Thursday, July 8, 2021

ट्रांसयूनियन सिबिल और सीएससी पार्टनरशिप का पहला साल, 1.5 लाख उपभोक्ता ने उठाया फायदा

मुंबई, 08 जुलाई,  2021- ट्रांसयूनियन सिबिल और डिजिटल इंडिया के कॉमन सर्विस सेंटर्स (सीएससी) ने साझेदारी के पहले वर्ष में 150,000 से अधिक उपभोक्ताओं को अपने सीआईबीआईएल स्कोर और क्रेडिट रिपोर्ट तक आसान पहुंच दी, खासतौर पर ग्रामीण भारत के लोगों को। जुलाई 2020 में घोषित हुई हमारी साझेदारी उपभोक्ताओं को कॉमन सर्विस सेंटर्स (सीएससी) पर उनके सिबिल स्कोर और रिपोर्ट की जांच करने में मदद करती है।

ग्रामीण भारत में उपभोक्ता जागरुकता व भरोसे को मिला बढ़ावा

ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में क्रेडिट जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से, अपने सिबिल स्कोर व सीएससी क्रेडिट रिपोर्ट देखने वाले 72 फीसदी उपभोक्ता नाॅन-टियर 1, 2 और 3 शहरों से थे। समूचे भारत के लिए की गई इस साझेदारी में देखा गया कि अपने सिबिल स्कोर व सीएससी क्रेडिट रिपोर्ट की जांच करने वाले सबसे अधिक उपभोक्ता उत्तर-क्षेत्र (33 फीसदी) से थे, जबकि पूर्व, पश्चिम और दक्षिण क्षेत्रों से क्रमशः 27 फीसदी, 25 फीसदी और 15 फीसदी उपभोक्ता थे।

जबकि इन उपभोक्ताओं में से 81 फीसदी का 3 अंकों का संख्यात्मक सिबिल स्कोर था, वहीं 18 फीसदी सिबिल स्कोर के लिए पात्र नहीं थे क्योंकि कंज्यूमर ब्यूरो पर उनका कोई क्रेडिट इतिहास नहीं था। इसके अतिरिक्त, जो लोग 3-अंकीय सिबिल स्कोर के लिए पात्र थे, उनमें से 62 फीसदी का स्कोर 720$ था; 18 फीसदी का स्कोर 680-719 के बीच था और 20 फीसदी का स्कोर 300 और 679 के बीच था। औसत सिबिल स्कोर 721 था।

जनसांख्यिकीय विश्लेषण से पता चला कि इनमें से 68 फीसदी उपभोक्ता मिलेनियल्स (जन्म 1982 - 1996) थे, 22 फीसदी नाॅन-मिलेनियल्स थे (इसमें जनरेशन एक्स व इससे बड़े शामिल हैं), जबकि 9 फीसदी जनरेशन जेड (1996 के बाद पैदा हुए) थे।

आत्मविश्वास के साथ लेनदेन कर सकते हैं सशक्त हुए उपभोक्ता

इस अग्रणी सहयोग ने उपभोक्ताओं को उनके क्रेडिट प्रोफाइल तक पहुंचने, अपने सिबिल स्कोर और क्रेडिट रिपोर्ट के महत्व को समझने में सक्षम बनाया है और उन्हें औपचारिक ऋण अवसरों का उपयोग करने के लिए सशक्त बनाया है। राज्य-स्तरीय डेटा विश्लेषण ने संकेत दिया कि इस सुविधा का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं की सबसे अधिक संख्या उत्तर प्रदेश (16 फीसदी) से आई, इसके बाद महाराष्ट्र (12 फीसदी) और हरियाणा (7 फीसदी) का स्थान रहा।

क्रेडिट प्रोफाइल जागरुकता से सिबिल स्कोर में आता है आनुपातिक सुधार

इन निष्कर्षों पर बोलते हुए ट्रांसयूनियन सिबिल की वाइस प्रेसिडेंट और हेड, डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर इंटरएक्टिव, सुजाता अहलावत ने कहाः ‘ट्रांसयूनियन सिबिल और सीएससी देश भर में प्रत्येक उपभोक्ता के वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए ऋण जागरूकता बनाने पर केंद्रित हैं। इस सहयोग के माध्यम से हमारा लक्ष्य क्षेत्रीय और ग्रामीण क्षेत्रों में अंतिम छोर तक के उपभोक्ताओं तक पहुंचना है, जिससे उन्हें उनके स्थानीय सीएससी पर उनके सिबिल स्कोर और क्रेडिट रिपोर्ट तक आसान पहुंच प्रदान की जा सके। संचालन के केवल एक वर्ष के भीतर हमने उपभोक्ता जागरूकता में वृद्धि देखी है और साथ ही हम देख रहे हैं कि उपभोक्ता इन अवसरों का उपयोग अपनी वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कैसे कर रहे हैं।’

