Monday, February 1, 2021

कृषि व्याख्याता भर्ती में दोहराया जा रहा 29 वर्षों पुराना इतिहास, बाहरी राज्यों के अभ्यर्थी बनेंगे कृषि व्याख्याता



हठधर्मिता- प्रोविजनल सूची में नही मिले बीएडधारी, आरपीएससी ने एग्जाम में असफल अभ्यर्थियों को भी दिया नोकरी का ऑफर 

 आरपीएससी के हठी रवैये के कारण राज्य के सफल अभ्यर्थी बाहर हो जायेंगे और बाहरी राज्यों के अभ्यर्थी कृषि व्याख्याता बन जायेंगे 

 जयपुर। आरपीएससी द्वारा 2018 में स्कूल शिक्षा में 20 विषयों में प्राध्यापक(स्कूल व्याख्याता) के करीब 5 हजार पदों पर भर्ती निकाली थी, जिसमें 370 पद कृषि प्राध्यापक के भी थे, लेकिन आरपीएससी की ओर से इस विषय में भर्ती के लिए कृषि में स्नातकोत्तर के साथ बीएड की अनिवार्यता लागू की थी. ऑनलाइन फॉर्म भरते समय बीएड के रोल नंबर के बिना फॉर्म नही भर पाने के कारण एमएससी एग्रीकल्चर किये हुए अभ्यर्थी राजस्थान हाईकोर्ट पहुंचे. हाईकोर्ट के आदेश पर आरपीएससी ने कृषि में स्नातकोत्तर छात्रों को कृषि व्याख्याता भर्ती में शामिल कर लिया गया आपको बता दे यह भर्ती करीब 29 साल के बाद आई थी और कृषि एक तकनीकी एवं प्रोफेशनल डिग्री होने के कारण बीएड की अनिवार्यता अनुचित होने के कारण कोर्ट ने कृषि में स्नातकोत्तर छात्रों को भर्ती में प्रोविजनल रूप से शामिल करने के आदेश दिए थे । 

कृषि प्राध्यापक भर्ती की लिखित परीक्षा जनवरी 2020 में होने के बाद जुलाई 2020 में रिजल्ट घोषित किया जिसमें कृषि विषय के 370 पदों के सापेक्ष 660 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया और सितंबर 2020 में इन सफल अभ्यर्थियों के डॉक्युमेन्ट वेरिफिकेशन सम्पन्न करा लिये गए जिसमें 660 मे से करीब 90 प्रतिशत अभ्यर्थियों के पास बीएड की डिग्री नही पाई गई जिन अभ्यर्थियों के पास डिग्री पाई गई उनकी बीएड जनरल साइंस में थी यानी किसी भी अभ्यर्थी के पास कृषि में बीएड की डिग्री नही पाई गई और आरपीएससी इन 90 प्रतिशत सफल अभ्यर्थियों को भर्ती से बाहर करने पर अड़ गया तो सफल अभ्यर्थी फिर से राजस्थान हाईकोर्ट गए जिसके बाद आरपीएससी ने इन सफल अभ्यर्थीयों को कोर्ट के अन्तिम आदेश तक भर्ती में बनाये रखते हुए वेरिफिकेशन सम्पन्न करा लिए लेकिन हाईकोर्ट की 5 सुनवाइयों के बाबजूद अरपीएससी ने कोई जबाब पेश नही किया है, 12 जनवरी 2020 को हुई सुनवाई में आरपीएससी ने 10 दिन का और समय माँगा और इधर 15 जनवरी को आरपीएससी ने एक अजीब सा नोटिस जारी किया जिसमे कहा गया कि 25 जनवरी तक वे सब अभ्यर्थी जो कृषि व्याख्याता भर्ती में एग्जाम दिए है ओर उनके पास बीएड की डिग्री हो वो अभ्यर्थी अपने डॉक्यूमेंट आरपीएससी में जमा कराए 

इस नोटिस के बाद सवाल उठता है की क्या आरपीएससी

 केवल जनरल साइंस में बीएड की डिग्री देखकर अयोग्य एवं लिखित परीक्षा में असफल अभ्यर्थियों को व्याख्याता बना देगी

