Sunday, March 21, 2021

डाॅ. शकुंतला सरूपरिया होंगी ’आखर’ श्रंृखला में रूबरू



जयपुर: प्रभा खेतान फाउण्डेशन द्वारा ग्रासरूट मीडिया फाउण्डेशन के सहयोग से राजस्थानी साहित्य, कला व संस्कृति से रूबरू कराने के उद्देश्य से ’आखर’ नाम से आयोजित नियमित पहल के अंतर्गत इस रविवार, 21 मार्च को राजस्थानी भाषा की साहित्यकार डाॅ. शकुंतला सरूपरिया से उनके कृतित्व व व्यक्तित्व पर चर्चा की जायेगी। उनके साथ संवाद अभिलाषा पारीक करेंगें। श्री सीमेंट द्वारा समर्थित इस कार्यक्रम को डिजीटल प्रारूप में ‘आखर राजस्थान‘ के फेसबुक पेज से सुबह 11 बजे लाईव किया जायेगा। इससे पूर्व आखर कार्यक्रम में प्रतिष्ठित राजस्थानी साहित्यकारों डॉ. आईदान सिंह भाटी, डॉ. अरविंद सिंह आशिया, रामस्वरूप किसान, अंबिका दत्त, मोहल आलोक, डाॅ राजेश कुमार व्यास, कमला कमलेश, भंवर सिंह सामौर और डाॅ. गजादान चारण के साथ चर्चा की जा चुकी हैं।

डाॅ. शकुंतला सरूपरिया एक परिचय: 

3 अगस्त, 1964 को जयपुर में जन्मीं डाॅ. शकुंतला सरूपरिया राजस्थानी और हिन्दी के जानी-मानी कवियत्री और साहित्यकार हैं। इन्होंने राजस्थानी फिल्मों में भी अपने अभियन का लौहा मनवाया है। प्रसिद्ध राजस्थानी फिल्म ‘देवा’ के लिए गीत लेखन एवं राजस्थानी फिल्म ‘जियो म्हारा लाल’ में भूमिका का निर्वहन किया है। इनकी राजस्थानी में ‘हिवड़ा रो हेलो’ और हिन्दी में ‘कहानियों सी बेटियां’ पुस्तकें प्रकाशित हुई है। डाॅ. सरूपरिया को सन् 2021 में राष्ट्र भाषा हिदीं प्रचार समिति श्रीडूंगरगढ़ से ‘राजस्थली अलंकरण’ पुरस्कार तथा ‘सुमधुर‘ साहित्यिक संस्था की ओर से ‘श्रेष्ठ कवि’ जैसे पुरस्कारों द्वारा सम्मानित किया गया है। इनकी दूरदर्शन, आकाशवाणी एवं विभिन्न चैनलों पर राजस्थानी और हिंदी कार्यक्रमों में काफी भागीदारी रही है। डाॅ. शकुंतला सरूपरिया वर्तमान में राजस्थान सरकार के सहकारिता विभाग में कार्यरत हैं।


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