Monday, December 21, 2020

बैंक ऑफ बड़ौदा ने पूर्ववर्ती देना बैंक और विजया बैंक के विलय/एकीकरण का काम निर्धारित समय से पहले किया पूरा

जयपुर 21 दिसंबर 2020 –  संपत्ति के मामले में देश में सार्वजनिक क्षेत्र के तीसरे सबसे बड़े बैंक- बैंक ऑफ बड़ौदा ने विजया बैंक और देना बैंक की 3898 शाखाओं का अपनी शाखाओं में विलय/एकीकरण का कार्य पूरा कर लिया है। बैंक ने दिसंबर 2020 में देना बैंक की 1770 शाखाओं के एकीकरण का कार्य पूरा किया। इससे पहले सितंबर 2020 में बैंक ऑफ बड़ौदा ने विजया बैंक की 2128 शाखाओं के एकीकरण का कार्य पूरा कर लिया था। इसके साथ ही पूर्ववर्ती देना बैंक और विजया बैंक का बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ एकीकरण का कार्य निर्धारित समय से पहले पूरा हो गया है।

इस पैमाने पर दो बैंकों की शाखाओं का विलय अपनी तरह का अनूठा कार्य ही है। इस दौरान 5 करोड़ से अधिक ग्राहक खाते माइग्रेट किए गए। शाखाओं के अलावा, सभी एटीएम, पीओएस मशीन और क्रेडिट कार्ड सफलतापूर्वक स्थानांतरित हो गए हैं। विलय की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी होने के बाद  सभी ग्राहकों के लिए अब देशभर में कुल 8248 घरेलू शाखाओं और 10318 एटीएम तक पहुंच संभव हो गई है और इस तरह वे बैंक आॅफ बड़ौदा के सभी प्रोडक्ट्स और सेवाओं की पूरी रेंज का लाभ उठा सकेंगे। इसके अलावा, सभी ग्राहकों को अब बैंक ऑफ बड़ौदा के अत्याधुनिक डिजिटल चैनल जैसे बड़ौदा कनेक्ट, एम-कनेक्ट प्लस की सुविधा भी हासिल होगी। ये सुविधाएं ग्राहकों के अनुकूल हैं और इनका आसानी से उपयोग किया जा सकता है। बैंक ऑफ बड़ौदा के अत्याधुनिक डिजिटल चैनल की सहायता से ग्राहक अपने घर के आराम से बैंकिंग सेवाओं का आनंद ले सकते हैं।

जिन ग्राहकों के खातों को माइग्रेट कर दिया गया है, बैंक ऑफ बड़ौदा ने उनसे अनुरोध किया है कि वे किसी भी डिजिटल चैनल या कॉल सेंटर या किसी भी शाखा का उपयोग करके अपने खाते से संबंधित जानकारी जैसे खाता संख्या, आईएफएससी कोड आदि हासिल कर सकते हैं। ग्राहकों को पहले से ही जारी किए गए डेबिट कार्ड निर्धारित अवधि के समाप्त होने तक कार्य करते रहेंगे।

निर्धारित समय से पहले ही विलय का कार्य पूरा होने पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए बैंक आॅफ बड़ौदा के एमडी और सीईओ श्री संजीव चड्ढा ने कहा, ‘‘हमें यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि हमने कोविड से उपजी चुनौतियों के बावजूद पूर्ववर्ती देना बैंक और विजया बैंक के विलय/एकीकरण का काम पूरा कर लिया है। हम एक बार फिर अपने सभी सम्मानित ग्राहकों का स्वागत करते हैं और उनसे अनुरोध करते हैं कि वे बैंक ऑफ बड़ौदा के सभी उत्पादों और डिजिटल समाधानों का पूरा लाभ उठाएं। विलय की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी होने के साथ ही बैंक आॅफ बड़ौदा तीन बैंकों के इस समामेलन से मिलने वाले लाभों को प्राप्त करने और समेकित करने के लिए तैयार है। हम पूरी निष्ठा और ईमानदारी से अपने सभी हितधारकों का, विशेष रूप से हमारे सभी सम्मानित ग्राहकों का आभार व्यक्त करते हैं और कामना करते हैं कि उनका साथ हमेें आगे भी मिलता रहेगा।‘‘

बैंक ऑफ बड़ौदा के बारे में

20 जुलाई, 1908 को स्थापित बैंक ऑफ बड़ौदा (‘बैंक’) सरकारी स्वामित्व वाला बैंकिंग और वित्तीय सेवा संगठन है, जिसका मुख्यालय वड़ोदरा (जिसे पहले बड़ौदा के नाम से जाना जाता था), भारत में है।

बैंक ऑफ बड़ौदा भारत का तीसरा सबसे बड़ा बैंक है, जिसकी देशभर में एक मजबूत घरेलू उपस्थिति है। बैंक के वितरण नेटवर्क में 8,200 से अधिक शाखाएं, 10,000 से अधिक एटीएम और 1,200 से अधिक सेल्फ-सर्विस ई-लॉबी और 18,000 बिजनेस काॅरेस्पोन्डेंट शामिल हैं। 20 देशों में फैले 100 शाखाओं/सहायक कार्यालयों के नेटवर्क के साथ बैंक की एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति है। बैंक के पास पूरी तरह से स्वामित्व वाली सहायक कंपनियां हैं, जिनमें बाॅब फाइनेंशियल सॉल्यूशंस लिमिटेड (पूर्ववर्ती बाॅब कार्ड्स लिमिटेड), बाॅब कैपिटल मार्केट्स और बाॅब एसेट मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड शामिल हैं। बीमा क्षेत्र में भी बैंक ऑफ बड़ौदा का संयुक्त उद्यम- इंडिया फस्र्ट लाइफ इंश्योरेंस कंपनी है।  नैनीताल बैंक में बैंक आॅफ बड़ौदा का 98.57 प्रतिशत हिस्सा है। बैंक ने तीन क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों अर्थात बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक, बड़ौदा राजस्थान ग्रामीण बैंक और बड़ौदा गुजरात ग्रामीण बैंक को भी प्रायोजित किया है।

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