 

दूसरा सवाल यह है कि उन स्नात्कोत्तर अभ्यर्थियों का क्या होगा जो करीब 2 साल तक दिन रात मेहनत करके परीक्षा में सफल हुए , हाईकोर्ट के चक्कर लगा रहे और अब एक दम से उन्हें भर्ती प्रक्रिया से बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है

 

 

आपको बता दे कृषि प्राध्यापक भर्ती में से बीएड की अनिवार्यता हटाने की मांग को लेकर कृषि स्नातकोत्तर अभ्यर्थियों के पक्ष में प्रदेश के 3 मंत्रियों सहित करीब 73 विधायक मुख्यमंत्री को पत्र लिख चुके हैं. अभ्यर्थियों का कहना है कि '29 सालों के बाद कृषि प्राध्यापक की भर्ती निकाली गई है और उसमें भी नये नियम जोड़ दिया गया, जिसके तहत करीब 90 फीसदी से ज्यादा अभ्यर्थी बीएड धारी नहीं है. कृषि स्नातक कोर्स 4 वर्षीय तकनीकी एवं प्रोफेशनल डिग्री है. प्रोफेशल कोर्स होने के कारण कृषि में बीएड करने की अनिवार्यता नहीं है. उत्तरप्रदेश, दिल्ली, छत्तीसगढ़ में भी प्राध्यापक, व्याख्याता भर्ती में शिक्षा में डिग्री या डिप्लोमा की अनिवार्यता नहीं है.ऐसे में राजस्थान से भी इस नियम को हटाना चाहिए. अगर आरपीएससी की ओर से नियम को नहीं हटाया गया तो करीब 550 चयनित अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे. इसलिए सरकार को बेरोजगारों के हितों में फैसला लेना चाहिए.'

 

छात्रों के आगे बात करते हुए बताया कि जिन अभ्यर्थियों के पास बीएड की डिग्री पाई गई है वो जनरल साइंस की है राजस्थान में किसी भी विस्वविद्यालय द्वारा कृषि में बीएड नही कराई जाती है राजस्थान में 5 कृषि विश्वविद्यालय है उनमें भी कृषि में बीएड नही कराई जाती है क्यो की कृषि विषय के पठन पाठन के लिए बीएड की कोई उपयोगिता नही है क्यो की *कृषि* एक व्यावसायिक कोर्स है ।

 

छात्रों ने हमारे स्थानीय रिपोर्टर को बताया कि आरपीएससी के हठी रवैये के कारण 15 जनवरी को ऐसे बीएड जो केवल लिखित परीक्षा में शामिल हुए हो उन्हें अपने डॉक्यूमेंट जमा कराने का नोटिश जारी किया है जिससे राजस्थान के सफल और योग्य अभ्यर्थी तो भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो जायेगे और अन्य बाहरी राज्यों के ऐसे अभ्यर्थी जो ना तो लिखित परीक्षा में पास हुए है और ना राजस्थान के कल्चर और खेती को समझते है ऐसे अयोग्य अभ्यर्थी व्याख्याता बन जायेंगे 

आरपीएससी फिर से 29 साल पुराना इतिहास दोहरा रही है जिसमे 1991-92 की कृषि व्याख्याता भर्ती में अधिकतर बाहरी राज्यो के अभ्यार्थी ही कृषि व्याख्याता बने थे यही इतिहास अब 2018 की कृषि व्याख्याता भर्ती में बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों को कृषि व्याख्याता बनाकर आरपीएससी दोहराने जा रही है 

राजस्थान के सफल अभ्यर्थियों का कहना है कि राज्यसरकार इस कृषि व्याख्याता भर्ती मामले को संज्ञान में लेकर राजस्थान के कृषि छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए भर्ती में संसोधन कर बीएड की अनिवार्यता खत्म कर छात्रों को राहत दे या सफल अभ्यर्थियों को जनरल साइंस में बीएड करने के लिए कुछ वर्ष का समय दे

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