Thursday, December 17, 2020

महिन्द्रा ग्रुप ने 2025 तक 10 लाख वंचित युवाओं के कौशल के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की

जयपुर 17 दिसंबर 2020 – महिन्द्रा ग्रुप ने आज ऐलान किया है कि इसके 75वें ऐतिहासिक वर्ष में इसके कौशल अभियान जैसे महिन्द्रा प्राइड स्कूल्स एण्ड क्लासरूम्स, स्मार्ट एकेडमी, स्मार्ट प्लस और सूर्या मित्र 500,000 युवाओं को प्रशिक्षित कर चुके हैं और पिछले 15 सालों में अकेले महिन्द्रा प्राइड स्कूल ने 100,000 नौकरियां उत्पन्न की हैं। यह अगले 5 सालों में 500,000 युवाओं को कौशल प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। आज एक कार्यक्रम के दौरान आनन्द महिन्द्रा, चेयरमेन, महिन्द्रा ग्रुप ने एक काॅफी टेबल बुक ‘द जाॅब फैक्टरी’ क अनावरण किया, जो महिन्द्रा प्राइड स्कूल के 75 युवा एल्युमनाई की कहानियों पर रोशनी डालती है। रोज़गार क्षमता के लिए कौशल के बारे में जागरुककता फैलाने के उद्देश्य से हाल ही मंे सोशल मीडिया पर एक डिजिटल फिल्म रुस्किल है तो फ्यूचर है का लाॅन्च किया गया।

भारत के आर्थिक विकास की कहानी के नायक इसके युवा और इसका जनसांख्यिकी लाभांश है। रोज़गार के अवसर मिलने से वंचित समुदायों के युवाओं को एक पहचान और गरिमा मिलती है, उनके सशक्तीकरण को बढ़ावा मिलता है, वे सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों के समाधान में सक्षम बनते हैं। हालांकि, कौशल की दृष्टि से अंतराल एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। 2005 में अपनी 60वीं सालगिरह के अवसर पर महिन्द्रा ग्रुप ने भारत के माननीय पूर्व राष्ट्रपति डाॅ अब्दुल कलाम की मौजूदगी में युवाओं के कौशल के लिए सकारात्मक प्रतिबद्धता की पुष्टि की तथा अपनी सीएसआर पहलों के तहत दो महिन्द्रा प्राइड स्कूल स्थापित करने की घोषणा भी की। महामारी के चलते आई बाधाओं के मद्देनज़र कोविड के इस दौर में महिन्द्रा ग्रुप अपने इम्प्लीमेंटशन पार्टनर नंदी फाउन्डेशन के सहयोग से रोज़गार कौशल संबंधी पाठ्यक्रम में बदलाव लाएगा। इस प्रोग्राम के तहत तकनीक के अलावा कृषि, ई-काॅमर्स, सेवाओं एवं उद्यमिता जैसे नए क्षेत्रों में पाठ्यक्रम का विस्तार किया जाएगा। एमपीएस अगले पांच सालों 100,000 अतिरिक्त नौकरियां भी उत्पन्न करेगा।

आनंद महिन्द्रा कौशल पहलों के प्रभाव पर टिप्पणी करते हुए कहा, ‘‘समाज के वंचित समुदायों के युवाओं की छिपी क्षमता को उभारने के लिए महिन्द्रा प्राइड स्कूल का गठन किया गया। जब भी मैं प्राइड स्कूल के पूर्व छात्रों से बात करता हूं, मैं यह देखकर दंग रह जाता हूं कि हम उन्हें ‘सीमांत’ या कमज़ोर वर्ग क्यों कहते हैं, वास्तव में उनके भीतर छिपी प्रतिभा उन्हें समाज का मजबूत वर्ग बनाती हैं। उनकी उपलब्धियां और करियर में आगे बढ़ने की गति इस दृष्टिकोण की पूरक है। मुझे खुशी है कि महिन्द्रा प्राइड स्कूल इन युवाओं के जीवन पर सकारात्मक प्रीााव उत्पन्न कर रह हैं, और अपने वादे पर खरा उतर रहे हैं।’’

मनोज कुमार, सीईओ, नंदी फाउन्डेशन ने कहा, ‘‘हमारे जनसांख्यिकी फायदों के बावजूद सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टि से वंचित समुदायों के लाखों युवाओं को संगठित क्षेत्र में नौकरी नहीं मिल पाती। महिन्द्रा प्राइड स्कूल प्रोग्राम के माध्यम से हमने ऐसे अनूठे पाठ्यक्रम का निर्माण किया है, जो इन युवाओं को नौकरी के लिए तैयार करते हैं और सुनिश्चित करते हैं कि उन्हें कम से कम ‘पांच अंकों के वेतन वाली नौकरी’ मिले। हमारे द्वारा उत्पन्न की गई 100,000 नौकरियां इस बात की पुष्टि करती हैं कि इन युवाओं के दुर्भाग्य को दूर किया जा सकता है। बस इसके लिए इस तरह के प्रयास करने की आवश्यकता है।’’

