Monday, March 8, 2021

बिचौलिया रहित बिक्री पद्धति किसानों तथा देश को समर्पित



राजस्थान कै जयपुर में रहने वाले अनीष कुमार ने किसान आंदोलन के सौ दिन पूरे होने के उपलक्ष्य में किसानों के लिए बिचौलिया रहित बिक्री पद्धति ईजाद कर देश को समर्पित करते हुए दावा किया है कि इस पद्धति से देश ही नहीं अपितु पूरे विश्व के किसानों के आर्थिक उन्नति में कायापलट हो जाएगी तथा उनकी आर्थिक क्षमता पचास प्रतिशत बढ़ जाएगी .उन्होंने दावा किया कि इसी पद्धति को उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं को बताया था तथा संसदीय चुनावों में राहुल गांधी ने केन्द्र मे सरकार आने पर इसी पद्धति के तहत किसानों के उत्पाद को किसानों से सीधे ग्राहकों तक पहुँचाने के लिए हवाई मार्ग द्वारा माल ढुलाई की व्यवस्था की घोषणा की थी जिसे राजनीतिक प्रतिद्वन्द्विता तथा पद्धति को पूरी तरह समझ नहीं पाने के कारण भाजपा नेताओं ने खिल्ली में उड़ा दिया था. इस पद्धति में देश के किसी भी कोने में बैठा हुआ ग्राहक देश के अन्य कोने पर बैठे हुए किसान से किसी भी मात्रा में तय क़ीमत के आधार पर अब सीधे क्रय कर सकेगा. इस व्यवस्था के चलते पूरे देश में लगभग 20 लाख लोगों को सीधे रोज़गार मिलेगा तथा प्रसंस्करण एवं भंडारण के क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन होगा . अनीष कुमार ने किसान आंदोलन के लिए इस फ़ॉर्मूले को रामबाण बताते हुए कहा है कि इस फ़ॉर्मूले के तहत किसानों से उत्पाद ख़रीदने वाले हर प्रकार के बिचौलिए ग्राहक और किसान के बीच से समाप्त हो जाएंगे सिर्फ़ वे बिचौलिए रहेंगे जो किसान से उत्पादन लेकर उसका रूप बदलकर बाज़ार में उतारना चाहेंगे जैसे कि गेहूं ख़रीद कर आटा बनाकर बेचने वाले ,सरसों ख़रीद कर उसका तेल निकाल कर बाज़ार में बेचने वाले ,टमाटर ख़रीद कर उसका सोस बनाकर बाज़ार में बेचने वाले .यही नहीं इस प्रकार की कंपनियां भी बिना बिचौलिए के देश के किसानः से किसी भी क्षेत्र में बैठकर ख़रीद कर सकेंगे . अनीष कुमार ने कहा हे कि इस पद्धति को ईजाद करने के लिए उन्होंने लगभग ढाई वर्ष अध्यन -मनन किया है ,यही नहीं अन्य कई क्षेत्रों में भी इस प्रकार की योजनाएं उन्होंने तैयार की हुई है जो समय आने पर देश को समर्पित होगा. अनीष कुमार ने कहा कि मीडिया के द्वारा किसानों के हित में बनी यह पद्धति देश को समर्पित होने के बाद वे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तथा भारत के सभी प्रान्तों के मुख्यमंत्रियों , किसान नेताओं को पत्र लिखकर इस योजना को लागू कर किसानों को मदद करने की माँग उठाएंगे इस बाबत वे नि शुल्क मदद करने के लिए भी तैयार हैं. किसान आंदोलन के सौ दिन पूरे हो चुके हैं एक ओर जहाँ सरकार उद्योगपतियों को ग्राहकों और किसानों के बीच में से हटाने के लिए तैयार नहीं है वहीं किसान तीनों कानूनों को रद्द करने के लिए अड़े हुए हैं ऐसे में इस पद्धति का सामने आना देश के लिए तथा देश की राजनीतिक व्यवस्था, आर्थिक व्यवस्था को विश्वस्तरीय बनाने में कितना कारगर होगा यह आने वाले समय में देखने को मिलेगा.

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