Friday, February 5, 2021

गोदरेज इंटेरियो ने ‘टू साइड्स ऑफ ऑनलाइन टीचिंग’ श्‍वेतपत्र जारी किया

जयपुर 05 फरवरी 2021  – गोदरेज इंटेरियो, जो भारत का अग्रणी फर्नीचर समाधान ब्रांड है, ने आज अपना विशेष श्‍वेतपत्र – टू साइड्स ऑफ ऑनलाइन टीचिंग (ऑनलाइन अध्‍यापन के दो पहलू) जारी किया। महामारी के चलते शिक्षा का माध्‍यम ऑनलाइन हो चुका है। ऑनलाइन शिक्षा की प्रगतियों, इसके फायदों व नुकसानों, घर से पढ़ाने वाले शिक्षकों की जीवनशैली पर पड़ने वाले प्रभावों के निहितार्थ के अध्‍ययन के लिए, गोदरेज इंटेरियो के वर्कस्‍पेस एंड अर्गोनॉमिक रिसर्च सेल ने देशव्‍यापी अध्‍ययन किया। इस अध्‍ययन में विभिन्‍न निजी, सरकारी और अर्द्ध-सहायताप्राप्‍त शिक्षण संस्‍थानों के 300 से अधिक शिक्षकों के विचारों को शामिल किया गया।

चूंकि शिक्षक घर के अधिक नियंत्रित एवं सुरक्षित वातावरण से काम करते हैं, इसलिए उनका न केवल आवागमन का समय बचता है बल्कि उन्‍हें अपने परिवार के साथ अधिक समय बिताने का अवसर भी मिलता है। शिक्षकों को उनकी डिजिटल जानकारी को बढ़ाने का मौका मिलता है और वो अपनी वर्चुअल कक्षा पर बेहतर नियंत्रण रखने के साथ-साथ संसाधनों का श्रेष्‍ठतम उपयोग करते हैं।

हालांकि, ऑनलाइन पढ़ाई की अपनी चुनौतियां भी हैं। शोध से यह खुलासा हुआ कि 39.3 प्रतिशत शिक्षकों को औपचारिक तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्‍त है, जबकि 21.4 प्रतिशत को यह प्रशिक्षण प्राप्‍त नहीं है; लगभग 39.3 प्रतिशत स्‍वयं से सीखे हैं।

किसी भी प्रोफेशनल के लिए सकारात्‍मक परिवेश के निर्माण में औपचारिक कार्य व्‍यवस्‍था की महत्‍वपूर्ण भूमिका होती है। 31 प्रतिशत शिक्षकों के यहां डेडिकेटेड वर्करूम नहीं है; वो परिवार के सदस्‍यों द्वारा उपयोग की जाने वाली जगह का ही इस्‍तेमाल करते हैं। वर्तमान परिदृश्‍य में, कार्य के लिए अलग जगह का होना आवश्‍यक है। अध्‍ययन से पता चला कि 63 प्रतिशत लोग ऑनलाइन पढ़ाने के लिए कुर्सी और मेज का उपयोग करते हैं। 25.4 प्रतिशत शिक्षकों द्वारा ऑनलाइन पढ़ाने के लिए डाइनिंग टेबल की कुर्सी और डेस्‍क का उपयोग किया जाता है; 22 प्रतिशत द्वारा बेड का उपयोग किया जाता है और 25 प्रतिशत द्वारा सोफे का उपयोग किया जाता है। ज्‍यादा से ज्‍यादा 16 प्रतिशत शिक्षक, फर्श पर बैठ पर काम करते हैं। इन आंकड़ों से पता चलता है कि शिक्षकों के पास समर्पित कार्यस्‍थल है।

72 प्रतिशत शिक्षक घर से काम करते समय शरीर दर्द का अनुभव करते हैं। 19 प्रतिशत ने बताया कि वो बेड से काम करते समय बिना किसी बैक सपोर्ट के आगे की ओर झुककर बैठते हैं। 14 प्रतिशत ने बताया कि वो बिना उचित बैक सपोर्ट के फर्श पर पालथी मारकर बैठते हैं। इन दोनों ही मुद्राओं (पॉश्‍चर्स) के चलते पीठ दर्द और घुटने में दर्द होता है।