निष्कर्षों से पता चलता है कि उपभोक्ताओं ने अपने सिबिल स्कोर और क्रेडिट रिपोर्ट की जांच के छह महीने के भीतर अपने क्रेडिट प्रोफाइल को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया है, जिसमें 44 फीसदी उत्तरदाताओं ने अपने सिबिल स्कोर में सुधार दिखाया है, 46 फीसदी ने अपने स्कोर में 20 से अधिक अंकों का सुधार किया है। ऋण व्यवहार में यह सुधार उपभोक्ताओं को ऋण के प्रति सचेत आदतों को अपनाने में मदद करता है जैसे कि समय पर अपनी किश्त का भुगतान करना, कर्ज के अवसरों का लाभ उठाना और अपनी क्रेडिट रिपोर्ट की निगरानी करना और नियमित रूप से स्कोर करना।

यह इंगित करता है कि अपने स्कोर तक पहुंचने वाले उपभोक्ताओं का एक बड़ा प्रतिशत अपने क्रेडिट प्रोफाइल के महत्व और ऋण तक पहुंच प्राप्त करने में उनके सिबिल स्कोर और क्रेडिट रिपोर्ट की भूमिका से अवगत है। जानता है कि इसे सुधारना व्यापक वित्तीय अवसरों को जन्म दे सकता है।

अपने क्रेडिट प्रोफाइल की जांच के 90 दिनों के भीतर उपभोक्ताओं द्वारा की गई कार्रवाई पर नजर डालने से पता चला कि सभी उपभोक्ताओं में से 26 फीसदी ने एक नई क्रेडिट लाइन के लिए आवेदन किया, जबकि उनमें से 39 फीसदी ने ऋण या क्रेडिट कार्ड के लिए पूछताछ की।

उत्पाद प्रकार के आधार पर अंतर्दृष्टि से पता चलता है कि सभी आयु समूहों और क्षेत्रों में व्यक्तिगत ऋण और उपभोक्ता-टिकाऊ ऋण की मांग सबसे अधिक है।

सुजाता बताती हैं, ’ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ताओं द्वारा प्राप्त किए जा रहे ऋण का प्रकार उनकी बदलती जरूरतों और आवश्यकताओं को प्रदर्शित करता है। यह डेटा भारत के क्रेडिट बाजार के विकास को भी दर्शाता है जो अब सुरक्षित और असुरक्षित दोनों उत्पादों में, यहां तक कि नाॅन-टियर 1,2 और 3 शहरों, कस्बों और गांवों में भी विभिन्न ऋण अवसरों तक पहुंच प्रदान करता है।’

ऋण गतिविधि में वृद्धि, वित्तीय कल्याण का संकेतक

सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया के एमडी डॉ दिनेश त्यागी ने जमीनी स्तर पर ऋण जागरूकता में देखी गई वृद्धि पर टिप्पणी करते हुए कहाः ‘ग्रामीण समुदायों में क्रेडिट हेल्थ के बारे में कम जागरूकता चिंता का कारण रही है। ये उपभोक्ता अच्छे सिबिल स्कोर के साथ आने वाले वित्तीय अवसरों का लाभ उठाएं। हमारे संयुक्त प्रयास का उद्देश्य इस अंतर को पाटना और ग्रामीण उपभोक्ताओं को वित्तीय रूप से आश्वस्त करना, कर्ज लेकर अपने हालात सुधारने में मदद करना है। हमारी साझेदारी का सुफल मिलता देख हमें प्रसन्नता है।’

अंत में सुजाता ने कहा, ‘ऋण जागरूकता बढ़ने से ऋण से जुड़ा व्यवहार सकारात्मक होता है क्योंकि उपभोक्ता अपने सिबिल स्कोर और वित्त तक पहुंच पाकर अपनी ऋण गतिविधि पर प्रभाव को समझते हैं। कई क्रेडिट संस्थान बेहतर नियमों और शर्तों की पेशकश करते हैं और उच्च सिबिल स्कोर वाले उधारकर्ताओं के लिए ब्याज की कम दरों की पेशकश करते हैं, उपभोक्ताओं के लिए स्वस्थ क्रेडिट प्रोफाइल की निगरानी और रखरखाव करना फायदेमंद होता है। ट्रांसयूनियन सिबिल यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि प्रत्येक उपभोक्ता का बाजार में मजबूत और सुरक्षित प्रतिनिधित्व किया जाए ताकि वे आर्थिक अवसरों तक आसानी से पहुंच सके।

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