मनी पहली कंपनी बनी, जिसने भारत के अंतिम गाँव चितकुल में एटीएम लगाया। चितकुल हिमाचल प्रदेश में स्थित है, जहाँ केवल दो किराना स्‍टोर्स हैं। उनमें से एक किराना स्‍टोर माइक्रो-एटीएम लगने के बाद ‘स्‍पाइस मनी डिजिटल दुकान’ में बदल गया। इससे पहले, चितकुल के निवासियों के लिये सबसे नजदीकी एटीएम 25 किलोमीटर दूर सांगला में था। स्‍पाइस मनी की योजना अपने माइक्रो एटीएम नेटवर्क से इस प्रकार के और भी सुदूर क्षेत्रों को कवर करने की है।

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