Wednesday, July 7, 2021

एनटीपीसी ने मिडल ईस्ट देशों एवं अन्य क्षेत्रों में फ्लाई ऐश की बिक्री के लिए ईओआई आमंत्रित की

नई दिल्ली, 7 जुलाई, 2021ः भारत की सबसे बड़ी एकीकृत विद्युत उत्पादक कंपनी, एनटीपीसी लिमिटेड ने फ्लाई ऐश की 100 फीसदी उपयोगिता को सुनिश्चित करने के लिए मिडल ईस्ट एवं अन्य क्षेत्रों के निर्धारित बंदरगाहों से फ्लाई ऐश की बिक्री हेतु ईओआई (एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट) आमंत्रित की है। 

निविदा के लिए आवेदन की शुरूआत 1 जुलाई 2021 से हुई, जो 25 जुलाई 2021 तक चलेगी। 

एनटीपीसी ऐश के सतत एवं पूर्ण उपयोग के लिए स्थायी समाधान सुनिश्चित करना चाहती है। कोयले से विद्युत उत्पादन के दौरान फ्लाई ऐश का निर्माण उप-उत्पाद के रूप में होता है। इस तरह एनटीपीसी में उत्पन्न फ्लाई ऐश का उपयोग ईंटों/ ब्लॉक्स/टाईलों के लिए सीमेंट, कॉन्क्रीट, कॉन्क्रीट उत्पादों, सैल्युलर कॉन्क्रीट उत्पादों के निर्माण में किया जा सकता है। 

एनटीपीसी लिमिटेड ने फ्लाई ऐश की आपूर्ति के लिए देश भर के सीमेंट निर्माताओं के साथ साझेदारी की है। यह विद्युत उत्पादक कंपनी किफ़ायती एवं पर्यावरण-अनुकूल तरीकों के साथ फ्लाई ऐश के स्थानान्तरण के लिए भारतीय रेलवे के विस्तृत नेटवर्क का उपयोग कर रही है। 

निर्माण कार्य में फ्लाई ऐश से बनी ईंटों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एनटीपीसी ने कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट्स में फ्लाई ऐश ब्रिक मैनुफैक्चरिंग प्लांट्स (ईंट निर्माण संयंत्र) की स्थापना की है। इन ईंटों का उपयोग खासतौर पर प्लांट्स एवं टाउनशिन निर्माण गतिविधियों में किया जाता है। हर साल एनटीपीसी के अपने फ्लाई ऐश ब्रिक प्लांट्स में फ्लाई ऐश से औसतन 60 मिलियन ईंटें बनाई जाती हैं। 

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के निर्देशानुसार, एनटीपीसी कुल फ्लाई ऐश का कम से कम 20 फीसदी हिस्सा फ्लाई ऐश ईंट/ब्लॉक्स/टाईल निर्माताओं के लिए बचा कर रखती है और उन्हें निःशुल्क फ्लाई ऐश उपलब्ध कराती है। एनटीपीसी में उत्पन्न कुल फ्लाई ऐश का तकरीबन 9 फीसदी हिस्सा हर साल फ्लाई ऐश ईंटों/ब्लॉक्स एवं टाइलों के निर्माण में काम में लिया जाता है। 

इसके अलावा, साल 2020-21 के दौरान एनटीपीसी के लगभग 15 स्टेशनों ने कई सड़क परियोजनाओं के लिए फ्लाई ऐश की आपूर्ति दी और इसके साथ ऐश की उपयोगिता 20 मिलियन टन के आंकड़े को पार कर गई। पिछले पांच सालों के दौरान देश में फ्लाई ऐश की उपयोगिता 80 फीसदी तक बढ़ी है। 

 



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