काॅफी टेबलबुक ‘द जाॅब फैक्टरी’ की अवधारणा और लेखक मनोज कुमार द्वारा किया गया है, फोटोग्राफी और डिज़ाइन- जाने-माने फोटोग्राफर नेविन जाॅन ने किया है और चित्रकारी में नीजीना नीलम्बरम का योगदान है। यह आॅनलाईन ;बसपबा ीमतमद्ध उपलब्ध है या इसकी प्रिन्टेड प्रतिलिपी के लिए कउमससवण्ेंइपदं/उंीपदकतंण्बवउ पर लिखें।

शीतल मेहता, सीनियर वाईस प्रेज़ीडेन्ट- सीएसआर, महिन्द्रा ग्रुप ने कहा, ‘‘यह देखकर अच्छा लगता है कि हमारे स्नातक युवाओं को महिन्द्रा प्राइड स्कूल में सीखे गए कौशल के आधार पर नौकरियां मिल रही हैं। इन नौकरियों के माध्यम से न केवल उनकी जीवनस्तर में सुधार आया है बल्कि समाज में उनके प्रति सम्मान भी बढ़ा है। आज वे गरिमा के साथ जीवन जी रहे है। हमें विश्वास है कि भविष्य में भी हम मांग उन्मुख कौशल प्रशिक्षण पर ध्यान केन्द्रित करते हुए युवाओं के लिए नौकरियों के ज़्यादा से ज़्यादा अवसर उत्पन्न करेंगे।’’

महिन्द्रा प्राइड स्कूल, महिन्द्रा ग्रुप की सीएसआर पहल है जिसकी स्थाना 2005 में की गई, भारत के युवाओं को कौशल प्रदान करना इसका मुख्य उद्देश्य है। एमपीएस देश भर में फैले हैं, इनके केन्द्र चेन्नई, पुणे, चंडीगढ़, हैदराबाद, श्रीनगर, पटना और वाराणसी में हैं। ये विशेष रूप से समाज के वंचित समुदायों जैसे एससी, एसटी, ओबीसी, नोटिफाईड ट्राइब और डी-नोटिफाईड ट्राइब के 18-25 वर्ष के युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। वे ग्रामीण युवाओं पर ध्यान केन्द्रित करते हुए पुरूषांे एवं महिलाओं को एक समान अवसर उपलब्ध कराते हैं। यह गैर-रिहायशी केन्द्र हैं जो छात्रों को बिना किसी लागत के आजीविका के बेहतर विकल्प प्रदान करते हैं। स्कूल विशेषसमुदायों में एक माह के लिए ‘रोड शो’ आयोजित करते हैं, जहां एससी/एसटी/ओबीसी/डीएनटी आबादी अधिक है, इन शो के माध्यम से युवाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्हें अंग्रेज़ी, ग्रूमिंग एवं साॅफ्ट स्किल तथा आईटी इनेबल्ड सेवाओं, संगठित रीटेल, आतिथ्य एवं क्यूएसआर और आॅटोमोटिव सेक्टरों में प्रशिक्षण देकर सक्षम बनाया जाता है।

महिन्द्रा प्राइड प्रोग्राम का डिज़ाइन नंदी फाउन्डेशन द्वारा किया गया, जो हब एण्ड स्पोक माॅडल पर संचालित किए जाते हैं। हब का अर्थ है महिन्द्रा प्राइड स्कूल और स्पोक का अर्थ है महिन्द्रा प्राइड क्लासरूम जिनकी स्थापना देश भर के पोलिटेक्निक, ओद्यौगिक प्रशिक्षण संस्थानों, कला एवं विज्ञान के काॅलेजों में की जाती है। नंदी फाउन्डेशन ने 300-400 कोरपोरेट्स के सहयोग से रीटेल, आतिथ्य, आईटीईएस एवं आॅटो क्षेत्रों में विशेष कौशल पाठ्यक्रम भी तैयार किए हैं, जो छात्रों को ‘नौकरियों के लिए तैयार’ करते हैं। महामारी के दौरान महिन्द्रा प्राइड स्कूलों ने रिमोट लर्निंग पर काम किया है और छात्रों के लिए सतत प्रशिक्षण को सुनिश्चित किया है।

महिन्द्रा के बारे में
महिन्द्रा ग्रुप 19.4 बिलियन अमेरिकी डाॅलर कीकंपनियों का समूह है जो आधुनिक मोबिलिटी समाधानो,ं ग्रामीण समृद्धि, शहरी जीवनशैली में सुधार, नए कारोबारों एवं समुदायों के विकास के द्वारा लोगों के जीवन को बेहतर बनाते हैं। यूटिलिटी वाहनों, सूचना प्रोद्यौगिकी, वित्तीय सेवाओं तथा वेकेशन के क्षेत्रों में यह ग्रुप अग्रणी स्थिति पर है और वाॅल्युम की दृष्टि से दुनिया की सबसे बड़ी टैªक्टर कंपनी का संचालन करती है। नव्यकरणी उर्जा, कृषि कारोबार, लाॅजिस्टिक्स एवं रियल एस्टेट विकास के क्षेत्र में इसकी सशक्त मौजूदगी है। महिन्द्रा का मुख्यालय भारत में है। 100 देशों में इसके 256000 कर्मचारी हैं।

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