गोदरेज इंटेरियो के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंटमार्केटिंग (बी2बी)समीर जोशी ने कहा, ”इस महामारी के चलते अध्‍यापन के प्रति शिक्षकों का दृष्टिकोण बदल दिया है। वर्चुअल टीचिंग हमारे अनुमान से कहीं अधिक लंबे समय से हमारी जिंदगी का हिस्‍सा रहा है। दुनिया भर में शिक्षा प्रणाली व माध्‍यम में बदलाव के साथ, शिक्षकों की जिम्‍मेदारियां भी बढ़ती जा रही हैं। ऑनलाइन शिक्षा के कई फायदे हैं तो कुछ नुकसान भी हैं। जहां तकनीक, आवागमन के समय की बचत और सुरक्षित वातावरण में कार्य जैसी बातें शिक्षकों के लिए अनुकूल हैं, जबकि गैजेट का अत्‍यधिक उपयोग, अनियमित या शून्‍य अवकाश एवं सोशल आइसोलेशन (समाज से दूरी) जैसे कारक उन्‍हें शारीरिक, भावनात्‍मक एवं मनोवैज्ञानिक रूप से प्रभावित करते हैं। इन बातों के आधार पर, एक दिनचर्या बनाना और कुशलतापूर्वक ऑनलाइन टीचिंग के चरणों को सीखना अत्‍यावश्‍यक है। घर से काम करते हुए शिक्षकों का बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य सुनिश्चित करने हेतु, गोदरेज इंटेरियो, टीच फ्रॉम होम वेबिनार का परामर्श देता है। इसके अलावा, हमने ऐसे समाधानों की एक मार्गदर्शिका तैयार की, जिसके जरिए शिक्षक उसमें दिये गये परामर्शों को मानकर अपने स्‍वास्‍थ्‍य एवं वर्चुअल लेशंस की रक्षा के लिए सरल दिनचर्या अपना सकते हैं।”

वर्तमान स्थिति के मद्देनजर, ऑनलाइन शिक्षा इस कठिन समय में शिक्षकों के लिए सहायक व लाभदायक साबित हुई है। इसके जरिए, शिक्षक, छात्रों को स्‍क्रीन के जरिए न केवल आसानी से पढ़ा सकते हैं बल्कि उनके साथ नोट्स भी साझा कर सकते हैं। इस तरह के बदलाव ने न केवल शिक्षकों व छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की है बल्कि पढ़ाई को जारी रखने में भी सहायक साबित हुई है। ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्‍प कई महत्‍वपूर्ण तरीकों से शिक्षा प्रणाली के लिए एक वरदान साबित हुई है।

इस श्‍वेतपत्र में निम्‍नलिखित उपाय भी बताये गये हैं जिनसे शिक्षक को कुशलतापूर्वक ऑनलाइन पढ़ाने में मदद मिल सकती है:

  • इसे सरल बनाएं – ऑनलाइन पढ़ाई की शुरुआत सामान्‍य तौर पर छात्रों के पूरे समूह को दिखाने के साथ होती है और उसके बाद, छात्रों के सवालों की बौछार होने लगती है। डिस्‍टेंस लर्निंग का प्रमुख दोष यह है कि शिक्षक और छात्र एक ही स्‍थान पर मौजूद नहीं होते हैं जिससे कि वो साथ में सवालों पर चर्चा कर सकें। इसके बजाये, पढ़ाई का अधिकांश समय असाइनमेंट्स में लग जाता है जिसके लिए बहुत अधिक स्‍वनिर्देशन जरूरी होता है।
  • चरण-दर-चरण सीखें – अध्‍ययन और अध्‍यापन एक सिक्‍के के दो पहलू हैं। शिक्षक अपने छात्रों को सीखाते हुए अपनी तकनीकी समझ बढ़ाने के लिए उनकी सहायता भी ले सकते हैं। आसान मोबाइल कम्‍यूनिकेशन एप्लिकेशंस का उपयोग करके, शिक्षक कक्षाएं ले सकते हैं या कभी भी अपने छात्रों से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा, नियमित रूप से असाइनमेंट्स को रिव्‍यू करने से उन्‍हें उनके छात्रों की प्रगति जानने में मदद मिलेगी।
  • दिनचर्या बनाएं – सुस्‍पष्‍ट दिनचर्या अपनाने से छात्रों को कार्य के समय अधिक ध्‍यान देने और कुशल बने रहने में मदद मिलेगी। पहले से ही कार्य-समय और अवकाश के समय निर्धारित कर देने से उन्‍हें थकान से बचने में मदद मिलेगी। यही नहीं, शिक्षक सर्वोच्‍च और निम्‍नतम प्राथमिकता के आधार पर अपने कार्य का वर्गीकरण कर सकते हैं।
  • सही इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर युक्‍त ऑपचारिक सेटअप में काम करें – औपचारिक वर्क डेस्‍क कायम करके या घर के शांत स्‍थान से काम करने से शिक्षकों का दूसरी ओर ध्‍यान नहीं बंटेगा। परिवार के सदस्‍यों से डिस्‍टर्ब न करने का आग्रह करके या टीवी एवं म्‍यूजिक सिस्‍टम बंद करने जैसे उपाय लाभदायक साबित हो सकते हैं।
  • शारीरिक रूप से सक्रिय रहें  रोजाना आसान व्‍यायामों के अभ्‍यास से हमारे शरीर को काफी लाभ मिल सकता है। यह न केवल संपूर्ण तंदुरूस्‍ती सुनिश्चित करता है, बल्कि यह हमारी संज्ञानात्‍मक क्षमता, ऊर्जा स्‍तर के लिए भी लाभदायक है और तनाव दूर करने में सहायक होता है। वर्तमान परिस्थिति में, शिक्षकों के लिए, क्रियाशील व्‍यायाम आवश्‍यक हैं जिससे कि उनकी सभी मांसपेशियां भरपूर काम कर सकें। उन्‍हें शारीरिक रूप से सक्रिय रहने के लिए उचित और आसान व्‍यायाम करने चाहिए।
  • बैठने का सही तरीका जानें – देश भर के शिक्षण संस्‍थान अपने कर्मचारियों को अर्गोनॉमिक्‍स के बारे में जानकारी देते हैं और उन्‍हें सही तरीके से बैठने का प्रशिक्षण देते हैं, क्‍योंकि गलत पॉश्‍चर के चलते एमएसडी हो सकते हैं। हमारे अध्‍ययन से पता चलता है कि लंबे समय तक काम करने के चलते, अब 33 प्रतिशत शिक्षकों को शरीर के विभिन्‍न हिस्‍सों में दर्द का अनुभव होता है।
  • समाज से जुड़े रहें – डिस्‍टेंस लर्निंग ने शिक्षकों को उनके रोजाना के मेल-मिलाप से दूर कर दिया है, जिसमें वो अपने छात्रों से मिलते थे और सहकर्मियों के साथ अनौपचारिक बातचीत का अवसर मिलता था। इसलिए, लेशंस पर जोर देने के साथ-साथ, शिक्षकों को चाहिए कि वो ईमेल्‍स, वीडियो कॉल्‍स, फोन कॉल्‍स, एवं टेक्‍स्‍ट मैसेजेज जैसे माध्‍यमों के जरिए साथियों से जुड़े रहें।
  • प्रकृति के सान्निध्य में रहें – कार्य परिवेश में बायोफिलिक कारकों को शामिल करने से शिक्षकों की मनोदशा बेहतर हो सकती है, उनकी रचनात्‍मकता एवं संज्ञानात्‍मक कौशल बेहतर हो सकती है। शोध से पता चलता है कि प्राकृतिक प्रकाश, विभिन्‍न रंगों एवं पौधों का व्‍यक्ति के स्‍वास्‍थ्‍य एवं तंदुरूस्‍ती पर सकारात्‍मक प्रभाव पड़ता है। दिन के प्रकाश के चलते छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन में निखार देखने को मिला है। इसके अलावा, बहुसंवेदी और संवर्द्धित वातावरण में न केवल हमारा मन लगता है बल्कि इसका संज्ञानात्‍मक, सूक्ष्‍म एवं सामाजिक कौशल पर भी सकारात्‍मक रूप से पड़ता है।

जहां छात्रों को वापस स्‍कूल जाने का इंतजार है, वहीं ऑनलाइन पढ़ाई के इस अनुभव से प्रधानाध्‍यापकों व शिक्षकों को बेहतर तरीके से यह समझने में मदद मिल सकेगी कि अच्‍छी शिक्षा प्रदान करने के लिए क्‍या जरूरी है और उसके लिए किन बातों पर ध्‍यान देना होगा। गुणवत्‍तापूर्ण ऑनलाइन शिक्षा की स्‍वाभाविक पारदर्शिता के चलते इससे जुड़ी चुनौतियां शीघ्र ही दूर हो जायेंगी। हालांकि, ऑनलाइन पढ़ाते समय शिक्षकों के स्‍वास्‍थ्‍य की बेहतर देखभाल वास्‍तविक चुनौती है।

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